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Uttarkashi News: डीजल के अभाव में ठप पड़ा यमुना का चैनलाइजेशन कार्य
Sat, 01 Aug 2026 04:32 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, उत्तर काशी
संवाद न्यूज एजेंसी, उत्तर काशी
Updated Sat, 01 Aug 2026 04:32 PM IST
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बड़कोट। यमुना नदी के बढ़ते जलस्तर के बीच स्यानाचट्टी के आपदा प्रभावित लोगों ने सिंचाई विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि विभाग की ओर से नदी के चैनलाइजेशन का कार्य डीजल के अभाव में पिछले दो-तीन दिनों से ठप पड़ा है। इससे यमुना के बहाव को नियंत्रित करने और आबादी को सुरक्षित रखने के प्रयास बाधित हो गए हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि नदी में लगातार मलबा जमा होने से जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। हालात ऐसे हैं कि कई होटलों की पहली मंजिल तक पानी पहुंच चुका है जिससे क्षेत्र में दहशत का माहौल बना हुआ है। आपदा प्रभावितों ने बताया कि कुछ समय पहले तक मौके पर तीन पोकलेन मशीनें चैनलाइजेशन कार्य में लगी थीं लेकिन कुछ दिन पहले एक मशीन को बनास क्षेत्र भेज दिया गया।
वहीं बची हुई मशीनें भी डीजल नहीं मिलने के कारण बंद पड़ी है। आरोप है कि यदि समय पर डीजल की व्यवस्था की जाती तो राहत एवं सुरक्षा कार्य लगातार जारी रह सकते थे। स्थानीय निवासी जयपाल सिंह रावत, शैलेन्द्र सिंह राणा और दिनेश राणा ने प्रशासन और सिंचाई विभाग पर उदासीनता का आरोप लगाते हुए कहा कि सरकारी तंत्र की लापरवाही के कारण स्याना चट्टी आज भी खतरे की जद में है। उन्होंने बताया कि बढ़ते जलस्तर के कारण नदी किनारे लगाए जा रहे वायरक्रेट भी पानी में डूब गए हैं। संवाद
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स्थानीय लोगों का कहना है कि नदी में लगातार मलबा जमा होने से जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। हालात ऐसे हैं कि कई होटलों की पहली मंजिल तक पानी पहुंच चुका है जिससे क्षेत्र में दहशत का माहौल बना हुआ है। आपदा प्रभावितों ने बताया कि कुछ समय पहले तक मौके पर तीन पोकलेन मशीनें चैनलाइजेशन कार्य में लगी थीं लेकिन कुछ दिन पहले एक मशीन को बनास क्षेत्र भेज दिया गया।
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वहीं बची हुई मशीनें भी डीजल नहीं मिलने के कारण बंद पड़ी है। आरोप है कि यदि समय पर डीजल की व्यवस्था की जाती तो राहत एवं सुरक्षा कार्य लगातार जारी रह सकते थे। स्थानीय निवासी जयपाल सिंह रावत, शैलेन्द्र सिंह राणा और दिनेश राणा ने प्रशासन और सिंचाई विभाग पर उदासीनता का आरोप लगाते हुए कहा कि सरकारी तंत्र की लापरवाही के कारण स्याना चट्टी आज भी खतरे की जद में है। उन्होंने बताया कि बढ़ते जलस्तर के कारण नदी किनारे लगाए जा रहे वायरक्रेट भी पानी में डूब गए हैं। संवाद
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