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बारिश का कहर, पिलंग और जौड़ाव गांव का संपर्क कटा
ब्यूरो/अमर उजाला, उत्तरकाशी
Updated Sat, 16 Jul 2016 07:14 PM IST
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भारी बारिश और भूस्खलन से पिलंग और जौडाव गांव अलग-थलग पड़ गए हैं। यहां न पानी आ रहा है और न बिजली। सड़क सुविधा से वंचित भटवाड़ी के दूरस्थ गांव की शासन प्रशासन सुध नहीं लेता।
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पिलंग गाड पर बनी गांव की अस्थाई लकड़ी की पुलिया भी बह गई तो गांव का खेत और जंगल से भी रास्ता कट जाएगा। अभी तक सड़क सुविधा से वंचित भटवाड़ी के दूरस्थ गांव पिलंग व जौडाव गांव की कभी शासन प्रशासन ने सुध नहीं ली। 2013 की आपदा में पिलंग गाड का पुल बहने पर वहां ट्रॉली लगी, लेकिन वह भी बह गई। किसी तरह बॉर्डर एरिया डेवलपमेंट प्लान से वहां लकड़ी की अस्थाई पुलिया बनी, लेकिन यह कभी भी बह सकती है।
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पिलंग गांव के लिए मल्ला से 18 किमी जिला पंचायत का पैदल रास्ता व जौडाव गांव के लिए पिलंग के अलावा सिल्ला गांव से रास्ता है। इन दोनों रास्तों पर भारी भूस्खलन के चलते आवाजाही नहीं हो सकती है। जौड़ाव के बीस से ज्यादा बच्चों को 18 किमी दूर मल्ला गांव में ही कमरा लेकर पढ़ना पड़ रहा है। लोगों को खाद्यान्न व जरूरी सामान गांव तक पहुंचाना मुश्किल हो रहा है।
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ऊर्जा निगम के अधिकारी कहते हैं कि उन्हें देरी से इन गांवों में बिजली की लाइन क्षतिग्रस्त होने की सूचना मिली। रास्ता ठीक होने पर विद्युत आपूर्ति बहाल की जाएगी।
सड़क की उम्मीद नहीं, पैदल रास्ता ठीक कराये सरकार
उत्तरकाशी। पिलंग गांव की प्रधान जमुआ देवी, जौडाव के विक्रम सिंह और पूर्व प्रधान चंद्र सिंह कहते हैं कि उन्हें गांव तक सड़क की सरकार से उम्मीद नहीं है। सरकार उनके पैदल रास्ते व पिलंग गाड पर स्थाई पुल बना दे तो वे कम से कम भुखमरी की स्थिति में नहीं पहुंचेंगे।
स्वयं अपनी पीठ पर राशन लाद कर गांव आ सकते हैं। यदि पिलंग गाड की लकड़ी की पुलिया बही तो उन्हें राशन लेने के लिए सालंग होते हुए भटवाड़ी तक करीब साठ किमी की दुर्गम पैदल दूरी तय करनी पड़ेगी।