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अपराजिता अभियान के तहत महिलाओं को सिखाए आपदा प्रबंधन के गुर
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पुरोला (उत्तरकाशी)। अमर उजाला के अपराजिता अभियान के तहत श्रीकोट गांव में आपदा प्रबंधन कार्यशाला का आयोजन किया गया। जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण एवं हिमालय पर्यावरण जड़ी बूटी एग्रो संस्थान जाड़ी के सहयोग से आयोजित कार्यशाला में ग्रामीणों को आपदा से निपटने की जानकारी दी गई।
श्रीकोट गांव स्थित पंचायत चौक पर आयोजित कार्यशाला में सर्वप्रथम गोष्ठी का आयोजन किया गया। मास्टर ट्रेनर राजमणी ने बताया कि पर्वतीय क्षेत्रों में भूकंप, बाढ़, भूस्खलन, जंगलों की आग आदि आपदाओं के कारण हर साल भारी तबाही मचती है। ग्रामीणों को आपदा संभावित क्षेत्रों को चिह्नित करके अपने घर आदि भवनों का निर्माण सुरक्षित स्थानों पर भूकंपरोधी तकनीक से करना चाहिए। वनाग्नि की घटनाओं को रोकने के लिए जंगलों के आसपास जमा पिरूल आदि सूखी घास को नियमित रूप से साफ करना चाहिए। उन्होंने कहा कि आपदा की स्थिति में ग्रामीणों को राहत एवं बचाव कार्यों की जानकारी हो तो सरकारी मदद मिलने से पहले वह स्वयं ही अपनी व अन्य प्रभावित लोगों की जान बचा सकते हैं। मास्टर ट्रेनर गंगा बहुगुणा ने ग्रामीणों को स्ट्रेचर बनाने व प्राथमिक चिकित्सा के साथ ही रैपलिंग, रीवर क्रॉसिंग, रॉक क्लाइंबिंग आदि की ट्रेनिंग दी। इस मौके पर सीता देवी, देवेंद्री देवी, जगदेई, पुलमा देवी, उर्मिला देवी, उजली देवी, ममता देवी, रामेश्वरी देवी, सुमित्रा देवी, उर्वशी देवी, बिजमा, कविता, विनीता देवी, मनीष, प्रकाश आदि मौजूद रहे।
आपदा प्रबंधन की जानकारी मिलने से ग्रामीणों के भीतर आत्मनिर्भरता का भाव आएगा। साथ ही स्वयं के बलबूते पर आपात स्थितियों से निपटने का साहस भी विकसित होगा। युवाओं व महिलाओं को नियमित रूप से इस प्रकार का प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए।
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अनीता, बेस्टी गांव।
आपदा प्रबंधन की जागरूकता को लेकर शासन प्रशासन व स्वयंसेवी संस्थाओं द्वारा सराहनीय कार्य किया जा रहा है। हालांकि सरकार को जागरूकता कार्यक्रमों के साथ ही ग्रामीणों को बुनियादी सुरक्षा उपकरण भी उपलब्ध कराने चाहिए।
सीता देवी, श्रीकोट गांव।
श्रीकोट गांव स्थित पंचायत चौक पर आयोजित कार्यशाला में सर्वप्रथम गोष्ठी का आयोजन किया गया। मास्टर ट्रेनर राजमणी ने बताया कि पर्वतीय क्षेत्रों में भूकंप, बाढ़, भूस्खलन, जंगलों की आग आदि आपदाओं के कारण हर साल भारी तबाही मचती है। ग्रामीणों को आपदा संभावित क्षेत्रों को चिह्नित करके अपने घर आदि भवनों का निर्माण सुरक्षित स्थानों पर भूकंपरोधी तकनीक से करना चाहिए। वनाग्नि की घटनाओं को रोकने के लिए जंगलों के आसपास जमा पिरूल आदि सूखी घास को नियमित रूप से साफ करना चाहिए। उन्होंने कहा कि आपदा की स्थिति में ग्रामीणों को राहत एवं बचाव कार्यों की जानकारी हो तो सरकारी मदद मिलने से पहले वह स्वयं ही अपनी व अन्य प्रभावित लोगों की जान बचा सकते हैं। मास्टर ट्रेनर गंगा बहुगुणा ने ग्रामीणों को स्ट्रेचर बनाने व प्राथमिक चिकित्सा के साथ ही रैपलिंग, रीवर क्रॉसिंग, रॉक क्लाइंबिंग आदि की ट्रेनिंग दी। इस मौके पर सीता देवी, देवेंद्री देवी, जगदेई, पुलमा देवी, उर्मिला देवी, उजली देवी, ममता देवी, रामेश्वरी देवी, सुमित्रा देवी, उर्वशी देवी, बिजमा, कविता, विनीता देवी, मनीष, प्रकाश आदि मौजूद रहे।
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आपदा प्रबंधन की जानकारी मिलने से ग्रामीणों के भीतर आत्मनिर्भरता का भाव आएगा। साथ ही स्वयं के बलबूते पर आपात स्थितियों से निपटने का साहस भी विकसित होगा। युवाओं व महिलाओं को नियमित रूप से इस प्रकार का प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए।
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अनीता, बेस्टी गांव।
आपदा प्रबंधन की जागरूकता को लेकर शासन प्रशासन व स्वयंसेवी संस्थाओं द्वारा सराहनीय कार्य किया जा रहा है। हालांकि सरकार को जागरूकता कार्यक्रमों के साथ ही ग्रामीणों को बुनियादी सुरक्षा उपकरण भी उपलब्ध कराने चाहिए।
सीता देवी, श्रीकोट गांव।