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नेपाली मूल के मजदूर की मौत के आरोप में एक व्यक्ति को दो साल छह माह की सजा
Updated Mon, 11 Sep 2017 10:24 PM IST
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उत्तरकाशी। दो साल पहले बड़कोट तहसील में नेपाली मजदूर की मौत के मामले में जिला एवं सत्र न्यायालय में न्यायाधीश डीपी गैरोला ने आरोपी को ढाई साल की सजा तथा छह हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
वर्ष 2015 में बड़कोट के कुथनौर में पांच नेपाली मजदूर पद्म शाही, मोती शाही, विरेंद्र, दबन और काली शाही एक साथ किराये के कमरे पर रहते थे। वे सभी दिहाड़ी मजदूर थे। इन मजदूरों का ठेकेदार ने काम कराने की एवज में तीन लाख रुपए देने थे, लेकिन वह उन्हें लगातार टाल रहा था। 10 नवंबर 2015 को जब पद्म शाही बड़कोट बाजार में संबंधित ठेकेदार से पैसे न मिलने पर शोर-शराबा कर रहा था तभी वह वहां राह चलते अजयपाल सिंह भंडारी से भिड़ गया। उनके बीच काफी कहासुनी और मारपीट भी हो गई। 11 नवंबर को अजयपाल सिंह अपने दो साथियों के साथ नेपालियों के किराये के मकान में पहुंच गया। अजयपाल के साथी सुनील ने मिठाई खिलाने के बहाने उनका दरवाजा खुलवाया। इसके बाद अजय पाल और उसके साथी कमरे में घुस गए, लेकिन उस दिन वहां पद्म शाही नहीं था। उसके बाकी चार साथी वहां मौजूद थे, जिनमें से एक उसका भाई थी था। उनके साथ अजयपाल और उसके साथियों ने मारपीट की। शोर शराबा होने के बाद पड़ोसियों ने बीचबचाव किया और आरोपियों को वहां से भगा दिया। कुछ देर बाद आरोपी फिर से पिछले कमरे से वहां पहुंच गए और फिर से पद्म बहादुर के साथियों के साथ मारपीट शुरू कर दी। मारपीट में काली शाही और मोती शाही को काफी चोंटे आईं। इस बीच पद्म शाही के साथी वहां से जान बचाकर भागे और उन्होंने झाड़ियों में छुपकर अपनी जान बचाई। इसके बाद आरोपी भी वहां से भाग निकले। 12 नवंबर की सुबह पद्म बहादुर के साथी वहां पहुंचे तो देखा कि काली शाही वहां नहीं था। इसकी सूचना उन्होंने पद्म बहादुर को दी। इस पर पद्म बहादुर ने उन्हें बड़कोट बुलाकर उनका मेडिकल करवाया। कुछ देर बाद कुथनौर में उनके कमरे से 100 मीटर दूर नदी की तरफ काली शाही का शव भी बरामद हो गया। काली शाही पद्म शाही का भाई था। इसके बाद पद्म शाही ने बड़कोट थाने में आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करवाया। जिला एवं सत्र न्यायालय में सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता गंभीर सिंह चौहान ने अभियोजन पक्ष की तरफ से 19 गवाह पेश किए। इसके बाद जिला एवं सत्र न्यायाधीश डीपी गैरोला की अदालत ने मुख्य आरोपी अजयपाल सिंह भंडारी पुत्र बच्चन सिंह भंडारी निवासी कुथनौर को आईपीसी 323 और 452 में दोषी मानते हुए दो साल छह माह का सश्रम कारावास और छह हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। मुख्य आरोपी के दो अन्य साथियों के खिलाफ पुख्ता सुबूत न होने के कारण उन्हें छोड़ दिया गया। मुख्य आरोपी अजयपाल घटना के बाद से ही जेल में बंद है।
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वर्ष 2015 में बड़कोट के कुथनौर में पांच नेपाली मजदूर पद्म शाही, मोती शाही, विरेंद्र, दबन और काली शाही एक साथ किराये के कमरे पर रहते थे। वे सभी दिहाड़ी मजदूर थे। इन मजदूरों का ठेकेदार ने काम कराने की एवज में तीन लाख रुपए देने थे, लेकिन वह उन्हें लगातार टाल रहा था। 10 नवंबर 2015 को जब पद्म शाही बड़कोट बाजार में संबंधित ठेकेदार से पैसे न मिलने पर शोर-शराबा कर रहा था तभी वह वहां राह चलते अजयपाल सिंह भंडारी से भिड़ गया। उनके बीच काफी कहासुनी और मारपीट भी हो गई। 11 नवंबर को अजयपाल सिंह अपने दो साथियों के साथ नेपालियों के किराये के मकान में पहुंच गया। अजयपाल के साथी सुनील ने मिठाई खिलाने के बहाने उनका दरवाजा खुलवाया। इसके बाद अजय पाल और उसके साथी कमरे में घुस गए, लेकिन उस दिन वहां पद्म शाही नहीं था। उसके बाकी चार साथी वहां मौजूद थे, जिनमें से एक उसका भाई थी था। उनके साथ अजयपाल और उसके साथियों ने मारपीट की। शोर शराबा होने के बाद पड़ोसियों ने बीचबचाव किया और आरोपियों को वहां से भगा दिया। कुछ देर बाद आरोपी फिर से पिछले कमरे से वहां पहुंच गए और फिर से पद्म बहादुर के साथियों के साथ मारपीट शुरू कर दी। मारपीट में काली शाही और मोती शाही को काफी चोंटे आईं। इस बीच पद्म शाही के साथी वहां से जान बचाकर भागे और उन्होंने झाड़ियों में छुपकर अपनी जान बचाई। इसके बाद आरोपी भी वहां से भाग निकले। 12 नवंबर की सुबह पद्म बहादुर के साथी वहां पहुंचे तो देखा कि काली शाही वहां नहीं था। इसकी सूचना उन्होंने पद्म बहादुर को दी। इस पर पद्म बहादुर ने उन्हें बड़कोट बुलाकर उनका मेडिकल करवाया। कुछ देर बाद कुथनौर में उनके कमरे से 100 मीटर दूर नदी की तरफ काली शाही का शव भी बरामद हो गया। काली शाही पद्म शाही का भाई था। इसके बाद पद्म शाही ने बड़कोट थाने में आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करवाया। जिला एवं सत्र न्यायालय में सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता गंभीर सिंह चौहान ने अभियोजन पक्ष की तरफ से 19 गवाह पेश किए। इसके बाद जिला एवं सत्र न्यायाधीश डीपी गैरोला की अदालत ने मुख्य आरोपी अजयपाल सिंह भंडारी पुत्र बच्चन सिंह भंडारी निवासी कुथनौर को आईपीसी 323 और 452 में दोषी मानते हुए दो साल छह माह का सश्रम कारावास और छह हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। मुख्य आरोपी के दो अन्य साथियों के खिलाफ पुख्ता सुबूत न होने के कारण उन्हें छोड़ दिया गया। मुख्य आरोपी अजयपाल घटना के बाद से ही जेल में बंद है।
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