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जिले की बांट पर पुरोहितों में फिर गहराया विवाद
अमर उजाला ब्यूरो/ उत्तरकाशी।
Updated Sun, 06 Nov 2016 09:54 PM IST
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गंगोत्री धाम में तीर्थ पुरोहितों के बीच वर्षों से चले आ रहे विवाद ने एक बार फिर आग पकड़ ली है। गंगोत्री मंदिर समिति और गंगा सभा की अध्यक्षता में आयोजित बैठक के दौरान पुरोहितों को जिला वितरण के संबंध में प्रमाण पत्र भी जारी किए गए, लेकिन अब दर्जनों पुरोहित इसके खिलाफ हो गए हैं। आरोप है कि जिला वितरण में पारदर्शिता नहीं रखी गई है। चहेतों को मलाईदार जिले बांटे गए हैं, तो कई पुरोहितों को छोटे जिले देकर नजर अंदाज किया गया है।
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गंगोत्री के तीर्थ पुरोहित पंडित मानेंद्र प्रसाद और पंडित सत्येंद्र सेमवाल ने आरोप लगाया कि जिलों की बांट में पारदर्शिता नहीं बरती गई है। आरोप लगाया कि कई पुरोहितों को ऐसे जिले बांटे गए हैं, जहां से बहुत कम श्रद्धालु धाम आते हैं। पुरोहितों ने 13 नवंबर को फिर से गंगोत्री मंदिर धर्मशाला में एकत्रित होकर बैठक आयोजित करने का निर्णय लिया है, जिसमें अन्य पुरोहितों को भी बुलाया गया है।
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दरअसल, गंगोत्री मंदिर समिति व गंगा सभा की अध्यक्षता में दीपावली के दिन जिला वितरण समिति की बैठक हुई थी, जिसमें समिति की ओर से पेश किया गया जिला आवंटन संबंधित प्रस्ताव सर्वसम्मति से पास किया गया है। इसके तहत 663 जिलों को तीर्थ पुरोहितों को 100 परिवारों के बीच बांटा गया। हालांकि वर्तमान में गंगोत्री धाम में तीर्थ पुरोहितों की संख्या ज्यादा है, लेकिन 1975 के हकदारों यानि कि तीर्थ पुरोहितों को ही इसमें शामिल किया गया।
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जिला आवंटन की पहली बैठक 1951 में हुई थी। इसके बाद 2016 में आकर 41वीं बैठक में यह काम हो पाया था। कई लोगों को लगा कि 65 साल पुराना विवाद खत्म हो गया है, लेकिन जिला बंटने के बाद दर्जनों पुरोहित इसके खिलाफ खड़े हो गए हैं।
बैठक गंगोत्री मंदिर समिति और गंगा सभा के नेतृत्व में हुई थी, जिसमें जिलों की बांट को सर्वसम्मति से पास किया गया है। सभी पुरोहितों से जिलों की बांट में आवेदन मांगे गए थे, उसके अनुसार ही जिले वितरित किए गए हैं। इस काम में पूरी तरह से पारदर्शिता और संतुलन रखा गया है। सभी पुरोहितों को एक साथ संतुष्ट कर पाना मुश्किल है।
-संजीव सेमवाल, अध्यक्ष, जिला वितरण समित गंगोत्री