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ग्रामीणों का ककड़ी का कारोबार हुआ शून्य
ब्यूरो/अमर उजाला, उत्तरकाशी
Updated Wed, 13 Jul 2016 10:37 PM IST
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आपदा में पुल टूटने से स्याबा व सालू गांव के लोगों को ककड़ी बाजार पहुंचाने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। सालू गांव से बाजार के पहुंच मार्ग पर पुलिया बहने से सीजन में 23 लाख के ककड़ी का कारोबार शून्य हो गया है। स्याबा गांव का नलूणा में भागीरथी में बना पुल बह गया। सरकार ने ट्राली तो लगाई है, लेकिन यह भी डेढ़ क्विंटल से ज्यादा भार आरपार नहीं कर पाती है।
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स्याबा, सालू और सारी गांव में ककड़ी का व्यावसायिक उत्पादन होता है। आपदा में स्याबा और सालू गांव के पहुंच मार्ग के पुल, पुलिया आपदा की भेंट चढ़ गए थे। सीजन में दोनों गांव में हर परिवार औसतन 30 हजार रुपये की ककड़ी बेचकर परिवार का भरण-पोषण करता था। अब ट्राली में सीमित भार और आवाजाही की व्यवस्था नहीं होने के कारण गांव के लोगों ने ककड़ी, कद्दू, भिंडी, मूली आदि सब्जी का उत्पादन भी कम कर दिया है।
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किसान भागवत सिंह कहते हैं कि 80 परिवार वाले उनके गांव को आपदा के बाद तीन वर्षों में बहुत नुकसान उठाना पड़ा। सालू के प्रधान दिनेश रावत बताते हैं कि 77 परिवार वाले गांव में हर परिवार ककड़ी से ही 30 हजार से ज्यादा कमाई कर लेता था। बैंगन, भिंडी, मूली सब्जी से भी अतिरिक्त कमाई कर लेते थे। पुल नहीं बनने से लोगों की आजीविका का आधार भी खत्म हो गया है।
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बिचौलियों की मौज
स्याबा गांव से जो ककड़ी किसी तरह ट्राली से बाजार पहुंच रही है, उसे बाजार पहुंचाकर कारोबारी 30 रुपये में खरीदकर उपभोक्ताओं को 60 रुपये किलो बेच रहे हैं। न उत्पादक को मुनाफा न उपभोक्ता को फायदा बिचौलिया आपदा का फायदा उठाकर मौज कर रहे हैं। ककड़ी का उत्पादन घटने से कारोबारी अब धनोल्टी चेंबर से पहाड़ी ककड़ी मंगा रहे हैं।