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Dehradun News: शारदीय नवरात्र 11 से, हाथी पर सवार होकर आएंगी मां
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शारदीय नवरात्र इस वर्ष 11 अक्तूबर रविवार से शुरू होगा। आश्विन शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से नवरात्र का शुभारंभ होगा। पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा के साथ घरों और मंदिरों में विधि-विधान से घटस्थापना की जाएगी।
डॉ आचार्य सुशांत राज ने बताया कि 11 अक्तूबर को घटस्थापना के लिए सुबह 6:19 बजे से 10:12 बजे तक का मुहूर्त रहेगा। इसके अलावा अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:44 बजे से दोपहर 12:31 बजे तक रहेगा। घटस्थापना के दौरान कलश स्थापित कर मां दुर्गा का आह्वान किया जाता है। इसके साथ जौ बोने की भी परंपरा है। उन्होंने बताया कि नवरात्रि के आरंभ और समापन के वार के आधार पर मां दुर्गा के आगमन और प्रस्थान के वाहन निर्धारित किए जाते हैं।
इस वर्ष नवरात्रि की शुरुआत रविवार को होने की वजह से मां दुर्गा हाथी पर सवार होकर आएंगी। धार्मिक परंपरा में हाथी को सुख-समृद्धि, स्थिरता और ऐश्वर्य का प्रतीक माना जाता है। नवरात्र के दौरान श्रद्धालु मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना करेंगे। पहले दिन मां शैलपुत्री, दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी, तीसरे दिन मां चंद्रघंटा, चौथे दिन मां कूष्मांडा, पांचवें दिन मां स्कंदमाता, छठे दिन मां कात्यायनी, सातवें दिन मां कालरात्रि, आठवें दिन मां महागौरी और नौवें दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाएगी। नवरात्र के दौरान व्रत रखने के साथ दुर्गा सप्तशती का पाठ, भजन-कीर्तन और विशेष पूजा-अर्चना की जाती है।
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नवरात्र की प्रमुख तिथियां
11 अक्तूबर को घटस्थापना व मां शैलपुत्री की पूजा, 19 अक्तूबर को दुर्गा अष्टमी व महानवमी और 20 अक्तूबर को विजयादशमी मनाई जाएगी। आचार्य ने बताया कि इस बार सप्तमी दो सूर्योदयों पर पड़ रही है 17 और 18 अक्तूबर को सप्तमी ही रहेगी। क्योंकि सप्तमी तिथि सूर्योदय के समय 18 अक्तूबर को भी विद्यमान है उसके बाद अष्टमी तिथि सुबह 8:28 बजे से शुरू होकर 19 अक्तूबर को सुबह 10:52 बजे तक रहेगी। उसके बाद सुबह 10:52 मिनट से महानवमी तिथि शुरू होगी जो अगले दिन 20 अक्तूबर को दोपहर 12:50 बजे तक रहेगी। साथ ही दोपहर 12:50 बजे से दशमी तिथि शुरू होगी। इसलिए 20 अक्तूबर को विजयादशमी मनाई जायेगी।
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डॉ आचार्य सुशांत राज ने बताया कि 11 अक्तूबर को घटस्थापना के लिए सुबह 6:19 बजे से 10:12 बजे तक का मुहूर्त रहेगा। इसके अलावा अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:44 बजे से दोपहर 12:31 बजे तक रहेगा। घटस्थापना के दौरान कलश स्थापित कर मां दुर्गा का आह्वान किया जाता है। इसके साथ जौ बोने की भी परंपरा है। उन्होंने बताया कि नवरात्रि के आरंभ और समापन के वार के आधार पर मां दुर्गा के आगमन और प्रस्थान के वाहन निर्धारित किए जाते हैं।
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इस वर्ष नवरात्रि की शुरुआत रविवार को होने की वजह से मां दुर्गा हाथी पर सवार होकर आएंगी। धार्मिक परंपरा में हाथी को सुख-समृद्धि, स्थिरता और ऐश्वर्य का प्रतीक माना जाता है। नवरात्र के दौरान श्रद्धालु मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना करेंगे। पहले दिन मां शैलपुत्री, दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी, तीसरे दिन मां चंद्रघंटा, चौथे दिन मां कूष्मांडा, पांचवें दिन मां स्कंदमाता, छठे दिन मां कात्यायनी, सातवें दिन मां कालरात्रि, आठवें दिन मां महागौरी और नौवें दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाएगी। नवरात्र के दौरान व्रत रखने के साथ दुर्गा सप्तशती का पाठ, भजन-कीर्तन और विशेष पूजा-अर्चना की जाती है।
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नवरात्र की प्रमुख तिथियां
11 अक्तूबर को घटस्थापना व मां शैलपुत्री की पूजा, 19 अक्तूबर को दुर्गा अष्टमी व महानवमी और 20 अक्तूबर को विजयादशमी मनाई जाएगी। आचार्य ने बताया कि इस बार सप्तमी दो सूर्योदयों पर पड़ रही है 17 और 18 अक्तूबर को सप्तमी ही रहेगी। क्योंकि सप्तमी तिथि सूर्योदय के समय 18 अक्तूबर को भी विद्यमान है उसके बाद अष्टमी तिथि सुबह 8:28 बजे से शुरू होकर 19 अक्तूबर को सुबह 10:52 बजे तक रहेगी। उसके बाद सुबह 10:52 मिनट से महानवमी तिथि शुरू होगी जो अगले दिन 20 अक्तूबर को दोपहर 12:50 बजे तक रहेगी। साथ ही दोपहर 12:50 बजे से दशमी तिथि शुरू होगी। इसलिए 20 अक्तूबर को विजयादशमी मनाई जायेगी।