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Uttarkashi News: बाली निकलते ही पीला पड़ने लगा लाल धान
Mon, 24 Aug 2026 05:19 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, उत्तर काशी
संवाद न्यूज एजेंसी, उत्तर काशी
Updated Mon, 24 Aug 2026 05:19 PM IST
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पौधे सूखने से काश्तकार चिंतित, उत्पादन में भारी गिरावट का खतरा
पुरोला। रामा एवं कमल सिरांई घाटी में इस वर्ष पारंपरिक लाल धान की फसल पर बीमारी का संकट गहरा गया है। धान में बाली निकलते ही पौधों के पीले पड़ने और सूखने की समस्या सामने आने से काश्तकारों को उत्पादन में भारी गिरावट और आर्थिक नुकसान की चिंता सताने लगी है।
स्थानीय स्तर पर इस बीमारी को तित्रा कहा जा रहा है। किसानों का कहना है कि उन्होंने पहले इस तरह की समस्या नहीं देखी और समय रहते नियंत्रण नहीं किया गया तो फसल को बड़ा नुकसान हो सकता है। रवांई घाटी में अगस्त के चौथे सप्ताह तक लाल धान में बालियां निकलना सामान्यतः अच्छी फसल का संकेत माना जाता है।
इस बार बाली निकलने के साथ ही कई खेतों में पौधे पीले पड़ने और समय से पहले सूख रहे हैं। काश्तकारों श्यालिक राम नौटियाल, हकूमत सिंह, नवीन गैरोला, उपेन्द्र रावत और ओमप्रकाश गैरोला ने कृषि विभाग से तत्काल मदद और बीमारी के प्रभावी उपचार की मांग की है। वहीं, कृषि विभाग के तकनीकी विशेषज्ञ विकेश तोमर ने क्षेत्र का भ्रमण कर फसल का निरीक्षण किया। उन्होंने बीमारी को फफूंदजनित बताते हुए किसानों को अनुशंसित फफूंदनाशकों का निर्धारित मात्रा में छिड़काव करने की सलाह दी है। इनमें टाइबुकोनाजोल, हेक्साकोनाजोल और कार्बेन्डाजिम समूह की दवाएं शामिल हैं। उन्होंने किसानों से खेतों की नियमित निगरानी करने और आवश्यकता पड़ने पर कृषि विभाग से तकनीकी परामर्श लेने को कहा है। रचनात्मक हेडिंग
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पुरोला। रामा एवं कमल सिरांई घाटी में इस वर्ष पारंपरिक लाल धान की फसल पर बीमारी का संकट गहरा गया है। धान में बाली निकलते ही पौधों के पीले पड़ने और सूखने की समस्या सामने आने से काश्तकारों को उत्पादन में भारी गिरावट और आर्थिक नुकसान की चिंता सताने लगी है।
स्थानीय स्तर पर इस बीमारी को तित्रा कहा जा रहा है। किसानों का कहना है कि उन्होंने पहले इस तरह की समस्या नहीं देखी और समय रहते नियंत्रण नहीं किया गया तो फसल को बड़ा नुकसान हो सकता है। रवांई घाटी में अगस्त के चौथे सप्ताह तक लाल धान में बालियां निकलना सामान्यतः अच्छी फसल का संकेत माना जाता है।
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इस बार बाली निकलने के साथ ही कई खेतों में पौधे पीले पड़ने और समय से पहले सूख रहे हैं। काश्तकारों श्यालिक राम नौटियाल, हकूमत सिंह, नवीन गैरोला, उपेन्द्र रावत और ओमप्रकाश गैरोला ने कृषि विभाग से तत्काल मदद और बीमारी के प्रभावी उपचार की मांग की है। वहीं, कृषि विभाग के तकनीकी विशेषज्ञ विकेश तोमर ने क्षेत्र का भ्रमण कर फसल का निरीक्षण किया। उन्होंने बीमारी को फफूंदजनित बताते हुए किसानों को अनुशंसित फफूंदनाशकों का निर्धारित मात्रा में छिड़काव करने की सलाह दी है। इनमें टाइबुकोनाजोल, हेक्साकोनाजोल और कार्बेन्डाजिम समूह की दवाएं शामिल हैं। उन्होंने किसानों से खेतों की नियमित निगरानी करने और आवश्यकता पड़ने पर कृषि विभाग से तकनीकी परामर्श लेने को कहा है। रचनात्मक हेडिंग
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