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ग्रेट वेस्टर्न हिमालयन ट्रेल के तहत हिमालय को लांघ रहे रोमांच के शौकीन युवक
Updated Sat, 29 Sep 2018 10:24 PM IST
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उत्तरकाशी। देहरादून एवं हिमाचल प्रदेश के तीन युवक ग्रेट वेस्टर्न हिमालयन ट्रेल पर पाकिस्तान बार्डर से नेपाल बार्डर तक हिमालय को पैदल नापने निकले हैं। लेह लद्दाख से छितकुल, लमखागा एवं कालिंदी होते हुए रोमांच के शौकीन ये ट्रैकर माणा बदरीनाथ धाम पहुंच चुके हैं। इससे आगे ये कुमाऊं क्षेत्र में हिमालय को लांघते हुए 15 अक्तूबर को नेपाल बार्डर पर अपना अभियान संपन्न करेंगे। अभियान के माध्यम से ये युवक तीनों हिमालयी राज्यों को एक सूत्र में बांधने और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दे रहे हैं।
डालनवाला देहरादून निवासी शेखर सिंह, हिमाचल प्रदेश के शक्रोरी चंबा निवासी भारत भूषण एवं खूणी हाटकोटी निवासी प्रणव रावत ने 26 अगस्त को लेह लद्दाख से ग्रेट वेस्टर्न हिमालयन ट्रेल अभियान शुरू किया। वहां से लाहौल स्पीति, शिमला, छितकुल, लमखागा पास होते हुए यह दल हर्षिल पहुंचा। यहां से गंगोत्री, गोमुख, खड़ा पत्थर होते हुए कालिंदी दर्रा पार कर यह दल शुक्रवार को माणा पहुंच गया है। लमखागा एवं कालिंदी ट्रैक पार कराने में इस दल को तकनीकी सहयोग देने वाली एजेंसी हाईलैंड ट्रैक एंड टूर के पीतांबर पंवार ने बताया कि इससे आगे यह दल औली, क्वारी पास, पिंडारी ग्लेशियर, मुनस्यारी होते हुए नेपाल बार्डर पर धारचुला में 15 अक्तूबर को अपना अभियान संपन्न करेंगे।
दल में शामिल भारत भूषण ने दूरभाष पर अमर उजाला को बताया कि उनका उद्देश्य तीनों हिमालयी राज्यों जम्मू कश्मीर, हिमाचल और उत्तराखंड को पैदल ट्रैक रूट के माध्यम से एक सूत्र में पिरोना है। वे रास्ते में पड़ने वाले गांवों के लोगों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करने का प्रयास भी कर रहे हैं। इस अभियान के दौरान वे हिमालय के बीस दर्रों को पार करेंगे। इसमें उन्हें कुल 818 किमी की दूरी तय करनी है, जिसमें से वे करीब 600 किमी तय कर चुके हैं। इस ट्रैक पर वे सर्वाधिक 5884 मीटर की ऊंचाई से होकर गुजरे। अभियान के दौरान वे इस ट्रैक से जुड़ी सभी तकनीकी जानकारियां एकत्र कर रहे हैं, ताकि इस ट्रैक को भविष्य में रोमांच के शौकीनों के बीच लोकप्रिय बनाया जा सके।
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डालनवाला देहरादून निवासी शेखर सिंह, हिमाचल प्रदेश के शक्रोरी चंबा निवासी भारत भूषण एवं खूणी हाटकोटी निवासी प्रणव रावत ने 26 अगस्त को लेह लद्दाख से ग्रेट वेस्टर्न हिमालयन ट्रेल अभियान शुरू किया। वहां से लाहौल स्पीति, शिमला, छितकुल, लमखागा पास होते हुए यह दल हर्षिल पहुंचा। यहां से गंगोत्री, गोमुख, खड़ा पत्थर होते हुए कालिंदी दर्रा पार कर यह दल शुक्रवार को माणा पहुंच गया है। लमखागा एवं कालिंदी ट्रैक पार कराने में इस दल को तकनीकी सहयोग देने वाली एजेंसी हाईलैंड ट्रैक एंड टूर के पीतांबर पंवार ने बताया कि इससे आगे यह दल औली, क्वारी पास, पिंडारी ग्लेशियर, मुनस्यारी होते हुए नेपाल बार्डर पर धारचुला में 15 अक्तूबर को अपना अभियान संपन्न करेंगे।
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दल में शामिल भारत भूषण ने दूरभाष पर अमर उजाला को बताया कि उनका उद्देश्य तीनों हिमालयी राज्यों जम्मू कश्मीर, हिमाचल और उत्तराखंड को पैदल ट्रैक रूट के माध्यम से एक सूत्र में पिरोना है। वे रास्ते में पड़ने वाले गांवों के लोगों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करने का प्रयास भी कर रहे हैं। इस अभियान के दौरान वे हिमालय के बीस दर्रों को पार करेंगे। इसमें उन्हें कुल 818 किमी की दूरी तय करनी है, जिसमें से वे करीब 600 किमी तय कर चुके हैं। इस ट्रैक पर वे सर्वाधिक 5884 मीटर की ऊंचाई से होकर गुजरे। अभियान के दौरान वे इस ट्रैक से जुड़ी सभी तकनीकी जानकारियां एकत्र कर रहे हैं, ताकि इस ट्रैक को भविष्य में रोमांच के शौकीनों के बीच लोकप्रिय बनाया जा सके।
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