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सुक्की गांव और गंगा भागीरथी के लिए खतरा बन सकता है प्रस्तावित बाइपास

Sat, 09 Feb 2019 09:50 PM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Sat, 09 Feb 2019 09:50 PM IST
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सुक्की गांव और गंगा भागीरथी के लिए खतरा बन सकता है प्रस्तावित बाइपास

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उत्तरकाशी। बीआरओ द्वारा सड़क की कुछ दूरी कम करने के लिए गंगा भागीरथी के दोनों ओर की अस्थिर पहाड़ी और पुराने मलबे पर उगे जंगल को काटकर प्रस्तावित गंगोत्री हाईवे के सुक्की-झाला बाईपास की योजना पर विराम लग सकता है। पर्यावरणविद् व उत्तराखंड अंतरिक्ष उपयोग केंद्र के निदेशक की ओर से केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी को प्रस्तावित बाईपास रोड से संभावित खतरों को लेकर लिखे पत्र के जवाब में मंत्री ने विभाग के डीजी को कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

पर्यावरणविद् चंडी प्रसाद भट्ट ने मंत्री को भेजे पत्र में बताया कि भूकंप एवं भूगर्भीय दृष्टि से बेहद संवेदनशील इस क्षेत्र में सड़क की थोड़ी दूरी कम करने के लिए पूर्व की तबाही से सबक लेने की जरूरत है। उत्तराखंड अंतरिक्ष उपयोग केंद्र के निदेशक डा. एमपीएस बिष्ट ने माना कि यदि सुक्की पहले बैंड से झाला के लिए प्रस्तावित तीन किमी सड़क के लिए पहाड़ एवं जंगल काटे गए, तो पहाड़ी ढाल अस्थिर हो जाएंगे। इस रिपोर्ट के आधार पर केंद्रीय मंत्री गडकरी ने विभाग के डीजी को प्रकरण पर कार्रवाई के लिए निर्देशित किया है। वहीं, सुक्की गांव के पूर्व सरपंच गोविंद सिंह, मोहन सिंह राणा का कहना है कि सुक्की के पांच नालों ने वर्ष 1999 में पहली बार गंगोत्री हाईवे को नुकसान पहुंचाया था। तब से अभी तक नालों का स्थायी ट्रीटमेंट नहीं हुआ। वर्ष 2016 में यहां स्कबर बनाए जाने के बाद से अब बरसात में कभी सड़क बंद नहीं होती। ऐसे में सुक्की, जसपुर आदि गांवों को छोड़कर बाईपास रोड बनाए जाने से ग्रामीण अलग-थलग पड़ जाएंगे।
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