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बर्बाद होने के कगार पर लाल चावल की फसल

Mon, 18 Oct 2021 07:27 PM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Mon, 18 Oct 2021 07:27 PM IST
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Red rice crop on the verge of ruin
दो दिन से हो रही लगातार बारिश के चलते रंवाई घाटी में सड़ने के कगार पर पहुंची लाल चावल की फसल। - फोटो : UTTER KASHI
भारी बारिश के कारण रर्वाइं घाटी में लाल चावल की फसल बर्बाद होने के कगार पर पहुंच गई है। बारिश एक दो दिन और रही तो खेतों में कटी लाल चावल की फसल में अंकुर निकल फूट सकते हैं। कमल घाटी ग्राम स्वायत्त सहकारिता संगठन के अध्यक्ष विजेंद्र सिंह राणा का कहना है कि अकेले पुरोला क्षेत्र में प्रति वर्ष करीब 4880 टन लाल चावल का उत्पादन किया जाता है। लगातार बारिश के कारण धान खेतों में सड़ सकता है। उन्होंने प्रदेश सरकार से किसानों को मुआवजा देने की मांग की है। उन्होंने बताया कि क्षेत्र के गुंदियाट गांव, कंडियाल गांव, मोल्टाड़ी, कुमारकोट, श्रीकोट, खलाड़ी, नेत्री, स्वील, चंदेली, डैरिका, कुरड़ा, देवढुंग, कुमोला, कोटी एवं मोरी ब्लॉक की गड़ूगाड पट्टी समेत क्षेत्र के करीब 6 दर्जन गांवों में लाल चावल की खेती की जाती है। संवाद
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