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Uttarkashi: भागीरथी का जलस्तर बढ़ा; दहशत में रात को सो नहीं पा रहे ग्रामीण, कर रहे पहरेदारी
Tue, 30 Jun 2026 06:08 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, उत्तर काशी
संवाद न्यूज एजेंसी, उत्तर काशी
Updated Tue, 30 Jun 2026 06:08 PM IST
सार
हर्षिल क्षेत्र के आठ गांव के प्रधान और पूर्व जनप्रतिनिधि जिलाधिकारी प्रशांत आर्य से मिलने पहुंचे। उन्होंने कहा कि गत वर्ष की आपदा के बाद से हर्षिल पर झील और बढ़ते नदी के जलस्तर का खतरा बना है लेकिन समय पर सुरक्षात्मक कार्य नहीं होने से आज पूरे हर्षिल सहित निचले क्षेत्रों में बड़ी आपदा का खतरा बन गया है।
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भागीरथी नदी
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विस्तार
भागीरथी नदी के बढ़ते जलस्तर से खतरे में आए हर्षिल के ग्रामीणों का कहना है कि पिछली पांच रातों से वे सो नहीं पाए हैं। गत वर्ष की आपदा के दौरान हर्षिल में बनी झील और नदी से हो रहे कटाव के कारण हर समय बड़ी आपदा का खतरा बना है। जिलाधिकारी कार्यालय में पहुंचे हर्षिल क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों व ग्रामीणों के साथ पहुंची वयोवृद्ध महिला पूर्व प्रधान बसंती नेगी ने डीएम से कहा कि हमारी सुरक्षा के जल्द ही पुख्ता इंतजाम किए जाए।
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मंगलवार को हर्षिल क्षेत्र के आठ गांव के प्रधान और पूर्व जनप्रतिनिधि जिलाधिकारी प्रशांत आर्य से मिलने पहुंचे। उन्होंने कहा कि गत वर्ष की आपदा के बाद से हर्षिल पर झील और बढ़ते नदी के जलस्तर का खतरा बना है लेकिन समय पर सुरक्षात्मक कार्य नहीं होने से आज पूरे हर्षिल सहित निचले क्षेत्रों में बड़ी आपदा का खतरा बन गया है।
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उन्होंने कहा कि बीते शुक्रवार रात में भागीरथी नदी का जलस्तर बढ़ने के कारण जीएमवीएन का टिनशेड बह गया था। उसके बाद शनिवार को दोबारा जलस्तर बढ़ने पर कई पेड़ टूट कर नदी में गिरे। अब स्थिति यह है कि जीएमवीएन सहित पुलिस थाना, लोनिवि गेस्ट हाउस और सेब के बगीचों सहित आवासीय भवनों और होटल होमस्टे का खतरा बना हुआ है।
शुक्रवार रात को नदी का जलस्तर बढ़ते ही लोगों को वहां पर चौकीदारी करनी पड़ रही है।
ग्रामीणों ने कहा कि अगर प्रशासन जल्द सुरक्षात्मक कार्य करना चाहता है तो वहां पर करीब चार सौ वायरक्रेट दीवार लगाई जाए। उसके बाद कुछ हद तक हर्षिल सुरक्षित हो सकता है। कहा कि अगर ऐसी स्थिति रहती है तो एक बड़ी आपदा के साथ हर्षिल का अस्तित्व समाप्त हो जाएगा।