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सेब के पेड़ों की छल चट कर रहे हैं लंगूर
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उत्तरकाशी। इस बार सर्दियों में उपला टकनौर क्षेत्र में हुई भारी बर्फबारी से सेब की अच्छी फसल की उम्मीद लगाए बैठे किसानों की उम्मीदों पर लंगूर पानी फेर रहे हैं। लंगूर सेब के पेड़ों की छाल चट करने में लगे हैं। काश्तकारों ने वन विभाग से लंगूरों से निजात दिलाने की मांग की है।
सुक्की निवासी मोहन सिंह राणा, हर्षिल के डा. नागेंद्र रावत, धराली के जय भगवान पंवार ने बताया कि आजकल सेब बागीचों पर लंगूरों ने कहर बरपा रखा है। पूरी घाटी हिमाच्छादित होने के कारण लंगूरों के समक्ष भोजन की समस्या खड़ी हो गई है और वे बागीचों में पहुंचकर सेब के पेड़ों की छाल और टहनियों को चट करने में जुटे हैं। ठंड के इस दौर में ग्रामीणों को अपने बागीचों की चौकीदारी करने में खासी मशक्कत करनी पड़ रही है। प्रभारी कृषि विज्ञान केंद्र के डा. पंकज नौटियाल का कहना है कि सेब के पेड़ों की मीठी छाल और नर्म टहनियां वन्य जीव स्वाद लेकर खाते हैं। इससे जख्मी पेड़ों में कैंकर रोग एवं फंगस का खतरा बढ़ जाता है। वन्य जीवों द्वारा जख्मी किए गए पेड़ों को पुनर्जीवित करने के लिए किसान जख्मी हिस्सों में बोडो पेस्ट का लेप लगाने के साथ ही कॉपर ऑक्सी क्लोराइड का छिड़काव करें।
सुक्की निवासी मोहन सिंह राणा, हर्षिल के डा. नागेंद्र रावत, धराली के जय भगवान पंवार ने बताया कि आजकल सेब बागीचों पर लंगूरों ने कहर बरपा रखा है। पूरी घाटी हिमाच्छादित होने के कारण लंगूरों के समक्ष भोजन की समस्या खड़ी हो गई है और वे बागीचों में पहुंचकर सेब के पेड़ों की छाल और टहनियों को चट करने में जुटे हैं। ठंड के इस दौर में ग्रामीणों को अपने बागीचों की चौकीदारी करने में खासी मशक्कत करनी पड़ रही है। प्रभारी कृषि विज्ञान केंद्र के डा. पंकज नौटियाल का कहना है कि सेब के पेड़ों की मीठी छाल और नर्म टहनियां वन्य जीव स्वाद लेकर खाते हैं। इससे जख्मी पेड़ों में कैंकर रोग एवं फंगस का खतरा बढ़ जाता है। वन्य जीवों द्वारा जख्मी किए गए पेड़ों को पुनर्जीवित करने के लिए किसान जख्मी हिस्सों में बोडो पेस्ट का लेप लगाने के साथ ही कॉपर ऑक्सी क्लोराइड का छिड़काव करें।
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