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Uttarkashi News: जालंग में जर्जर स्कूल भवन में बच्चों की पढ़ाई
Sat, 19 Sep 2026 05:42 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, उत्तर काशी
संवाद न्यूज एजेंसी, उत्तर काशी
Updated Sat, 19 Sep 2026 05:42 PM IST
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किचन बदहाल तो कक्षा में बन रहा मध्याह्न भोजन
उत्तरकाशी। डुंडा ब्लॉक के जालंग गांव में प्राथमिक विद्यालय की बदहाली ने शिक्षा व्यवस्था के दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। चार दशक से अधिक पुराने विद्यालय भवन की छत की टिन उखड़ रही है। दीवारों में दरारें हैं और बारिश में पानी कक्षों तक पहुंच रहा है। इसके बावजूद विद्यालय की मरम्मत को लेकर अब तक ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी है।
ग्राम प्रधान गीता राणा के अनुसार विद्यालय में 35 छात्र-छात्राएं पढ़ रहे हैं। भवन की हालत का असर सीधे बच्चों की पढ़ाई पर पड़ रहा है। जर्जर किचन में बारिश का पानी आने के कारण मध्यान्ह भोजन कक्षा कक्ष में तैयार करना पड़ रहा है। ऐसे में जिन कमरों में बच्चों की पढ़ाई होनी चाहिए। उनका इस्तेमाल भोजन बनाने के लिए भी करना पड़ रहा है।
प्रधान का कहना है कि विद्यालय भवन की स्थिति और मरम्मत की जरूरत के संबंध में कई बार शिक्षा विभाग व प्रशासन को अवगत कराया गया, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है। सवाल यह है कि यदि विभाग को लंबे समय से भवन की स्थिति की जानकारी थी तो समय रहते मरम्मत या वैकल्पिक व्यवस्था क्यों नहीं की गई।
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जर्जर छत और दीवारों के बीच बच्चों से पढ़ाई कराना केवल भवन की समस्या नहीं बल्कि बच्चों की सुरक्षा और शिक्षा व्यवस्था की प्राथमिकताओं पर भी बड़ा सवाल है। विभागीय अधिकारियों की चुप्पी इस मामले को और गंभीर बनाती है। मामले में मुख्य शिक्षाधिकारी से संपर्क का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया।
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उत्तरकाशी। डुंडा ब्लॉक के जालंग गांव में प्राथमिक विद्यालय की बदहाली ने शिक्षा व्यवस्था के दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। चार दशक से अधिक पुराने विद्यालय भवन की छत की टिन उखड़ रही है। दीवारों में दरारें हैं और बारिश में पानी कक्षों तक पहुंच रहा है। इसके बावजूद विद्यालय की मरम्मत को लेकर अब तक ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी है।
ग्राम प्रधान गीता राणा के अनुसार विद्यालय में 35 छात्र-छात्राएं पढ़ रहे हैं। भवन की हालत का असर सीधे बच्चों की पढ़ाई पर पड़ रहा है। जर्जर किचन में बारिश का पानी आने के कारण मध्यान्ह भोजन कक्षा कक्ष में तैयार करना पड़ रहा है। ऐसे में जिन कमरों में बच्चों की पढ़ाई होनी चाहिए। उनका इस्तेमाल भोजन बनाने के लिए भी करना पड़ रहा है।
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प्रधान का कहना है कि विद्यालय भवन की स्थिति और मरम्मत की जरूरत के संबंध में कई बार शिक्षा विभाग व प्रशासन को अवगत कराया गया, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है। सवाल यह है कि यदि विभाग को लंबे समय से भवन की स्थिति की जानकारी थी तो समय रहते मरम्मत या वैकल्पिक व्यवस्था क्यों नहीं की गई।
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जर्जर छत और दीवारों के बीच बच्चों से पढ़ाई कराना केवल भवन की समस्या नहीं बल्कि बच्चों की सुरक्षा और शिक्षा व्यवस्था की प्राथमिकताओं पर भी बड़ा सवाल है। विभागीय अधिकारियों की चुप्पी इस मामले को और गंभीर बनाती है। मामले में मुख्य शिक्षाधिकारी से संपर्क का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया।