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नेलांग व जाढूंग गांव के फिर आबाद होने की जगी उम्मीद

Sat, 06 Mar 2021 10:34 PM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Sat, 06 Mar 2021 10:34 PM IST
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Nelang and Jadhung villages hope to be rehabilitated
भारत-चीन युद्ध के दौरान वर्ष 1962 में खाली कराए गए सीमावर्ती नेलांग और जाढ़ूंग गांव के पुन: आबाद होने की उम्मीद जगी है। मुख्यमंत्री की घोषणा पर जाढ़ूंग गांव में खंडहर हुए भवनों को होम स्टे के तौर पर विकसित करने की कवायद तेज हो गई है। सरकार की यह कोशिश परवान चढ़ी तो जल्द ही इन गांवों के आबाद होने से सीमाओं पर तैनात आईटीबीपी एवं सेना के जवानों को मदद मिलने के साथ ही क्षेत्र में पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।
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वर्ष 1962 से पहले भारत चीन सीमा पर स्थित नेलांग और जाढ़ूंग गांव आबाद थे। इन गांवों में रहने वाले ग्रामीणों की आजीविका कृषि और भेड़ बकरी पालन पर टिकी थी। भारत-चीन युद्ध के चलते वर्ष 1962 में इन गांवों को खाली करा दिया गया था। तब से यह ग्रामीण हर्षिल के निकट बगोरी और डुंडा के अपने शीतकालीन प्रवास स्थलों पर ही गुजर बसर कर रहे हैं। आधा अधूरा मुआवजा देकर गांव से बेदखल किए ग्रामीण वर्षों से अपने गांव लौटने की मांग कर रहे थे। वर्ष 2018 में हर्षिल के दौरे पर पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समक्ष भी ग्रामीणों ने अपनी मांग रखी थी। वर्ष 2015 में सरकार ने इस घाटी को पर्यटकों के लिए खोल था, लेकिन यहां कहीं भी पर्यटकों के ठहरने की व्यवस्था नहीं होने के कारण आवाजाही ज्यादा नहीं बढ़ पाई है। क्षेत्र में सिक्योर हिमालय परियोजना के तहत स्नो लैपर्ड ट्रेल शुरू करने की भी तैयारी है। इसके लिए यहां पर्यटकों के ठहराव की व्यवस्था जरूरी है। डीएम मयूर दीक्षित ने बताया कि सरकार ने इन गांवों को पुन: आबाद करने की कवायद तेज की है। इसके तहत जाढ़ूंग गांव में खंडहर पड़े भवनों को होम स्टे के रूप में विकसित किया जाएगा। इसमें जाढ़ूंग गांव के ध्यान सिंह राणा समेत दो लोगों ने अपने घरों को होम स्टे बनाने की इच्छा जताई है। जल्द ही इन्हें योजना से लाभान्वित किया जाएगा।
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डीएम ने जाढ़ूंग का दौरा कर लिया व्यवस्थाओं का जायजा
उत्तरकाशी। बीते बृहस्पतिवार को डीएम मयूर दीक्षित ने अधिकारियों को साथ लेकर जाढ़ूंग गांव का दौरा किया। यहां उन्होंने आईटीबीपी के डिप्टी कमांडेंट सहित अन्य अधिकारियों के साथ इन गांवों को पुन: आबाद करने पर चर्चा की। डीएम ने कहा कि जाढ़ूंग गांव में समेकित विकास के व्यापक कार्य कराए जाएंगे। होम स्टे योजना से ग्रामीणों को जोड़ा जाएगा। ताकि वे रिवर्स पलायन कर अपने पैतृक गांव में रह सकें। इस मौके पर एसडीएम देवेंद्र नेगी, जिला पर्यटन अधिकारी प्रकाश खत्री, आपदा प्रबंधन अधिकारी देवेंद्र पटवाल आदि अधिकारी एवं कई ग्रामीण मौजूद रहे।
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