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तीर्थ पुरोहितों ने कलक्ट्रेट में किया प्रदर्शन
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गंगोत्री धाम समेत 51 मंदिरों को श्राइन बोर्ड के अधीन करने के विरोध में तीर्थ पुरोहितों का धरना प्रदर्शन मंगलवार को भी जारी रहा। कलक्ट्रेट में चल रहे क्रमिक धरने के चौथे दिन पुरोहितों ने विरोध के बावजूद श्राइन बोर्ड एक्ट को विधानसभा में पेश करने पर रोष जताया। साथ ही सरकार पर तानाशाही का आरोप लगाते हुए नारेबाजी की। इस दौरान आक्रोशित पुरोहितों ने श्राइन बोर्ड एक्ट को जल्द ही निरस्त नहीं करने पर उग्र आंदोलन करने व न्यायालय की शरण में जाने की चेतावनी दी।
पुरोहितों ने कहा कि चारों धामों में अनादि काल से चली आ रही व्यवस्था के तहत तीर्थ पुरोहितों को धामों की पूजा-अर्चना एवं व्यवस्थाओं का जन्मजात अधिकार है, लेकिन सरकार अपने निजी हित के लिए पुरोहितों के इन अधिकारों को छीनने पर तुली है। उन्होंने इस संबंध में जल्द ही कोई सकारात्मक कार्रवाई नहीं होने पर उग्र आंदोलन करने व न्यायालय में अपील करने की चेतावनी दी। इस बीच जिला पंचायत सदस्य प्रदीप भट्ट, ग्राम प्रधान रामप्यारी देवी, प्रधान बबीता जोशी आदि जनप्रतिनिधियों सहित संत समाज के पदाधिकारियों स्वामी लाखनदास महाराज व स्वामी रामेश्वरानंद ने भी धरना स्थल पहुंचकर आंदोलन का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि सरकार चाहे तो उत्तराखंड के धामों व मंदिरों में अपने स्तर से विकास कार्य करा सकती है, लेकिन श्राइन बोर्ड की आड़ में पुरोहितों के अधिकार छीनना व अनादि काल से चली आ रही परंपराओं को प्रभावित करना गलत है। प्रदर्शनकारियों में अरुण सेमवाल, राजेश सेमवाल, प्रेमकांत सेमवाल, राकेश सेमवाल, अमृत सागर सेमवाल, शंकर सेमवाल, महेश सेमवाल, हरीश सेमवाल, सुधांशु सेमवाल, पवन सेमवाल, गणेश सेमवाल आदि शामिल रहे।
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पुरोहितों ने कहा कि चारों धामों में अनादि काल से चली आ रही व्यवस्था के तहत तीर्थ पुरोहितों को धामों की पूजा-अर्चना एवं व्यवस्थाओं का जन्मजात अधिकार है, लेकिन सरकार अपने निजी हित के लिए पुरोहितों के इन अधिकारों को छीनने पर तुली है। उन्होंने इस संबंध में जल्द ही कोई सकारात्मक कार्रवाई नहीं होने पर उग्र आंदोलन करने व न्यायालय में अपील करने की चेतावनी दी। इस बीच जिला पंचायत सदस्य प्रदीप भट्ट, ग्राम प्रधान रामप्यारी देवी, प्रधान बबीता जोशी आदि जनप्रतिनिधियों सहित संत समाज के पदाधिकारियों स्वामी लाखनदास महाराज व स्वामी रामेश्वरानंद ने भी धरना स्थल पहुंचकर आंदोलन का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि सरकार चाहे तो उत्तराखंड के धामों व मंदिरों में अपने स्तर से विकास कार्य करा सकती है, लेकिन श्राइन बोर्ड की आड़ में पुरोहितों के अधिकार छीनना व अनादि काल से चली आ रही परंपराओं को प्रभावित करना गलत है। प्रदर्शनकारियों में अरुण सेमवाल, राजेश सेमवाल, प्रेमकांत सेमवाल, राकेश सेमवाल, अमृत सागर सेमवाल, शंकर सेमवाल, महेश सेमवाल, हरीश सेमवाल, सुधांशु सेमवाल, पवन सेमवाल, गणेश सेमवाल आदि शामिल रहे।
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