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सिर्फ कागजों में ही उतराखंड का हिस्सा है मोरी प्रखंड का अंतिम गांव सेवा
Updated Mon, 24 Sep 2018 09:44 PM IST
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पुरोला (उत्तरकाशी)। गोविंद वन्य जीव विहार के अंतर्गत हिमाचल प्रदेश से लगे मोरी प्रखंड के अंतिम गांव सेवा आज भी सड़क से वंचित है। गांव तमाम जन सुविधाओं के लिए हिमाचल प्रदेश पर निर्भर है।
सेवा गांव के ग्रामीणों की आजीविका सेब, आलू आदि नकदी फसलों पर टिकी है। फिलहाल उत्तराखंड की ओर से सेवा गांव पहुंचने के लिए धौला तक सड़क है। इससे आगे गांव पहुंचने के लिए ग्रामीणों को 12 किमी की दुर्गम पैदल दूरी तय करनी पड़ती है। यहां से हिमाचल प्रदेश की डोडरा क्वार तहसील महज चार किमी पैदल दूरी पर है। जहां सड़क सुविधा है। ऐसे में ग्रामीण सेब आदि नकदी फसलों की सप्लाई हिमाचल की ओर से करके किसी तरह गुजर बसर कर रहे हैं, लेकिन सेब उत्पादन की अच्छी संभावनाओं के बावजूद बागीचों को विस्तार नहीं दे पा रहे हैं। ग्रामीण बताते हैं कि मोरी तहसील से उनका वास्ता सिर्फ सरकारी कार्यों से ही पड़ता है, जबकि स्वास्थ्य, शिक्षा, दूरसंचार आदि सुविधाओं के लिए वे पूरी तरह हिमाचल प्रदेश पर ही निर्भर हैं।
सेवा गांव निवासी बालक राम का कहना है कि हमारी सरकार सड़क निर्माण में गोविंद वन्य जीव विहार की बंदिशों का रोना रोती है, जबकि हिमाचल में क्वार देवता वन्य जीव विहार में पड़ने वाले डोडरा क्वार क्षेत्र में वहां की सरकार ने कई साल पहले समुद्र सतह से 4400 मीटर ऊंचाई पर स्थित चांगशील होते हुए अंतिम गांव तक सड़क पहुंचा दी है।
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मुखिया ने सिर्फ घोषणा की, अमल नहीं हुआ
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत ने इसी साल जनवरी में डामटा में मेले के उद्घाटन के दौरान धौला से बरी, सेवा होते हुए डोडरा क्वार तक सड़क निर्माण की घोषणा की थी। इसके बाद फरवरी में जखोल में सावणी गांव के अग्निकांड पीड़ितों को मुआवजा बांटते समय और फिर मार्च में मोरी में सतलुज जल विद्युत निगम की परियोजना के शिलान्यास पर भी उन्होंने अपनी इस घोषणा को दोहराया, लेकिन अभी तक यह घोषणा धरातल पर नहीं उतरी।
कोट...
धौला में रुपिन नदी पर मोटर पुल स्वीकृत है, लेकिन वन भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया अभी लंबित है। धौला से बरी की ओर तीन किमी वन मोटर मार्ग की स्वीकृति मिली थी। जो बन चुका है, लेकिन बिना पुल के इसका उपयोग नहीं हो पा रहा। इससे आगे सेवा एवं डोडरा क्वार तक सड़क निर्माण की अभी तक स्वीकृति नहीं मिल पायी है।
आरपी मिश्रा, उपनिदेशक, गोविंद वन्य जीव विहार पुरोला।
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सेवा गांव के ग्रामीणों की आजीविका सेब, आलू आदि नकदी फसलों पर टिकी है। फिलहाल उत्तराखंड की ओर से सेवा गांव पहुंचने के लिए धौला तक सड़क है। इससे आगे गांव पहुंचने के लिए ग्रामीणों को 12 किमी की दुर्गम पैदल दूरी तय करनी पड़ती है। यहां से हिमाचल प्रदेश की डोडरा क्वार तहसील महज चार किमी पैदल दूरी पर है। जहां सड़क सुविधा है। ऐसे में ग्रामीण सेब आदि नकदी फसलों की सप्लाई हिमाचल की ओर से करके किसी तरह गुजर बसर कर रहे हैं, लेकिन सेब उत्पादन की अच्छी संभावनाओं के बावजूद बागीचों को विस्तार नहीं दे पा रहे हैं। ग्रामीण बताते हैं कि मोरी तहसील से उनका वास्ता सिर्फ सरकारी कार्यों से ही पड़ता है, जबकि स्वास्थ्य, शिक्षा, दूरसंचार आदि सुविधाओं के लिए वे पूरी तरह हिमाचल प्रदेश पर ही निर्भर हैं।
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सेवा गांव निवासी बालक राम का कहना है कि हमारी सरकार सड़क निर्माण में गोविंद वन्य जीव विहार की बंदिशों का रोना रोती है, जबकि हिमाचल में क्वार देवता वन्य जीव विहार में पड़ने वाले डोडरा क्वार क्षेत्र में वहां की सरकार ने कई साल पहले समुद्र सतह से 4400 मीटर ऊंचाई पर स्थित चांगशील होते हुए अंतिम गांव तक सड़क पहुंचा दी है।
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मुखिया ने सिर्फ घोषणा की, अमल नहीं हुआ
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत ने इसी साल जनवरी में डामटा में मेले के उद्घाटन के दौरान धौला से बरी, सेवा होते हुए डोडरा क्वार तक सड़क निर्माण की घोषणा की थी। इसके बाद फरवरी में जखोल में सावणी गांव के अग्निकांड पीड़ितों को मुआवजा बांटते समय और फिर मार्च में मोरी में सतलुज जल विद्युत निगम की परियोजना के शिलान्यास पर भी उन्होंने अपनी इस घोषणा को दोहराया, लेकिन अभी तक यह घोषणा धरातल पर नहीं उतरी।
कोट...
धौला में रुपिन नदी पर मोटर पुल स्वीकृत है, लेकिन वन भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया अभी लंबित है। धौला से बरी की ओर तीन किमी वन मोटर मार्ग की स्वीकृति मिली थी। जो बन चुका है, लेकिन बिना पुल के इसका उपयोग नहीं हो पा रहा। इससे आगे सेवा एवं डोडरा क्वार तक सड़क निर्माण की अभी तक स्वीकृति नहीं मिल पायी है।
आरपी मिश्रा, उपनिदेशक, गोविंद वन्य जीव विहार पुरोला।