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पुरोला सीट पर टूटा विपक्ष में रहने का मिथक

Thu, 10 Mar 2022 10:11 PM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Thu, 10 Mar 2022 10:11 PM IST
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Myth of living in broken opposition on Purola seat
गंगोत्री सीट का मिथक तो कायम रहा है, लेकिन राज्य गठन के बाद से पुरोला सीट के हमेशा विपक्ष में रहने का मिथक टूट गया है। इस सीट पर कांग्रेस से मालचंद और भाजपा से दुर्गेश्वर लाल के बीच रोचक मुकाबला देखने को मिला, लेकिन बाद में भाजपा के दुर्गेश्वर लाल ने मतगणना में ऐसी बढ़त बनाई कि उन्हें विजयश्री मिली। इसी के साथ यह सीट पहली बार सत्ता में रहेगी।
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पुरोला सीट पर वर्ष 2002 के पहले चुनाव में भाजपा के मालचंद ने जीत दर्ज की। तब कांग्रेस सत्ता में रही और मालचंद को विपक्ष में बैठना पड़ा। वर्ष 2007 के चुनाव में कांग्रेस के राजेश जुवांठा ने जीत दर्ज की, लेकिन प्रदेश में भाजपा सत्ता पर काबिज हुई और जुवांठा को विपक्ष में रहना पड़ा। वर्ष 2012 के चुनाव में भाजपा के मालचंद चुनाव जीते। मगर सत्ता में कांग्रेस पार्टी के आने से उन्हें भी विपक्ष में बैठना पड़ा। वर्ष 2017 के चुनाव में कांग्रेस के राजकुमार चुनाव जीते, लेकिन उन्हें भाजपा के सत्ता पर काबिज होने से सत्ता का सुख नहीं मिल पाया था।
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