उत्तराखंड: मुख्य सचिव ने मुख्यमंत्री की घोषणाओं की प्रगति की समीक्षा, यमुनोत्री ट्रैक सुधार की बनेगी योजना
मुख्य सचिव ने मुख्यमंत्री की घोषणाओं की समीक्षा में लंबित मामलों को जल्द निपटाने और विभागों के बीच बेहतर समन्वय पर जोर दिया गया। मुख्य सचिव ने यमुनोत्री के पूरे ट्रैक रूट के सुधारीकरण की कार्ययोजना 15 दिन में तैयार कर प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।
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मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने मंगलवार को सचिवालय में मुख्यमंत्री घोषणाओं की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि घोषणाओं को प्राथमिकता के आधार पर लेते हुए तय समयसीमा में पूरा किया जाए। लंबे समय से लंबित घोषणाओं का भी जल्द निस्तारण करने को कहा गया।
बैठक में बताया गया कि प्रदेश में कुल 4611 मुख्यमंत्री घोषणाओं में से 2852 पूरी हो चुकी हैं, जबकि 1759 घोषणाएं लंबित हैं। इनमें 1397 घोषणाओं पर अलग-अलग स्तरों पर कार्रवाई चल रही है और 59 घोषणाएं आंशिक रूप से पूरी हो चुकी हैं। वहीं, 303 घोषणाएं अभी भी लंबित हैं। 447 घोषणाओं का विलोपन या मर्ज किया जा चुका है। 11 अगस्त 2026 की समीक्षा में लंबित घोषणाओं की संख्या 627 थी, जो अब घटकर 303 रह गई है।
मुख्य सचिव ने विभागवार लंबित मामलों की समीक्षा करते हुए अनावश्यक देरी रोकने और समयबद्ध कार्रवाई के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि विभागों के बीच समन्वय की कमी के कारण कोई घोषणा लंबित नहीं रहनी चाहिए। भूमि हस्तांतरण समेत अन्य प्रक्रियाओं को लेकर विभाग आपसी तालमेल बनाए रखें और जहां संभव हो, कार्यों को समानांतर रूप से शुरू किया जाए।
वैकल्पिक व्यवस्थाओं की संभावनाओं पर भी काम करने के निर्देश
मुख्य सचिव ने यमुनोत्री के पूरे ट्रैक रूट के सुधारीकरण की कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। इस संबंध में अगले 15 दिनों में विस्तृत प्रस्तुतिकरण देने को कहा गया। साथ ही ट्रैक रूट के लिए वैकल्पिक व्यवस्थाओं की संभावनाओं पर भी काम करने के निर्देश दिए।
उन्होंने पौड़ी में धारा रोड से एजेंसी चौक तक हेरिटेज स्ट्रीट के कार्य को आवास विभाग से पर्यटन विभाग को हस्तांतरित करने और मल्टीस्टोरी पार्किंग से जुड़े प्रस्ताव पर जल्द कार्रवाई के निर्देश दिए। शहरों में ओपन स्पेस, सिटी पार्क और ईको पार्क विकसित करने की संभावनाएं तलाशने को भी कहा।
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कोल्ड स्टोरेज के लिए भूमि की उपयुक्तता पर विशेष ध्यान देने के निर्देश देते हुए उन्होंने कहा कि अनुपयुक्त सरकारी भूमि के बजाय जरूरत के अनुसार उपयुक्त भूमि क्रय कर निर्माण किया जाए। अधिकारियों को मुख्यमंत्री घोषणाओं की प्रगति पोर्टल पर लगातार अपडेट करने और सचिव व अपर सचिव स्तर पर इसकी गंभीरता से निगरानी करने को कहा गया। अगली समीक्षा बैठक अक्टूबर के मध्य में होगी।