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Hindi News ›   Uttarakhand ›   Uttarkashi News ›   border area village need to devlopment.

सीमावर्ती गांव आबाद करने की जरूरत

Tue, 02 Jun 2015 07:23 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला
ब्यूरो/अमर उजाला Updated Tue, 02 Jun 2015 07:23 PM IST
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भारत-चीन सीमा क्षेत्र की ओर से आबादी विहीन हुए भारतीय गांव नेलांग तथा जाढूंग के घर खंडहर बन गए हैं। सीमावर्ती क्षेत्र के भ्रमण पर गए पर्यावरणविद् चंडी प्रसाद भट्ट इस स्थिति को देश के लिए खतरे के रूप में देखते हैं।

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गढ़वाल कमिश्नर सीएस नपल्च्याल ने भी सीमावर्ती क्षेत्र में खंडहर बन चुके जाढूंग गांव पहुंचकर बिना मुआवजा दिए चीनी आक्रमण के समय खाली कराए गए इन गांवों की डीएम से स्टेटस रिपोर्ट तलब कर मामले को गंभीरता से लिया है।
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क्षेत्र का भ्रमण कर लौटे पर्यावरणविद् चंडी प्रसाद भट्ट कहते हैं कि सीमावर्ती क्षेत्र के गांव के लोग सीमा की द्वितीय रक्षा पंक्ति का काम करते हैं। कारगिल में पाकिस्तानी घुसपैठ की खबर भी भारतीय फौज को चरवाहों से ही मिली थी।
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जब वर्ष 1962 के चीनी आक्रमण के बाद भी चमोली के नीति एवं माणा तथा पिथौरागढ़ के मिलम और दारमाघाटी के गांव आज भी आबाद हैं, तो उत्तरकाशी के नेलांग तथा जाढूंग गांव आबादी विहीन क्यों रखे जा रहे हैं।


बीते 27 मई को मंडलायुक्त ने सीमावर्ती क्षेत्र के नेलांग एवं जाढूंग गांव का दौरा किया था। उन्होंने बिना मुआवजे के गांव से बेदखल किए गए ग्रामीणों की शिकायत पर प्रशासन से तत्काल दोनों गांवों की स्थिति पर रिपोर्ट मांगी है।

इंदुधर बौड़ाई, डीएम उत्तरकाशी।



अभी गंगोत्री नेशनल पार्क का फाइनल नोटीफिकेशन नहीं हुआ है। नेलांग एवं जाढूंग गांव की भूमिधरी तथा हक हकूक की जमीन के दावे पर उनकी आपत्तियां और पक्ष सुना जा सकता है।
श्रवण कुमार, उपनिदेशक गंगोत्री नेशनल पार्क

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