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Uttarkashi News: ऑनलाइन गेम्स की लत बर्बाद कर सकती है छात्रों का जीवन
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साइबर सेल के प्रभारी इंस्पेक्टर प्रमोद उनियाल ने अमर उजाला संवाद कार्यक्रम में छात्रों को ऑनलाइन गेम्स के दुष्प्रभावों की जानकारी दी। कहा कि ऑनलाइन गेम्स की लत छात्रों का जीवन बर्बाद कर सकती है। ऑनलाइन गेम्स के कारण न केवल समय बर्बाद होता है, बल्कि घंटों कंप्यूटर व मोबाइल स्क्रीन देखने से आंखों की रोशनी पर भी असर पड़ता है। जरूरी है कि ऑनलाइन गेम्स का आदि न बने। केवल मनोरंजन के लिए ही गेम्स खेलें।
शुक्रवार को अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से ऋषिराम शिक्षण संस्थान मनेरा में ऑनलाइन गेम्स में फंसा बचपन विषय पर संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें साइबर सेल प्रभारी इंस्पेक्टर उनियाल ने छात्रों को ऑनलाइन गेम्स के दुष्प्रभावों को लेकर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि प्रत्येक वस्तु के एक सीमा से अधिक प्रयोग के लाभ और हानि दोनों होते हैं। यह बात कंप्यूटर और मोबाइल फोन दोनों पर लागू होती है। वर्तमान में छात्र-छात्राएं मनोरंजन के लिए ऑनलाइन गेम्स खेलना शुरू करते हैं और धीरे-धीरे आदि होते चले जाते हैं। कहा कि कुछ गेम्स आपको ऑनलाइन जुआ खेलने और सट्टा लगाने के लिए भी प्रेरित करते हैं। लालच में छात्र अपराध की तरफ भी कदम बढ़ा लेते हैं। कहा कि यदि ऑनलाइन गेम्स से पढ़ाई की तरफ एकाग्रता घट रही है तो इसका मतलब साफ है कि उन्हें गेम्स की लत लग चुकी है। इस दौरान इंस्पेक्टर प्रमोद उनियाल ने छात्रों को नशीले पदार्थों के दुभ्प्रभाव और साइबर क्राइम की भी जानकारी दी। बताया कि साइबर क्राइम लालच, डर और गोपनीय जानकारी लीक होने के कारण होते हैं। इनसे बचने के लिए जरूरी है कि लालच न करें, किसी से डरे नहीं और अपनी गोपनीय जानकारी को किसी अंजान व्यक्ति के साथ साझा न करें। इस मौके पर प्रधानाचार्य एसके मिश्रा, उप प्रधानाचार्य बद्रीश बिष्ट, विजयनंद जोशी, जेपी बहुगुणा, बीना थपलियाल, गुरुप्रसाद उनियाल, विश्वजीत सेमवाल व राजेंद्र सिंह रावत आदि रहे। संवाद में कक्षा 9 से 12 तक के करीब 110 से अधिक छात्रों ने प्रतिभाग किया।
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शुक्रवार को अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से ऋषिराम शिक्षण संस्थान मनेरा में ऑनलाइन गेम्स में फंसा बचपन विषय पर संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें साइबर सेल प्रभारी इंस्पेक्टर उनियाल ने छात्रों को ऑनलाइन गेम्स के दुष्प्रभावों को लेकर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि प्रत्येक वस्तु के एक सीमा से अधिक प्रयोग के लाभ और हानि दोनों होते हैं। यह बात कंप्यूटर और मोबाइल फोन दोनों पर लागू होती है। वर्तमान में छात्र-छात्राएं मनोरंजन के लिए ऑनलाइन गेम्स खेलना शुरू करते हैं और धीरे-धीरे आदि होते चले जाते हैं। कहा कि कुछ गेम्स आपको ऑनलाइन जुआ खेलने और सट्टा लगाने के लिए भी प्रेरित करते हैं। लालच में छात्र अपराध की तरफ भी कदम बढ़ा लेते हैं। कहा कि यदि ऑनलाइन गेम्स से पढ़ाई की तरफ एकाग्रता घट रही है तो इसका मतलब साफ है कि उन्हें गेम्स की लत लग चुकी है। इस दौरान इंस्पेक्टर प्रमोद उनियाल ने छात्रों को नशीले पदार्थों के दुभ्प्रभाव और साइबर क्राइम की भी जानकारी दी। बताया कि साइबर क्राइम लालच, डर और गोपनीय जानकारी लीक होने के कारण होते हैं। इनसे बचने के लिए जरूरी है कि लालच न करें, किसी से डरे नहीं और अपनी गोपनीय जानकारी को किसी अंजान व्यक्ति के साथ साझा न करें। इस मौके पर प्रधानाचार्य एसके मिश्रा, उप प्रधानाचार्य बद्रीश बिष्ट, विजयनंद जोशी, जेपी बहुगुणा, बीना थपलियाल, गुरुप्रसाद उनियाल, विश्वजीत सेमवाल व राजेंद्र सिंह रावत आदि रहे। संवाद में कक्षा 9 से 12 तक के करीब 110 से अधिक छात्रों ने प्रतिभाग किया।
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