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शीतकालीन यात्रा के लिए गंगा का मायका तैयार
अमर उजाला ब्यूरो/ उत्तरकाशी।
Updated Sat, 05 Nov 2016 10:40 PM IST
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गंगा
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शीतकालीन चार धाम यात्रा ठीकठाक चली, तो यहां आने वाले देश-विदेश के तीर्थयात्रियों को जहां मन का सुकून मिलेगा, वहीं स्थानीय व्यापारियों को भी इसका लाभ मिलेगा। जिले में न केवल पौराणिक मंदिर एवं मठ हैं, बल्कि ताल और बुग्यालों की भी भरमार है। राज्य सरकार ने बीते दो साल से शीतकालीन चारधाम यात्रा शुरू करने का बीड़ा उठाया है। गंगोत्री धाम की शीतकालीन यात्रा का श्रीगणेश मुखबा में होना है, जहां मां गंगा के शीतकालीन प्रवास के लिए आ चुकी है।
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सरकार की यह पहल यदि रंग लाती है, तो जिले को न केवल धार्मिक पहचान मिलेगी, बल्कि पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। यहां कई पौराणिक मंदिर-मठों के अलावा ताल-बुग्याल भी हैं।
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सर्दियों में जहां मैदानी इलाकों में लोग घने कोहरे की मार झेलते है, तो यहां चटक धूप एवं नीला अंबर सैलानियों को रोमांचित करता है। इस दौरान बर्फीली चादर ओढ़े ताल और बुग्यालों का नजारा देखने लायक रहता है।
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शीतकाल यात्रा में करें इन कुदरती नजारों का दीदार
दयारा बुग्याल- मखमली घास से लबालब यह बुग्याल शीतकाल में दिसंबर से मार्च तक बर्फ से ढका रहता है। गंगोत्री हाईवे के भटवाड़ी से रैथल या बार्सू गांव होते हुए यहां पहुंचा जा सकता है। यहां से दयारा की दूरी सात किमी वाहन तथा पांच किमी पैदल है।
डोडीताल- इस ताल को भगवान गणेश की जन्म स्थली माना जाता है। शीतकाल में बर्फ से ढके रहने वाले इस ताल तक पहुंचने के लिए उत्तरकाशी मुख्यालय से 14 किमी वाहन से संगमचट्टी तथा इसके बाद 21 किमी की पैदल दूरी नापनी पड़ती है।
नचिकेता ताल- टिहरी और उत्तरकाशी जिले की सीमा पर स्थित नचिकेता ताल बांज-बुरांस के घने जंगल से घिरा हुआ है। गंगोत्री-यमुनोत्री धाम की शीतकाल यात्रा करने के बाद केदारनाथ जाते समय तीर्थ यात्री चौरंगीखाल से दो किमी की पैदल दूरी तय कर इस ताल का दीदार कर सकते हैं।
गंगनानी- इस स्थान पर गंगा-यमुना का संगम माना जाता है। इसी कुंड के पास थान गांव में जमदगनी ऋषि ने तपस्या की थी। ऋषि की तपस्या के यहां पर गंगा की जलधारा निकली थी। यमुनोत्री धाम की शीतकाल यात्रा के दौरान तीर्थ यात्री इस कुंड का भी दर्शन कर करते हैं।
गर्मकुंड- शीतकाली में इस कुंड तक पहुंचने के लिए यात्रियों को यमुनोत्री की यात्रा के दौरान जंगलचट्टी से आधा किमी की पैदल दूरी तय कर बनास गांव पहुंचना पड़ेगा।
मंदिरों की नगरी- शीतकाल में यात्री न केवल मुखबा एवं खरसाली में गंगा-यमुना मंदिर बल्कि उत्तरकाशी में विराजमान कई पैराणिक मंदिरों का दर्शन भी कर सकते हैं। यहां प्रसिद्ध विश्वनाथ मंदिर, शक्ति मंदिर, परशुराम मंदिर, कंडार देवता, कुटेटी देवी, नर्मदेश्वर मंदिर सहित अनेक मंदिर हैं।