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मौसम के साथ बदले कृषि के तौर तरीके
ब्यूरो/ अमर उजाला
Updated Sat, 16 Jan 2016 08:43 PM IST
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माघ मेले के तीसरे दिन मंच पर कृषि एवं उद्यान विभाग की ओर से कृषक वैज्ञानिक संवाद गोष्ठी का आयोजन किया गया।
गोष्ठी में मुख्य कृषि अधिकारी महिधर तोमर एवं कृषि विज्ञान केंद्र चिन्यालीसौड़ के वैज्ञानिक डा. वीके सचान ने कहा कि बदलते मौसम के साथ कृषि के तौर तरीकों में भी बदलाव की जरूरत है।
किसान यदि फसल चक्र अपनाकर उन्नत बीज एवं पौष्टिक खाद का प्रयोग करें, तो पैदावार बढ़ाई जा सकती है। उन्होंने किसानों से फसल चयन से पूर्व मिट्टी की जांच कराने को कहा।
वैज्ञानिक डा. राजेश बिजल्वाण ने फसलों पर लगने वाले रोगों की जानकारी के साथ ही इनसे बचने और उपचार के बारे में बताया। अध्यक्षता करते हुए प्रगतिशील किसान नागदत्त ने कहा कि कृषि बागवानी पहाड़ के ग्रामीणों की आजीविका का प्रमुख आधार है।
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गोष्ठी में सीडीओ जीएस रावत, आत्मा परियोजना के शैलेंद्र उनियाल, एसएस बिजल्वाण, यशपाल राणा, यासीन, दलवीर चौहान, रविंद्र पंवार आदि मौजूद रहे।
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गोष्ठी में मुख्य कृषि अधिकारी महिधर तोमर एवं कृषि विज्ञान केंद्र चिन्यालीसौड़ के वैज्ञानिक डा. वीके सचान ने कहा कि बदलते मौसम के साथ कृषि के तौर तरीकों में भी बदलाव की जरूरत है।
किसान यदि फसल चक्र अपनाकर उन्नत बीज एवं पौष्टिक खाद का प्रयोग करें, तो पैदावार बढ़ाई जा सकती है। उन्होंने किसानों से फसल चयन से पूर्व मिट्टी की जांच कराने को कहा।
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वैज्ञानिक डा. राजेश बिजल्वाण ने फसलों पर लगने वाले रोगों की जानकारी के साथ ही इनसे बचने और उपचार के बारे में बताया। अध्यक्षता करते हुए प्रगतिशील किसान नागदत्त ने कहा कि कृषि बागवानी पहाड़ के ग्रामीणों की आजीविका का प्रमुख आधार है।
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गोष्ठी में सीडीओ जीएस रावत, आत्मा परियोजना के शैलेंद्र उनियाल, एसएस बिजल्वाण, यशपाल राणा, यासीन, दलवीर चौहान, रविंद्र पंवार आदि मौजूद रहे।