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चेकिंग अभियान का दावा फिर फेल
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यमुनोत्री हाईवे पर बड़कोट के पास हुए वाहन हादसे ने एक बार फिर सड़क सुरक्षा इंतजामों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। हादसों पर नियंत्रण के लिए आए दिन बैठकें कर यातायात नियमों का अनुपालन सुनिश्चित करने हेतु सघन चेकिंग अभियान चलाने और सड़कों के किनारे सुरक्षा के लिहाज से पैरापिट एवं क्रैश बैरियर लगाने के दिशा-निर्देश जारी होते हैं, लेकिन न तो संबंधित विभाग इसे गंभीरता से ले रहे हैं और न ही आम जनता। शनिवार को हुआ कार हादसे की वजह ओवरलोडिंग मानी जा रही है। समय रहते ही कार को चेक कर लिया जाता, तो यह हादसा टल जाता।
जिले में सड़क हादसों का पुराना इतिहास है। बीते सालों में हुए सड़क हादसों में सैकड़ों लोग काल के गाल में समा चुके हैं। यही कारण है कि आए दिन सड़क हादसों पर नियंत्रण के लिए पुलिस एवं प्रशासन की बैठकों में आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए जाते हैं। साथ ही हादसे के बाद मजिस्ट्रेटी जांच कराकर हादसों के कारणों की पड़ताल कर आवश्यक सुझाव भी दिए जाते हैं, लेकिन इन पर ठोस कार्रवाई नहीं होने का ही परिणाम है कि हादसों पर रोक नहीं लग पा रही है। शनिवार को बड़कोट के पास यमुनोत्री हाईवे पर हुए हादसे में चार लोगों की मौत हो गई और चार लोग गंभीर रूप से घायल हुए। इस ऑल्टो कार में आठ लोग सवार थे।
ऐसे में पुलिस द्वारा ओवरलोड वाहनों पर रोक के लिए चलाए जाने वाले चेकिंग अभियानों पर सवाल उठना लाजमी है। कार गंगनाणी में चल रहे पारंपरिक मेले कुंड की जातर से लौट रही थी। मेले में उमड़ रही भारी भीड़ के बीच वाहनों में ओवर लोडिंग देखी जा रही है। यदि पुलिस चेकिंग अभियान चलाकर इस पर रोक लगाती, तो संभव था हादसा टल जाता। यमुनोत्री हाईवे के जिस हिस्से में हादसा हुआ है वहां हल्का मोड़ है, लेकिन सड़क किनारे पैराफिट या क्रैश बैरियर नहीं लगे हैं। बैठकों में डीएम की ओर से हमेशा संबंधित विभागों को इसके निर्देश दिए जाते हैं। यदि इन पर कार्रवाई हुई होती, तो भी संभव था हादसा टल जाता। देखना है कि इन हादसों से संबंधित विभाग और आम जन कब तक सबक लेंगे।
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उत्तरकाशी जनपद में हुए कुछ बड़े सड़क हादसे-
1- 20 सितंबर 1995 को डबराणी के पास बस गंगा भागीरथी में गिरने से 70 लोगों कबत मौत
2- 9 जुलाई 2006 को नालूपाणी में बस गिरने से 22 लोगों की मौत
3- 3 जुलाई 2008 को नाकुरी के पास बस गिरने से 13 लोगों की मौत
4- 21 जुलाई 2008 को सुक्की टॉप के पास बस गिरने से 14 लोगों की मौत
5- 4 जुलाई 2009 को भटवाड़ी गंगनानी के बीच बस गंगा भागीरथी में गिरने से 40 लोगों की मौत
6- 10 दिसंबर 2009 को नालूपाणी में टैक्सी वाहन गंगा भागीरथी में गिरने से 12 लोगों की मौत
7- 1 अगस्त 2010 को डबराणी के पास ट्रक खड्ड में गिरने से 27 कांवड़ यात्रियों की मौत
8- 23 मई 2017 को गंगोत्री हाईवे पर नालूपाणी के पास बस गिरने से 26 लोगों की मौत
9- 4 जून 2017 को गंगोत्री हाईवे पर हेलगूगाड के निकट टैक्सी गंगा भागीरथी में गिरने से 12 लोगों की मौत
10- 28 जूवन 2017 को पौंटी मोटर मार्ग पर वाहन दुर्घटना में 6 की मौत
11- 26 जनवरी 2018 को यमुनोत्री हाईवे पर वाहन हादसे में चार की मौत
