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मनेरी भाली प्रथम चरण बिजली परियोजना का जीर्णोद्धार शुरू
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उत्तरकाशी। आस्ट्रिया की एनडिज कंपनी ने उम्र पूरी कर चुकी 90 मेगावाट की मनेरी भाली प्रथम चरण परियोजना के विद्युत गृह की टरबाइन, जनरेटर आदि मैकेनिकल एवं इलेक्ट्रिकल ढांचे को बदलने का काम शुरू कर दिया है। गंगा भागीरथी में पानी की कमी वाली अवधि में एक टरबाइन को खोलकर कंपनी ने अपने वल्लभगढ़ हरियाणा कारखाने से नई टरबाइन के रनर आदि कलपुर्जे यहां पहुंचाने का काम शुरू कर दिया है। करीब दो सौ करोड़ लागत से हो रहे जीर्णोद्धार कार्य के बाद परियोजना प्रबंधन 90 मेगावाट की परियोजना से 100 मेगावाट तक विद्युत उत्पादन करने के साथ ही मशीनों की मरम्मत एवं रखरखाव खर्च कम होने का दावा कर रहा है।
वर्ष 1984 में विद्युत उत्पादन शुरू करने वाली 90 मेगावाट की मनेरी भाली प्रथम चरण परियोजना अपनी लागत से कहीं ज्यादा राजस्व वसूल चुकी है। उत्पादन हानि रोकने के लिए पांच साल में बारी-बारी से टरबाइनें व अन्य कलपुर्जे एवं मशीनें बदली जाएगी। साथ ही टरबाइन के रनर आदि कलपुर्जों के तीन सेट स्पेयर में रखकर बरसात में उत्पादन से हटाई जाने वाली टरबाइनों से जोड़कर उत्पादन हानि की स्थिति को रोका जाएगा। परियोजना के उप महाप्रबंधक सचिन डंगवाल ने बताया कि आस्ट्रिया की कंपनी ने तिलोथ विद्युत गृह के जीर्णोद्धार का काम शुरू कर दिया है। यह कार्य पूरा होने के बाद जहां परियोजना से क्षमता से अधिक विद्युत उत्पादन लिया जा सकेगा। वहीं मशीनों की मरम्मत एवं रखरखाव पर होने वाले खर्च को भी कम किया जा सकेगा। अनुबंध के मुताबिक यह कार्य पांच साल में पूरा होगा।
वर्ष 1984 में विद्युत उत्पादन शुरू करने वाली 90 मेगावाट की मनेरी भाली प्रथम चरण परियोजना अपनी लागत से कहीं ज्यादा राजस्व वसूल चुकी है। उत्पादन हानि रोकने के लिए पांच साल में बारी-बारी से टरबाइनें व अन्य कलपुर्जे एवं मशीनें बदली जाएगी। साथ ही टरबाइन के रनर आदि कलपुर्जों के तीन सेट स्पेयर में रखकर बरसात में उत्पादन से हटाई जाने वाली टरबाइनों से जोड़कर उत्पादन हानि की स्थिति को रोका जाएगा। परियोजना के उप महाप्रबंधक सचिन डंगवाल ने बताया कि आस्ट्रिया की कंपनी ने तिलोथ विद्युत गृह के जीर्णोद्धार का काम शुरू कर दिया है। यह कार्य पूरा होने के बाद जहां परियोजना से क्षमता से अधिक विद्युत उत्पादन लिया जा सकेगा। वहीं मशीनों की मरम्मत एवं रखरखाव पर होने वाले खर्च को भी कम किया जा सकेगा। अनुबंध के मुताबिक यह कार्य पांच साल में पूरा होगा।
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