{"_id":"584841944f1c1be059449545","slug":"the-doctors-advise-patients-to-hospital","type":"story","status":"publish","title_hn":"डाक्टरों ने दी मरीजों को अस्पताल आने की सलाह","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
डाक्टरों ने दी मरीजों को अस्पताल आने की सलाह
ब्यूरो/अमर उजाला, उत्तरकाशी
Updated Wed, 07 Dec 2016 10:36 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ओसला गांव गई चिकित्सकों की टीम बुधवार शाम मोरी लौट आई है। चार सदस्यीय टीम ने गांव में नाइट ब्लाइंडनेस की समस्या से गुजर रहे लोगों का निरीक्षण किया। इनमें एक बालिका व एक महिला में रेटिनाइटिस पिगमेंट टोसा की समस्या देखने को मिली। इस दौरान टीम ने सभी मरीजों को जिला अस्पताल आने की सलाह दी है।
विज्ञापन
दरअसल ओसला गांव के ग्रामीणों में नाइट ब्लाइंडनेस संबंधी समस्या की खबर अमर उजाला में 4 दिसंबर को प्रकाशित होने के बाद सीएमओ मेजर डा. बीएस रावत न सोमवार को मोरी पीएचसी से डा. सुरेंद्र सिंह राणा के नेतृत्व में चार सदस्यीय टीम ओसला गांव भेजी। मंगलवार को टीम ने नाइट ब्लाइंडनेस के मरीजों का निरीक्षण किया।
विज्ञापन
सीएमओ रावत ने बताया कि टीम ने 13 वर्षीय मनीषा को विटामिन ए पिलाया है। इसके अलावा दोनों आंखों से नहीं देखने वाली 32 वर्षीय बिंद्रा देवी का चेकअप किया। चेकअप में पाया कि दोनों में रेटिनाइटिस पिगमेंट टोसा की समस्या है। हालांकि इसकी पुष्टि जांच के बाद ही होगी।
विज्ञापन
मनीषा को रात होते ही दिखना बंद हो जाता है, जबकि बिंद्रा देवी पहले देखती थी, लेकिन अब वह नहीं देख पा रही है। दोनों को जांच के लिए जिला अस्पताल आने की सलाह दी गई है। सीएमओ डा. रावत ने बताया कि रेटिनाइटिस पिगमेंट टोसा की समस्या में इंसान की आंखें अचानक देखना बंद कर देती है। इसका कोई इलाज भी नहीं है।
हालांकि कई बार इस प्रकार के मरीजों की आंखों की रोशनी स्वयं लौट आती है। सीएमओ ने बताया कि इसके अलावा सात वर्षीय राजमणि और 11 वर्षीय शीशमा की आंखों में भेंगापन की समस्या है, जिनका इलाज वर्तमान में दिल्ली से चल रहा है।
वहां बुजुर्गों में मोतीयाबिंद की समस्या है, जिन्हें प्रारंभिक चेकअप के बाद चिकित्सकों ने जिला अस्पताल या मोरी पीएचसी आने की सलाह दी है। कई अन्य बुजुर्गों को चश्में की जरूरत है। कोशिश की जा रही है कि आने वाले समय में सांकरी क्षेत्र में स्वास्थ्य शिविर लगाकर इस प्रकार की समस्या को दूर किया जाएगा।