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पॉलिथीन टैंक से होगी सिंचाई की समस्या दूर
Updated Thu, 20 Sep 2018 10:36 PM IST
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चिन्यालीसौड़ (उत्तरकाशी)। वर्षा जल संग्रहण कर इसका उपयोग खेती बागवानी में करके किसानों को सिंचाई समस्या से निजात दिलाई जा सकती है। कृषि विज्ञान केंद्र चिन्यालीसौड़ ने वर्षा जल संग्रहण की सस्ती तकनीक का प्रदर्शन कर किसानों को इसे अपनाने की सलाह दी है। केंद्र के वैज्ञानिकों ने महज 50 हजार रुपये लागत में एक लाख लीटर क्षमता का वर्षा जल संचयन पॉलिथीन टैंक तैयार किया है।
कृषि विज्ञान केंद्र के चिन्यालीसौड़ फार्म में एक लाख लीटर क्षमता का वर्षा जल संचयन पॉलिथीन टैंक का निर्माण कराया गया है। यहां कार्यालय की महज दो सौ वर्ग मीटर छत से बारिश के पानी को पाइप द्वारा टेप किया गया है। इसे स्टोर करने के लिए महज 50 हजार रुपये लागत से एक लाख लीटर क्षमता का पॉलिथीन टैंक तैयार किया गया है। इसके लिए 12 मीटर लंबा, 8 मीटर चौड़ा और डेढ़ मीटर गहरा गड्ढा खोदकर इसमें 200 जीएसएम की सिलपॉलिन पॉलिथीन बिछाकर इसे गोल पत्थरों से ढका गया है।
कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी डा. पंकज नौटियाल ने बताया कि टैंक को कृषि अनुसंधान संस्थान अल्मोड़ा के वैज्ञानिकों ने डिजाइन किया है। एक लाख लीटर पानी के टैंक से आसानी से 20 नाली जमीन की सिंचाई की जा सकती है। फिलहाल चिन्यालीसौड़ में एक प्रदर्शन टैंक के साथ ही भड़कोट एवं डुंडा गांव में इसका सफल प्रयोग किया जा रहा है।
कृषि विज्ञान केंद्र के चिन्यालीसौड़ फार्म में एक लाख लीटर क्षमता का वर्षा जल संचयन पॉलिथीन टैंक का निर्माण कराया गया है। यहां कार्यालय की महज दो सौ वर्ग मीटर छत से बारिश के पानी को पाइप द्वारा टेप किया गया है। इसे स्टोर करने के लिए महज 50 हजार रुपये लागत से एक लाख लीटर क्षमता का पॉलिथीन टैंक तैयार किया गया है। इसके लिए 12 मीटर लंबा, 8 मीटर चौड़ा और डेढ़ मीटर गहरा गड्ढा खोदकर इसमें 200 जीएसएम की सिलपॉलिन पॉलिथीन बिछाकर इसे गोल पत्थरों से ढका गया है।
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कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी डा. पंकज नौटियाल ने बताया कि टैंक को कृषि अनुसंधान संस्थान अल्मोड़ा के वैज्ञानिकों ने डिजाइन किया है। एक लाख लीटर पानी के टैंक से आसानी से 20 नाली जमीन की सिंचाई की जा सकती है। फिलहाल चिन्यालीसौड़ में एक प्रदर्शन टैंक के साथ ही भड़कोट एवं डुंडा गांव में इसका सफल प्रयोग किया जा रहा है।
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