रवाईं घाटी के 65 गांव के आराध्य देव रुद्रेश्वर महाराज आज तीयां गांव स्थित मंदिर के गर्भ गृह में विराजमान हो गए। एक माह तक देवता की पालगी गांव-गांव के भ्रमण पर रही। बृहस्पतिवार को भंडारे का आयोजन कर देवता को मंदिर के गर्भगृह में स्थापित किया गया। अब श्रद्धालुओं को मंदिर के गर्भ गृह में ही अपने आराध्य के दर्शन होंगे।
रुद्रेश्वर महाराज के नाम से तीयां गांव में आयोजित सामूहिक भंडारे में मुंगरसंती, खाटल और गोडर पट्टी के सैकड़ों श्रद्धालुओं ने प्रतिभाग कर अपने आराध्य को भोग चढ़ाकर सुख-समृद्धि के लिए मन्नतें मांगी। देवता के माली संकित थपलियाल पर अवतरित रुद्रेश्वर महाराज ने भक्तों के कष्ट हरण करने का बचन दिया। इस अवसर पर मंदिर प्रांगण में रवाईं की समृद्ध संस्कृति की झलक देखने को मिली। पारंपरिक पहनावे के साथ तीयां गांव पहुंचे क्षेत्र के श्रद्धालुओं ने तांदी नृत्य किया। परंपरानुसार रुद्रेश्वर देवता की मूर्ति अषाढ़ माह में मंदिर के गर्भ गृह से बाहर निकलती है, जिसे पालगी में सजा कर गांव-गांव दर्शनार्थ घुमाया जाता है। पालगी एक माह तक भ्रमण कर रात्रि विश्राम करती है और प्रत्येक गांव में मेले का आयोजन किया जाता है। मेलों की शृंखला समाप्त होने के बाद शुभ लग्नानुसार सावन माह में भंडारे का आयोजन कर मूर्ति को एक वर्ष के लिए मंदिर के गर्भ गृह में स्थापित किया जाता है। कार्यक्रम में तीयां मंदिर समिति के अध्यक्ष दीवान सिंह, जयेंद्र राणा, जिला पंचायत सदस्य पूनम थपलियाल, प्रधान मुकेश थपलियाल, क्षेत्र पंचायत सदस्य स्वाती देवी, संजय थपलियाल, धर्म सिंह राणा, जगमोहन परमार, विपिन थपलियाल आदि मौजूद रहे।