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‘फट जा पंचधार’ नाटक से किया कुरीतियों पर प्रहार
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पुरोला (उत्तरकाशी)। समाज में व्याप्त कुरीतियों के खिलाफ जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से अजीम प्रेमजी फाउंडेशन की ओर से नगर में ‘फट जा पंचधार’ नाटक का मंचन किया गया। प्रख्यात लेखक विद्यासागर नौटियाल की कहानी पर आधारित नाटक के माध्यम से समाज में नारी उत्पीड़न, जातिवाद आदि कुरीतियों पर प्रहार किया गया। नाटक में रंगकर्मी कुसुम पंत के अभिनय को सभी लोगों ने सराहा।
शिक्षा के माध्यम से सामाजिक चेतना फैलाने की मुहिम में जुटे अजीम प्रेमजी फाउंडेशन की ओर से समाज हित में भी विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इसी क्रम में रविवार की रात को नगर में ‘फट जा पंचधार’ नाटक का मंचन किया गया। संभव मंच परिवार के कलाकारों ने नाटक का मंचन किया। यह नाटक गढ़वाल के प्रख्यात लेखक विद्यासागर नौटियाल की लोकप्रिय कहानी पर आधारित है। अभिषेक मैंदोला निर्देशित एकल नाटक में रंगकर्मी कुसुम पंत ने अपने सजीव अभिनय एवं भावपूर्ण संवाद अदायगी से दर्शकों को समाज में नारी की स्थित, मजदूरों की व्यथा और जातिवाद की बेड़ियों के बारे में सोचने पर मजबूर कर दिया।
कथानक के अनुसार नाटक की मुख्य पात्र रक्खी छोटी जाति की किरदार है। गांव में बंधुआ मजदूरी प्रथा के चलते दादा एवं पिता सहित तीन पीड़ियों से वह गांव के सयाणे के यहां मजदूरी करती है और कर्ज तले दबे होने के कारण सयाणे वीर सिंह के साथ बिना शादी किए पूरा जीवन काटने को विवश है। नाटक में रक्खी पंचधारों की पंचायत में कहती है कि जब सयाणा गंगा-यमुना के जल से नहाने और पंडितों की पूजा अर्चना से शुद्ध हो गया, तो रक्खी को समाज शुद्ध क्यों नहीं मानता। एक घंटे के इस नाटक के माध्यम से समाज में नारी जीवन के संघर्ष एवं द्वंद्व का सजीव चित्रण किया गया।
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शिक्षा के माध्यम से सामाजिक चेतना फैलाने की मुहिम में जुटे अजीम प्रेमजी फाउंडेशन की ओर से समाज हित में भी विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इसी क्रम में रविवार की रात को नगर में ‘फट जा पंचधार’ नाटक का मंचन किया गया। संभव मंच परिवार के कलाकारों ने नाटक का मंचन किया। यह नाटक गढ़वाल के प्रख्यात लेखक विद्यासागर नौटियाल की लोकप्रिय कहानी पर आधारित है। अभिषेक मैंदोला निर्देशित एकल नाटक में रंगकर्मी कुसुम पंत ने अपने सजीव अभिनय एवं भावपूर्ण संवाद अदायगी से दर्शकों को समाज में नारी की स्थित, मजदूरों की व्यथा और जातिवाद की बेड़ियों के बारे में सोचने पर मजबूर कर दिया।
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कथानक के अनुसार नाटक की मुख्य पात्र रक्खी छोटी जाति की किरदार है। गांव में बंधुआ मजदूरी प्रथा के चलते दादा एवं पिता सहित तीन पीड़ियों से वह गांव के सयाणे के यहां मजदूरी करती है और कर्ज तले दबे होने के कारण सयाणे वीर सिंह के साथ बिना शादी किए पूरा जीवन काटने को विवश है। नाटक में रक्खी पंचधारों की पंचायत में कहती है कि जब सयाणा गंगा-यमुना के जल से नहाने और पंडितों की पूजा अर्चना से शुद्ध हो गया, तो रक्खी को समाज शुद्ध क्यों नहीं मानता। एक घंटे के इस नाटक के माध्यम से समाज में नारी जीवन के संघर्ष एवं द्वंद्व का सजीव चित्रण किया गया।
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