12- 3 सितंबर 2018 को गंगोत्री हाईवे पर भुक्की के पास टैंपों ट्रैवलर गिरने से 14 की मौत
13- 5 अक्तूबर 2018 को गंगोत्री हाईवे पर सुनगर के पास टैंपो ट्रैवलर गिरने से 10 यात्रियों की मौत
14- 15 अक्तूबर 2018 को धरासू-जोगत मोटर मार्ग पर टैक्सी हादसे में 5 लोगों की मौत
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जिले में सड़क हादसों का पुराना इतिहास है। बीते सालों में हुए सड़क हादसों में सैकड़ों लोग काल के गाल में समा चुके हैं। यही कारण है कि आए दिन सड़क हादसों पर नियंत्रण के लिए पुलिस एवं प्रशासन की बैठकों में आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए जाते हैं। साथ ही हादसे के बाद मजिस्ट्रेटी जांच कराकर हादसों के कारणों की पड़ताल कर आवश्यक सुझाव भी दिए जाते हैं, लेकिन इन पर ठोस कार्रवाई नहीं होने का ही परिणाम है कि हादसों पर रोक नहीं लग पा रही है। शनिवार को बड़कोट के पास यमुनोत्री हाईवे पर हुए हादसे में चार लोगों की मौत हो गई और चार लोग गंभीर रूप से घायल हुए। इस ऑल्टो कार में आठ लोग सवार थे।
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ऐसे में पुलिस द्वारा ओवरलोड वाहनों पर रोक के लिए चलाए जाने वाले चेकिंग अभियानों पर सवाल उठना लाजमी है। कार गंगनाणी में चल रहे पारंपरिक मेले कुंड की जातर से लौट रही थी। मेले में उमड़ रही भारी भीड़ के बीच वाहनों में ओवर लोडिंग देखी जा रही है। यदि पुलिस चेकिंग अभियान चलाकर इस पर रोक लगाती, तो संभव था हादसा टल जाता। यमुनोत्री हाईवे के जिस हिस्से में हादसा हुआ है वहां हल्का मोड़ है, लेकिन सड़क किनारे पैराफिट या क्रैश बैरियर नहीं लगे हैं। बैठकों में डीएम की ओर से हमेशा संबंधित विभागों को इसके निर्देश दिए जाते हैं। यदि इन पर कार्रवाई हुई होती, तो भी संभव था हादसा टल जाता। देखना है कि इन हादसों से संबंधित विभाग और आम जन कब तक सबक लेंगे।
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उत्तरकाशी जनपद में हुए कुछ बड़े सड़क हादसे-
1- 20 सितंबर 1995 को डबराणी के पास बस गंगा भागीरथी में गिरने से 70 लोगों कबत मौत
2- 9 जुलाई 2006 को नालूपाणी में बस गिरने से 22 लोगों की मौत
3- 3 जुलाई 2008 को नाकुरी के पास बस गिरने से 13 लोगों की मौत
4- 21 जुलाई 2008 को सुक्की टॉप के पास बस गिरने से 14 लोगों की मौत
5- 4 जुलाई 2009 को भटवाड़ी गंगनानी के बीच बस गंगा भागीरथी में गिरने से 40 लोगों की मौत
6- 10 दिसंबर 2009 को नालूपाणी में टैक्सी वाहन गंगा भागीरथी में गिरने से 12 लोगों की मौत
7- 1 अगस्त 2010 को डबराणी के पास ट्रक खड्ड में गिरने से 27 कांवड़ यात्रियों की मौत
8- 23 मई 2017 को गंगोत्री हाईवे पर नालूपाणी के पास बस गिरने से 26 लोगों की मौत
9- 4 जून 2017 को गंगोत्री हाईवे पर हेलगूगाड के निकट टैक्सी गंगा भागीरथी में गिरने से 12 लोगों की मौत
10- 28 जूवन 2017 को पौंटी मोटर मार्ग पर वाहन दुर्घटना में 6 की मौत
11- 26 जनवरी 2018 को यमुनोत्री हाईवे पर वाहन हादसे में चार की मौत
12- 3 सितंबर 2018 को गंगोत्री हाईवे पर भुक्की के पास टैंपों ट्रैवलर गिरने से 14 की मौत
13- 5 अक्तूबर 2018 को गंगोत्री हाईवे पर सुनगर के पास टैंपो ट्रैवलर गिरने से 10 यात्रियों की मौत
14- 15 अक्तूबर 2018 को धरासू-जोगत मोटर मार्ग पर टैक्सी हादसे में 5 लोगों की मौत