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नगर में नहीं है आग बुझाने के पर्याप्त इंतजाम
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बड़कोट (उत्तरकाशी)। बीते डेढ़ दशक के भीतर नगर में भीषण अग्निकांड की पांच घटनाएं हो चुकी हैं, लेकिन प्रशासन ने आग बुझाने के पर्याप्त इंतजाम नहीं किए हैं। स्थिति यह है कि नगर में दमकल वाहनों में पानी भरने की व्यवस्था नहीं है। ऐसे में वाहनों को पानी भरने के लिए तीन से चार किमी दूर खड्ड और बड़कोट खड्ड जाना पड़ता है। ऐसे में आग बुझाने में देर होने की वजह से आग से नुकसान का दायरा बढ़ जाता है।
दूरस्थ गांवों से शहर की ओर बढ़ते पलायन के चलते बड़कोट नगर घनी आबाद बस्ती में तब्दील हो चुका है। यमुनोत्री धाम के प्रमुख पड़ाव वाले इस नगर में एक दूसरे से सटे दर्जनों लकड़ी व टीन के बने कच्चे भवन अग्निकांड के लिहाज से बेहद संवेदनशील हैं। बीते डेढ़ दशक के भीतर नगर में भीषण अग्निकांड की पांच घटनाएं हो चुकी हैं। वर्ष 2003 में हुए अग्निकांड में तीन कच्ची दुकानें स्वाह हो गई थीं। इसके बाद वर्ष 2004 में चार, 2011 में तीन, 2018 में एक और अब सोमवार को हुए अग्निकांड में सात दुकानें मय सामान स्वाह होने से लाखों रुपये का नुकसान हुआ।
सोमवार को आग बुझाने में लगे दमकल वाहनों को पानी भरने के लिए नगर से करीब तीन से चार किमी दूर कृष्णा खड्ड और बड़कोट खड्ड तक की दौड़ लगानी पड़ी, जिससे आग बुझाने में विलंब हुआ और आग फैलने से नुकसान का दायरा भी बढ़ गया। ऐसे में नगर के मध्य दमकल वाहनों के लिए पानी भरने की व्यवस्था की जरूरत महसूस की जा रही है।
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ढाई लाख रुपये के नोट भी चढ़े आग की भेंट
बड़कोट। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के निकट मेडिकल स्टोर संचालित करने वाले जयदेव रावत का अग्निकांड में दोहरा नुकसान हुआ है। जयदेव ने बताया कि उसके आढ़ती को आज आना था। उसने आढ़ती को देने के लिए दुकान में ढाई लाख रखे हुए थे। भीषण अग्निकांड के बीच दुकान के भीतर से कुछ भी बाहर निकालने की स्थिति नहीं बन पायी और ढाई लाख रुपये के नोट भी आग की भेंट चढ़ गए।
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दूरस्थ गांवों से शहर की ओर बढ़ते पलायन के चलते बड़कोट नगर घनी आबाद बस्ती में तब्दील हो चुका है। यमुनोत्री धाम के प्रमुख पड़ाव वाले इस नगर में एक दूसरे से सटे दर्जनों लकड़ी व टीन के बने कच्चे भवन अग्निकांड के लिहाज से बेहद संवेदनशील हैं। बीते डेढ़ दशक के भीतर नगर में भीषण अग्निकांड की पांच घटनाएं हो चुकी हैं। वर्ष 2003 में हुए अग्निकांड में तीन कच्ची दुकानें स्वाह हो गई थीं। इसके बाद वर्ष 2004 में चार, 2011 में तीन, 2018 में एक और अब सोमवार को हुए अग्निकांड में सात दुकानें मय सामान स्वाह होने से लाखों रुपये का नुकसान हुआ।
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सोमवार को आग बुझाने में लगे दमकल वाहनों को पानी भरने के लिए नगर से करीब तीन से चार किमी दूर कृष्णा खड्ड और बड़कोट खड्ड तक की दौड़ लगानी पड़ी, जिससे आग बुझाने में विलंब हुआ और आग फैलने से नुकसान का दायरा भी बढ़ गया। ऐसे में नगर के मध्य दमकल वाहनों के लिए पानी भरने की व्यवस्था की जरूरत महसूस की जा रही है।
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ढाई लाख रुपये के नोट भी चढ़े आग की भेंट
बड़कोट। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के निकट मेडिकल स्टोर संचालित करने वाले जयदेव रावत का अग्निकांड में दोहरा नुकसान हुआ है। जयदेव ने बताया कि उसके आढ़ती को आज आना था। उसने आढ़ती को देने के लिए दुकान में ढाई लाख रखे हुए थे। भीषण अग्निकांड के बीच दुकान के भीतर से कुछ भी बाहर निकालने की स्थिति नहीं बन पायी और ढाई लाख रुपये के नोट भी आग की भेंट चढ़ गए।