{"_id":"ffd32a98667cff0daa89d67cc2695bba","slug":"promising-miss-project-officer-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"वादा कर भूले परियोजना अफसर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
वादा कर भूले परियोजना अफसर
ब्यूरो/अमर उजाला, उत्तरकाशी
Updated Tue, 15 Dec 2015 09:01 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मनेरी भाली जल विद्युत परियोजना के अधिकारियों ने ग्रामीणों की भूमि कोड़ियों के भाव खरीदते समय उन्हें परियोजना में नौकरी देने के आश्वासन दिया था, लेकिन आजतक ग्रामीणों की समस्या का समाधान नहीं किया गया है।
विज्ञापन
मनेरी भाली परियोजना के लिए जमीन खरीदने का सिलसिला वर्ष 1960 के बाद शुरू हो गया था। भूमि अध्याप्ति परिवारों को उस वक्त परियोजना में नौकरी देने तथा क्षेत्र के विकास करने का आश्वासन दिया गया।
विज्ञापन
19 सितंबर 1973 को अधिशासी अभियंता मनेरी भाली परियोजना व परगना मजिस्ट्रेट भटवाड़ी, प्रधान मनेरी और ग्रामीणों के बीच लिखित समझौता हुआ कि मनेरी गांव के प्रत्येक भूमि अध्याप्ति परिवार केे सदस्य को योग्यतानुसार मनेरी परियोजना में नौकरी दी जाएगी।
विज्ञापन
परियोजना में तृतीय व चतुर्थ श्रेणी के रिक्त पदों पर ग्रामीणों को लगाया जाएगा, जिसकी सूचना प्रधान को समय-समय पर दी जाएगी। लेकिन बांध का कार्य पूरा होते ही अधिकारियों ने समझौते को नजरअंदाज करना शुरू कर दिया।
चतुर्थ श्रेणी के पदों तक ग्रामीणों को नियुक्ति नही दी, जिससे बेघर हुए परिवारों को नौकरी नहीं मिलने पर लोग आज अपने को ठगा महसूस कर रहे हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि परियोजना अधिकारी उस वक्त हुए लिखित समझौते को मानने को तैयार नही, बल्कि परियोजना में लगे लोगों के 240 दिन होने के बाद भी उन्हें हटा दिया और उनके स्थान पर अधिकारियों ने अपने किचन कूक और चहेतों के मस्ट्रोल गुपचुप बनाकर उन्हें नौकरी पर लगा दिया।
ग्रामीण नंदलाल, प्रीतम सिंह, रामभरोसा, किशन सिंह, विजय सिंह, ऐतवारी लाल, नरेंद्र सिंह, मनोज लाल का कहना है कि आज अधिकारी अन्य जगह से अपने चहेतों को पहले अपने किचन और फिर परियोजना में घुसा रहे हैं।
कोट...
लिखित समझौता 1973 का है। निर्माण के समय सिंचाई विभाग ने अधिकांश ग्रामीणों को योग्यतानुसार नौकरी दे चुके हैं। आज भी हमारा प्रयास है कि स्थानीय लोगों को पहले प्राथमिकता देकर ठेकेदारों के माध्यम से नौकरी पर लगाया जा रहा है।
इंद्र मोहन करासी, डीजीएम जल विद्युत निगम मनेरी।
कोट...
परियोजना प्रशासन ग्रामीणों के योगदान व लिखित समझौते की अनदेखी कर रहे हैं और ठेकेदारों के माध्यम से अपने चहेतों को लाभ दे रहे हैं। यदि ग्रामीणों को रोजगार नहीं दिया गया, तो शीघ्र ही आंदोलन किया जाएगा।
संजीता रावत, ग्राम प्रधान मनेरी