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सिक्योर हिमालय फैलोशिप कार्यक्रम में स्थानीय युवाओं ने तैयार की फिल्में
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क्यिर हिमालय प्रोजेक्ट के तहत पार्क क्षेत्र में फिल्मांकन करते स्थानीय युवा।
- फोटो : UTTER KASHI
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हिम तेंदुओं और उनके प्रवास स्थल के संरक्षण के लिए चलाए जा रहे सिक्योर हिमालय प्रोजेक्ट ने पार्क क्षेत्र के युवाओं के लिए फिल्म एवं रेडियो कार्यक्रम के क्षेत्र में रोजगार के रास्ते खोले हैं। स्थानीय युवाओं की ओर से तैयार फिल्मों को वर्ल्ड माउंटेन डे पर डस्टी फूट प्रोडक्शन के माध्यम से यू-ट्यूब पर लांच किया गया। इससे स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलने के साथ ही क्षेत्र में पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।
उत्तराखंड में उत्तरकाशी के गोविंद वन्य जीव विहार एवं गंगोत्री नेशनल पार्क तथा पिथौरागढ़ की दारमा ब्यास घाटी में यह प्रोजेक्ट चलाए जा रहे हैं। इसमें सिक्योर हिमालय फैलोशिप कार्यक्रम के तहत क्षेत्र के युवाओं को वीडियो और रेडियो कार्यक्रम तैयार करने का प्रशिक्षण दिया गया। उत्तरकाशी के पुजेली मोरी निवासी मनवीर सिंह, गंगाड़ गांव के रणदेव चौहान एवं दोणी निवासी देवराज तथा दारमा घाटी पिथौरागढ़ के जयेंद्र सिंह एवं कविंद्र सिंह कुटियाल ने क्षेत्र की जैव विविधता, संस्कृति, वास्तुकला, ऊनी वस्त्र उद्योग, जीवन शैली एवं प्राकृतिक सौंदर्य को समेटते हुए फिल्म तैयार की है।
सिक्योर हिमालय प्रोजेक्ट से जुड़ी रेशमा मनराल ने बताया कि चयनित युवाओं को एक माह तक फोटो एवं वीडियोग्राफी का प्रशिक्षण दिया। इसके बाद इन युवाओं ने सिक्योर हिमालय के रोहित गुसाईं, गौरव तालुकदार एवं शैराप पार्डेन शेरपा की देखरेख में अपने क्षेत्रों में फिल्मों की शूटिंग की। शुक्रवार को वर्ल्ड माउंटेन डे पर इन युवाओं की ओर से तैयार की गई आठ संक्षिप्त फिल्मों को यूट्यूब पर लांच किया गया। जल्द ही क्षेत्र में सामुदायिक फेस्टिवल आयोजित कर स्थानीय लोगों को भी यह फिल्में दिखाई जाएंगी। क्षेत्र के युवाओं से फैलोशिप के तहत रेडियो कार्यक्रम भी तैयार कराए गए हैं, जिनकी लाॅंचिंग 21 दिसंबर को होगी।
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पर्यटन के लिहाज से भी महत्वपूर्ण होगा यह कार्यक्रम
उत्तरकाशी। सिक्योर हिमालय प्रोजेक्ट की राज्य परियोजना अधिकारी अपर्णा पांडेय ने बताया कि यह प्रोजेक्ट 2023-24 तक चलेगा। इसमें गंगोत्री नेशनल पार्क क्षेत्र के 14, गोविंद वन्य जीव विहार क्षेत्र के 10 और दारमा घाटी के 6 गांव लिए गए हैं। इसमें स्थानीय युवाओं को अपनी संस्कृति, क्षेत्र की जैव विविधता, समृद्ध वन्य जीव संसार और नैसर्गिक सौंदर्य से रूबरू होने का मौका मिलेगा। इन कार्यक्रमों के प्रसारण से देश दुनिया में क्षेत्र का प्रचार-प्रसार होगा। जिससे इन क्षेत्रों में पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।
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उत्तराखंड में उत्तरकाशी के गोविंद वन्य जीव विहार एवं गंगोत्री नेशनल पार्क तथा पिथौरागढ़ की दारमा ब्यास घाटी में यह प्रोजेक्ट चलाए जा रहे हैं। इसमें सिक्योर हिमालय फैलोशिप कार्यक्रम के तहत क्षेत्र के युवाओं को वीडियो और रेडियो कार्यक्रम तैयार करने का प्रशिक्षण दिया गया। उत्तरकाशी के पुजेली मोरी निवासी मनवीर सिंह, गंगाड़ गांव के रणदेव चौहान एवं दोणी निवासी देवराज तथा दारमा घाटी पिथौरागढ़ के जयेंद्र सिंह एवं कविंद्र सिंह कुटियाल ने क्षेत्र की जैव विविधता, संस्कृति, वास्तुकला, ऊनी वस्त्र उद्योग, जीवन शैली एवं प्राकृतिक सौंदर्य को समेटते हुए फिल्म तैयार की है।
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सिक्योर हिमालय प्रोजेक्ट से जुड़ी रेशमा मनराल ने बताया कि चयनित युवाओं को एक माह तक फोटो एवं वीडियोग्राफी का प्रशिक्षण दिया। इसके बाद इन युवाओं ने सिक्योर हिमालय के रोहित गुसाईं, गौरव तालुकदार एवं शैराप पार्डेन शेरपा की देखरेख में अपने क्षेत्रों में फिल्मों की शूटिंग की। शुक्रवार को वर्ल्ड माउंटेन डे पर इन युवाओं की ओर से तैयार की गई आठ संक्षिप्त फिल्मों को यूट्यूब पर लांच किया गया। जल्द ही क्षेत्र में सामुदायिक फेस्टिवल आयोजित कर स्थानीय लोगों को भी यह फिल्में दिखाई जाएंगी। क्षेत्र के युवाओं से फैलोशिप के तहत रेडियो कार्यक्रम भी तैयार कराए गए हैं, जिनकी लाॅंचिंग 21 दिसंबर को होगी।
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पर्यटन के लिहाज से भी महत्वपूर्ण होगा यह कार्यक्रम
उत्तरकाशी। सिक्योर हिमालय प्रोजेक्ट की राज्य परियोजना अधिकारी अपर्णा पांडेय ने बताया कि यह प्रोजेक्ट 2023-24 तक चलेगा। इसमें गंगोत्री नेशनल पार्क क्षेत्र के 14, गोविंद वन्य जीव विहार क्षेत्र के 10 और दारमा घाटी के 6 गांव लिए गए हैं। इसमें स्थानीय युवाओं को अपनी संस्कृति, क्षेत्र की जैव विविधता, समृद्ध वन्य जीव संसार और नैसर्गिक सौंदर्य से रूबरू होने का मौका मिलेगा। इन कार्यक्रमों के प्रसारण से देश दुनिया में क्षेत्र का प्रचार-प्रसार होगा। जिससे इन क्षेत्रों में पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।