{"_id":"613e1c218ebc3e7fb70cb638","slug":"the-glory-of-the-jagra-of-sidkudiya-maharaj-utter-kashi-news-drn390183315","type":"story","status":"publish","title_hn":"मोरी के भीतरी गांव में सिड़कुडिया महाराज के जागरा की धूम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मोरी के भीतरी गांव में सिड़कुडिया महाराज के जागरा की धूम
विज्ञापन
उत्तरकाशी के भीतरी गांव में आयोजित सिड़कुड़िया महाराज के जागरा में पहुंची श्रद्धालुओं की भीड़।
- फोटो : UTTER KASHI
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मोरी ब्लाक की फतेपर्वत पट्टी के इष्टदेव सिड़कुड़िया महाराज का प्रत्येक पांच वर्ष में होने वाला रात्रि जागरा उत्सव मेला भीतरी गांव में धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर क्षेत्र के लोगों ने इष्टदेव के दर्शन व पूजन कर आशीर्वाद लिया।
गोविंद वन्य जीव विहार के फतेपर्वत पट्टी के प्रत्येक गांव में सिड़कुड़िया महाराज के पौराणिक मंदिर हैं। यहां प्रत्येक पांच वर्ष में ग्रामीण अपने इष्टदेव सिड़कुड़िया महाराज का रात्रि जागरा उत्सव मेले का आयोजन करते है। जिस गांव में जागरा होता है। महाराज एक वर्ष पहले वहां पहुंच जाते हैं। इस वर्ष भीतरी गांव में मेला मनाया गया। यह रात्रि मेला बहुत ही अनूठा होता है। यहां एक बहु लंबी रोपवे रस्सा बांध दिया जाता है, जिसके ऊपर सिड़कुड़िया महाराज के पश्वा अपने अस्त्र लेकर चलते हैं और कई साहसिक करतब दिखाते हैं। मेले में घी एकत्रित कर सिड़कुड़िया महाराज के लिए पूरी रात दीपक जलाते हैं।
मेले में पारंपरिक बाजगी महिला नृत्य भी होता है। बाजगी ढोल पर गाते हैं, जिस पर महिलाएं नृत्य करतीं हैं। इसके बाद महाराज का पश्वा मंदिर प्रांगण में नृत्य कर उपस्थित लोगों को हरियाली देकर आशीर्वाद देते हैं। यह प्रक्रिया यहां चार बार की जाती है। गांव के रणदेव सिंह कुंवर बताते हैं कि गांव के लोग अपने घरों में हरियाली उगा कर महाराज को चढ़ाते हैं। इसी हरियाली को महाराज प्रसाद के रूप में श्रद्धालुओं में बांटते हैं। मेले में अडोर, बड़ासू, पंचगाई, सिंगतूर आदि पट्टी के लोग भारी संख्या में भाग लेते हैं। मेले में जिला पंचायत सदस्य मीना कुंवर, रोजी सिंह सौंदाण, चैन सिंह रावत, जगदीश कुंवर, राजकिरन, मधु आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन
गोविंद वन्य जीव विहार के फतेपर्वत पट्टी के प्रत्येक गांव में सिड़कुड़िया महाराज के पौराणिक मंदिर हैं। यहां प्रत्येक पांच वर्ष में ग्रामीण अपने इष्टदेव सिड़कुड़िया महाराज का रात्रि जागरा उत्सव मेले का आयोजन करते है। जिस गांव में जागरा होता है। महाराज एक वर्ष पहले वहां पहुंच जाते हैं। इस वर्ष भीतरी गांव में मेला मनाया गया। यह रात्रि मेला बहुत ही अनूठा होता है। यहां एक बहु लंबी रोपवे रस्सा बांध दिया जाता है, जिसके ऊपर सिड़कुड़िया महाराज के पश्वा अपने अस्त्र लेकर चलते हैं और कई साहसिक करतब दिखाते हैं। मेले में घी एकत्रित कर सिड़कुड़िया महाराज के लिए पूरी रात दीपक जलाते हैं।
विज्ञापन
मेले में पारंपरिक बाजगी महिला नृत्य भी होता है। बाजगी ढोल पर गाते हैं, जिस पर महिलाएं नृत्य करतीं हैं। इसके बाद महाराज का पश्वा मंदिर प्रांगण में नृत्य कर उपस्थित लोगों को हरियाली देकर आशीर्वाद देते हैं। यह प्रक्रिया यहां चार बार की जाती है। गांव के रणदेव सिंह कुंवर बताते हैं कि गांव के लोग अपने घरों में हरियाली उगा कर महाराज को चढ़ाते हैं। इसी हरियाली को महाराज प्रसाद के रूप में श्रद्धालुओं में बांटते हैं। मेले में अडोर, बड़ासू, पंचगाई, सिंगतूर आदि पट्टी के लोग भारी संख्या में भाग लेते हैं। मेले में जिला पंचायत सदस्य मीना कुंवर, रोजी सिंह सौंदाण, चैन सिंह रावत, जगदीश कुंवर, राजकिरन, मधु आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन