{"_id":"5ba3d2c0867a557f565e5049","slug":"15374629572-utter-kashi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"मनेरी भाली परियोजना में विद्युत उत्पादन पर भारी पड़ रही गंगा भागीरथी में बढ़ती गाद की मात्रा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मनेरी भाली परियोजना में विद्युत उत्पादन पर भारी पड़ रही गंगा भागीरथी में बढ़ती गाद की मात्रा
Updated Thu, 20 Sep 2018 10:32 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
उत्तरकाशी। गंगा भागीरथी में गाद की तीव्रता मनेरी भाली जल विद्युत परियोजना से विद्युत उत्पादन पर भारी पड़ रही है। जल्द ही 200 करोड़ रुपये खर्च कर 90 मेगावाट के तिलोथ विद्युतगृह का जीर्णोद्धार किया जाना है। इसके बावजूद 540 मिलियन यूनिट स्थापित क्षमता वाली परियोजना के लिए महज 461.4 मियू उत्पादन लक्ष्य नियत किया गया है।
बीते आठ अगस्त को खीर गंगा की बाढ़ और बीते साल गोमुख के ऊपर नीलाताल फटने से गंगोत्री तक गंगा भागीरथी के 18 किमी क्षेत्र में जमा मलबा अब धीरे-धीरे नीचे खिसकने लगा है। वर्ष 2012 की आपदा के बाद पहली बार इस बरसात में मनेरी भाली परियोजना में भारी नुकसान हुआ। गेट खोलकर गाद की फ्लशिंग (सफाई) पूरी तरह से नहीं होने से मनेरी और जोशियाड़ा बैराज जलाशय की स्टोरेज क्षमता में कमी आने से उत्पादन कम हुआ। इसी माह तिलोथ विद्युतगृह में दो टरबाइनों के रनर मरम्मत के लिए खोलने पड़े।
जल विद्युत निगम ने तिलोथ विद्युतगृह की मशीनों को बदलने के लिए आस्ट्रिया की एनड्रिडा हाइड्रो कंपनी से करार कर करीब 200 करोड़ की लागत से जीर्णोद्धार की योजना तैयार की है। योजना पर दिसंबर से काम शुरू होगा।
विज्ञापन
कोट..
गोमुख क्षेत्र में पैरा ग्लेशियर जोन की धारक क्षमता का अभी तक कोई अध्ययन नहीं हो पाया है। कब, कितना, कहां से गंगा भागीरथी में मलबा आएगा और इससे बांध परियोजनाओं को होने वाले वास्तविक नुकसान का अनुमान लगा पाना मुश्किल है।
डा. नवीन जुयाल, वरिष्ठ भूवैज्ञानिक।
कोट..
गंगा भागीरथी में आ रहा मलबा बिजली परियोजनाओं के लिए चिंता का विषय है। जीर्णोद्धार योजना में सख्त रेत कणों से जलमग्न कलपुर्जों को बचाने का प्रबंध किया जा रहा है। किंतु ज्यादा गाद आने पर रख रखाव खर्च बढ़ने और क्लोजर की स्थिति बनने से उत्पादन लागत पर असर पड़ना तय है।
सचिन डंगवाल, डीजीएम, तिलोथ विद्युतगृह।
बीते आठ अगस्त को खीर गंगा की बाढ़ और बीते साल गोमुख के ऊपर नीलाताल फटने से गंगोत्री तक गंगा भागीरथी के 18 किमी क्षेत्र में जमा मलबा अब धीरे-धीरे नीचे खिसकने लगा है। वर्ष 2012 की आपदा के बाद पहली बार इस बरसात में मनेरी भाली परियोजना में भारी नुकसान हुआ। गेट खोलकर गाद की फ्लशिंग (सफाई) पूरी तरह से नहीं होने से मनेरी और जोशियाड़ा बैराज जलाशय की स्टोरेज क्षमता में कमी आने से उत्पादन कम हुआ। इसी माह तिलोथ विद्युतगृह में दो टरबाइनों के रनर मरम्मत के लिए खोलने पड़े।
विज्ञापन
जल विद्युत निगम ने तिलोथ विद्युतगृह की मशीनों को बदलने के लिए आस्ट्रिया की एनड्रिडा हाइड्रो कंपनी से करार कर करीब 200 करोड़ की लागत से जीर्णोद्धार की योजना तैयार की है। योजना पर दिसंबर से काम शुरू होगा।
विज्ञापन
कोट..
गोमुख क्षेत्र में पैरा ग्लेशियर जोन की धारक क्षमता का अभी तक कोई अध्ययन नहीं हो पाया है। कब, कितना, कहां से गंगा भागीरथी में मलबा आएगा और इससे बांध परियोजनाओं को होने वाले वास्तविक नुकसान का अनुमान लगा पाना मुश्किल है।
डा. नवीन जुयाल, वरिष्ठ भूवैज्ञानिक।
कोट..
गंगा भागीरथी में आ रहा मलबा बिजली परियोजनाओं के लिए चिंता का विषय है। जीर्णोद्धार योजना में सख्त रेत कणों से जलमग्न कलपुर्जों को बचाने का प्रबंध किया जा रहा है। किंतु ज्यादा गाद आने पर रख रखाव खर्च बढ़ने और क्लोजर की स्थिति बनने से उत्पादन लागत पर असर पड़ना तय है।
सचिन डंगवाल, डीजीएम, तिलोथ विद्युतगृह।