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Uttarkashi: देव अनुमति के बिना बुग्यालों से नहीं तोड़ सकते ब्रह्मकमल, पौराणिक परंपराओं के साथ है विशेष नाता

Mon, 26 Aug 2024 09:51 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, उत्तर काशी
संवाद न्यूज एजेंसी, उत्तर काशी Updated Mon, 26 Aug 2024 09:51 AM IST
सार

ब्रह्मकमल पुष्प का रीति रिवाजों और पौराणिक परंपराओं के साथ विशेष नाता है। सावन में जिले में विभिन्न हिस्सों में हारदूधू मेले के बाद सेलकू त्योहार अगस्त से लेकर सितंबर तक मनाए जाते हैंं। इन त्योहारों में सबसे पहले ब्रह्मकमल स्थानीय देवी-देवताओं को अर्पित किए जाते हैं। 

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Brahmakamal cannot be plucked from the Bugyals without God permission Uttarkashi News in hindi
ब्रह्मकमल - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

उत्तरकाशी जिले की गंगोत्री घाटी सहित हर्षिल और टकनौर क्षेत्र के बुग्यालों में इन दिनों राज्यपुष्प ब्रह्मकमल अपनी सुंदरता की छटा बिखेर रहे है। क्षेत्रों के ग्रामीण आराध्य देव की अनुमति के बाद हारदूधू मेले में ब्रह्मकमल को तोड़कर देवता को अर्पित करते हैं। गंगा घाटी में सबसे पहले यह पुष्प गंगा सहित सोमेश्वर देवता को चढ़ाया जाता है।

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हिमालय के बुग्यालों में सावन में खिलने वाले ब्रह्मकमल पुष्प का रीति रिवाजों और पौराणिक परंपराओं के साथ विशेष नाता है। सावन में जनपद के विभिन्न हिस्सों में हारदूधू मेले के बाद सेलकू त्योहार अगस्त से लेकर सितंबर तक मनाए जाते हैंं। इन त्योहारों में सबसे पहले ब्रह्मकमल स्थानीय देवी-देवताओं को अर्पित किए जाते हैं। उसके बाद लोग धार्मिक मान्यताओं के बाद इन्हें अपने घरों में खुशहाली के प्रतीक के रूप में देवालयों और पूजास्थलों में रखते हैं।
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सावन के बाद गंगोत्री सहित हर्षिल और टकनौर क्षेत्र के बुग्यालों में सबसे अधिक ब्रह्मकमल पुष्प समुद्रतल से 3000 मीटर की ऊंचाई से अधिक स्थानों पर खिलते हैं, लेकिन लोक मान्यताओं के बाद ग्रामीण अगस्त में होने वाले हारदूधू मेले से पहले ग्राम देवता की अनुमति लेते हैं। उसके बाद देवडोली कुछ लोगों को चयनित कर उन्हें फूल तोड़ने के लिए भेजती है।
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वे ब्रह्मकमल तोड़कर हारदूधू और सेलकू मेले में गंगा सहित नाग देवता और साेमेश्वर देवता को चढ़ाया जाता है। उसके बाद उस फूल को स्थानीय लोगों और मेहमानों में बांटा जाता है। तीर्थपुरोहित सुधांशु सेमवाल ने बताया कि आज तक परंपरा है कि अगर हारदूधू मेले से पहले किसी भी व्यक्ति ने देव अनुमति के बिना ब्रह्मकमल के पुष्प को तोड़ने की कोशिश की तो उसे देवदोष भुगतना पड़ता है।

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