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विशेष प्रजाति की जड़ें और घास से रोकेंगे भूस्खलन
अमर उजाला ब्यूरो/ उत्तरकाशी।
Updated Fri, 11 Nov 2016 08:47 PM IST
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भूस्खलन
- फोटो : file photo
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बीआरओ गंगोत्री हाईवे पर स्थित डीएम स्लाइड में भूस्खलन को रोकने की कवायद में जुट गया है। राष्ट्रीय पर्यावरणीय अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान (निरी) के इंजीनियर बीआरओ की मदद के लिए आए हैं। बीआरओ और निरी का यह प्रयोग सफल रहा तो आने वाले समय में भूस्खलन से सड़क बंद होने की समस्या से छुटकारा मिल सकता है।
गंगोत्री हाईवे पर नालूपानी, रतूड़ीसेरा, नाकुरी, नेताला, लाटा, मल्ला, गंगनानी सहित विभिन्न जगहों पर वर्षों से भूस्खलन की समस्या बनी है। इसके चलते बरसात में हाईवे अक्सर बाधित रहता है जिससे चारधाम यात्रा प्रभावित होने के साथ ही ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
हाईवे पर नासूर बन चुके भूस्खलन जोन के प्रभावी ट्रीटमेंट की कोशिश की जा रही है। बीआरओ ने निरी की मदद से ऋषिकेश-गंगोत्री राजमार्ग पर किमी 70 पर 144 मीटर लंबे और 186 मी. चौड़े सक्रिय भूस्खलन जोन डीएम स्लाइड पर ईबीई, इकोलाजिकल बायोइंजीनियरिंग तकनीकी को अपनाया है।
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इसके अंतर्गत पहाड़ी ढाल पर उगे पेड़ पौधों की जड़ों में जीवाणु मिलाकर इनकी जड़ों को बहुत कम समय में पांच से छह गुना बढ़ाया जाता है। इससे जड़ों की मिट्टी पर पकड़ मजबूत होती है और भूस्खलन का खतरा कम होता है। बीआरओ कमांडर सुभाष लूनिया कहते हैं कि इस विधि में विशेष प्रजाति की घास और पौधे सड़क के आसपास वाली सतहों और पहाड़ी पर उगाए जाते हैं। इन पौधों की जड़ें काफी घनी और फैली हुई होती है और मिट्टी को मजबूती से बांधे रखती है। साथ ही पानी से होने वाले कटान को रोकती है।
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गंगोत्री हाईवे पर नालूपानी, रतूड़ीसेरा, नाकुरी, नेताला, लाटा, मल्ला, गंगनानी सहित विभिन्न जगहों पर वर्षों से भूस्खलन की समस्या बनी है। इसके चलते बरसात में हाईवे अक्सर बाधित रहता है जिससे चारधाम यात्रा प्रभावित होने के साथ ही ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
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हाईवे पर नासूर बन चुके भूस्खलन जोन के प्रभावी ट्रीटमेंट की कोशिश की जा रही है। बीआरओ ने निरी की मदद से ऋषिकेश-गंगोत्री राजमार्ग पर किमी 70 पर 144 मीटर लंबे और 186 मी. चौड़े सक्रिय भूस्खलन जोन डीएम स्लाइड पर ईबीई, इकोलाजिकल बायोइंजीनियरिंग तकनीकी को अपनाया है।
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इसके अंतर्गत पहाड़ी ढाल पर उगे पेड़ पौधों की जड़ों में जीवाणु मिलाकर इनकी जड़ों को बहुत कम समय में पांच से छह गुना बढ़ाया जाता है। इससे जड़ों की मिट्टी पर पकड़ मजबूत होती है और भूस्खलन का खतरा कम होता है। बीआरओ कमांडर सुभाष लूनिया कहते हैं कि इस विधि में विशेष प्रजाति की घास और पौधे सड़क के आसपास वाली सतहों और पहाड़ी पर उगाए जाते हैं। इन पौधों की जड़ें काफी घनी और फैली हुई होती है और मिट्टी को मजबूती से बांधे रखती है। साथ ही पानी से होने वाले कटान को रोकती है।