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राष्ट्रपति ने की ऋतिक के मॉडल की सराहना
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बड़कोट। नौगांव ब्लॉक के बिगराड़ी गांव निवासी छात्र ऋतिक चमियाल के नवाचार को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से सराहना मिली है। नवमेश प्रतियोगिता में राष्ट्रस्तर पर चयनित होने के बाद ऋतिक को गुजरात में आयोजित नवाचार एवं उद्यमिता महोत्सव में प्रतिभाग करने का अवसर मिला था, जहां उसके द्वारा बनाई गई धान कूटने की मशीन के मॉडल को राष्ट्रपति ने सराहा।
विगत शुक्रवार को गुजरात के गांधीनगर में नवाचार एवं उद्यमिता महोत्सव का आयोजन किया गया था, जिसमें देश के विभिन्न राज्यों से चयनित छात्र-छात्राओं ने प्रतिभाग किया। इसमें उत्तरकाशी जिले के बिगराड़ी नौगांव निवासी ऋतिक चमियाल ने भी हिस्सा लिया। कार्यक्रम के दौरान ऋतिक ने राष्ट्रपति को अपने द्वारा बनाई गई धान कूटने की मशीन के बारे में जानकारी दी। उसने मशीन को संचालित कर बताया कि बिना ईंधन व बिजली के चलने वाली इस मशीन से किसान व ग्रामीण महिलाएं आसानी से धान कूट सकती हैं। ऋतिक की इस उपलब्धि पर प्रधानाचार्य दीपक कुमार सहित क्षेत्र के तमाम लोगों ने हर्ष जताया है।
राइंका गडोली में कक्षा नौ के छात्र बिगराड़ी गांव निवासी ऋतिक चमियाल ने भारत सरकार द्वारा आयोजित नवमेश प्रतियोगिता में प्रतिभाग किया था। ऋतिक के पिता किशन सिंह चमियाल एक आंख से दिव्यांग हैं और चाय की दुकान चलाकर परिवार का पालन पोषण करते हैं। जबकि उसकी माता खजानी देवी गृहणी हैं। वह पांच माह पूर्व छत से गिरने के बाद से ही बिस्तर पर ही है।
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विगत शुक्रवार को गुजरात के गांधीनगर में नवाचार एवं उद्यमिता महोत्सव का आयोजन किया गया था, जिसमें देश के विभिन्न राज्यों से चयनित छात्र-छात्राओं ने प्रतिभाग किया। इसमें उत्तरकाशी जिले के बिगराड़ी नौगांव निवासी ऋतिक चमियाल ने भी हिस्सा लिया। कार्यक्रम के दौरान ऋतिक ने राष्ट्रपति को अपने द्वारा बनाई गई धान कूटने की मशीन के बारे में जानकारी दी। उसने मशीन को संचालित कर बताया कि बिना ईंधन व बिजली के चलने वाली इस मशीन से किसान व ग्रामीण महिलाएं आसानी से धान कूट सकती हैं। ऋतिक की इस उपलब्धि पर प्रधानाचार्य दीपक कुमार सहित क्षेत्र के तमाम लोगों ने हर्ष जताया है।
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राइंका गडोली में कक्षा नौ के छात्र बिगराड़ी गांव निवासी ऋतिक चमियाल ने भारत सरकार द्वारा आयोजित नवमेश प्रतियोगिता में प्रतिभाग किया था। ऋतिक के पिता किशन सिंह चमियाल एक आंख से दिव्यांग हैं और चाय की दुकान चलाकर परिवार का पालन पोषण करते हैं। जबकि उसकी माता खजानी देवी गृहणी हैं। वह पांच माह पूर्व छत से गिरने के बाद से ही बिस्तर पर ही है।
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