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जोखिम भरे रास्तों से यमुनोत्री धाम की यात्रा चलाए जाने पर उठ रहे हैं सवाल
Updated Sun, 29 Jul 2018 10:48 PM IST
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बड़कोट (उत्तरकाशी)। आपदा प्रभावित यमुनोत्री धाम में व्यवस्थाएं दुरुस्त किए बिना यात्रा शुरू कराने पर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। तीर्थ पुरोहित एवं स्थानीय ग्रामीण इसे मात्र वाहवाही लूटने का खेल बता रहे हैं, जबकि प्रशासन हालात से निपटते हुए लगातार यात्रियों को धाम में दर्शन कराने में जुटा है।
बता दें कि इस यात्रा सीजन में ओजरी डबरकोट स्लाइड जोन सक्रिय रहने से यमुनोत्री हाईवे लगातार बाधित हो रहा है। वहीं 17 जुलाई को यमुनोत्री धाम में तबाही मचने से बुनियादी सुविधाएं भी ध्वस्त हो गई हैं, लेकिन शासन-प्रशासन इन सुविधाओं को दुरुस्त करने के बजाए यात्रा सुचारु करने में लगा है। सुचारु यात्रा के नाम पर श्रद्धालुओं को जोखिम भरे रास्तों से कई-कई किमी पैदल धाम तक पहुंचाया जा रहा है। पवन उनियाल, पुरुषोत्तम उनियाल, अजबीन पंवार, संदीप राणा का कहना है कि यात्रा पर स्थानीय लोगों की आर्थिकी टिकी है, लेकिन जानबूझ कर यात्रियों को जोखिम में डालना गलत है। उन्होंने कहा कि पर्वतों से अनजान लोगों के लिए दुर्गम रास्तों में स्थित उफनते नालों और भूस्खलन को पार करना मुश्किल है। उन्होंने यात्रा शुरू करने से पूर्व सभी व्यवस्थाएं दुरुस्त करने की मांग की है।
यात्रा मार्ग में मौजूद समस्याएं
पहली बड़ी समस्या ओजरी डबरकोट स्लाइड जोन है। उसके बाद तिर्खली-कुंसाला पैदल मार्ग में चंदोयका खड्ड का उफान और बीच-बीच में भूस्खलन हो रहा है। स्यानाचट्टी और जानकीचट्टी के बीच जंगलचट्टी में हाईवे का करीब 50 मीटर हिस्सा क्षतिग्रस्त है। जानकीचट्टी-यमुनोत्री धाम पैदल मार्ग में राम मंदिर के निकट करीब तीस मीटर पैदल रास्ता तबाह होने के बाद यहां पत्थर चिन कर तैयार खड़ी चढ़ाई वाले रास्ते से यात्रा चलाई जा रही है। मंदिर परिसर को जोड़ने वाला पुल बहने से यमुना आश्रम व हनुमान मंदिर के जोखिम भरे रास्ते से आधा किमी अतिरिक्त घूमकर जाना पड़ रहा। धाम में घाट, महिला गर्म कुंड आदि क्षतिग्रस्त हैं। वहीं यमुनोत्री क्षेत्र में दो दिन से विद्युत आपूर्ति बाधित है। इससे धाम में तैनात पुलिस कर्मियों के वायरलेस सेट और वीडियो मॉनीटरिंग सिस्टम भी ठप पड़ा है।
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कोट:
यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित होने के बाद ही उन्हें धाम तक भेजा जा रहा है। ओजरी डबरकोट स्लाइड जोन से निपटने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इसके अतिरिक्त वैकल्पिक मार्ग को सुविधा जनक बनाया जा रहा है। धाम के पैदल मार्ग, विद्युत, दूरसंचार आदि बुनियादी सुविधाओं को भी जल्द बहाल कर दिया जाएगा।
डा. आशीष चौहान, जिलाधिकारी उत्तरकाशी।
बता दें कि इस यात्रा सीजन में ओजरी डबरकोट स्लाइड जोन सक्रिय रहने से यमुनोत्री हाईवे लगातार बाधित हो रहा है। वहीं 17 जुलाई को यमुनोत्री धाम में तबाही मचने से बुनियादी सुविधाएं भी ध्वस्त हो गई हैं, लेकिन शासन-प्रशासन इन सुविधाओं को दुरुस्त करने के बजाए यात्रा सुचारु करने में लगा है। सुचारु यात्रा के नाम पर श्रद्धालुओं को जोखिम भरे रास्तों से कई-कई किमी पैदल धाम तक पहुंचाया जा रहा है। पवन उनियाल, पुरुषोत्तम उनियाल, अजबीन पंवार, संदीप राणा का कहना है कि यात्रा पर स्थानीय लोगों की आर्थिकी टिकी है, लेकिन जानबूझ कर यात्रियों को जोखिम में डालना गलत है। उन्होंने कहा कि पर्वतों से अनजान लोगों के लिए दुर्गम रास्तों में स्थित उफनते नालों और भूस्खलन को पार करना मुश्किल है। उन्होंने यात्रा शुरू करने से पूर्व सभी व्यवस्थाएं दुरुस्त करने की मांग की है।
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यात्रा मार्ग में मौजूद समस्याएं
पहली बड़ी समस्या ओजरी डबरकोट स्लाइड जोन है। उसके बाद तिर्खली-कुंसाला पैदल मार्ग में चंदोयका खड्ड का उफान और बीच-बीच में भूस्खलन हो रहा है। स्यानाचट्टी और जानकीचट्टी के बीच जंगलचट्टी में हाईवे का करीब 50 मीटर हिस्सा क्षतिग्रस्त है। जानकीचट्टी-यमुनोत्री धाम पैदल मार्ग में राम मंदिर के निकट करीब तीस मीटर पैदल रास्ता तबाह होने के बाद यहां पत्थर चिन कर तैयार खड़ी चढ़ाई वाले रास्ते से यात्रा चलाई जा रही है। मंदिर परिसर को जोड़ने वाला पुल बहने से यमुना आश्रम व हनुमान मंदिर के जोखिम भरे रास्ते से आधा किमी अतिरिक्त घूमकर जाना पड़ रहा। धाम में घाट, महिला गर्म कुंड आदि क्षतिग्रस्त हैं। वहीं यमुनोत्री क्षेत्र में दो दिन से विद्युत आपूर्ति बाधित है। इससे धाम में तैनात पुलिस कर्मियों के वायरलेस सेट और वीडियो मॉनीटरिंग सिस्टम भी ठप पड़ा है।
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कोट:
यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित होने के बाद ही उन्हें धाम तक भेजा जा रहा है। ओजरी डबरकोट स्लाइड जोन से निपटने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इसके अतिरिक्त वैकल्पिक मार्ग को सुविधा जनक बनाया जा रहा है। धाम के पैदल मार्ग, विद्युत, दूरसंचार आदि बुनियादी सुविधाओं को भी जल्द बहाल कर दिया जाएगा।
डा. आशीष चौहान, जिलाधिकारी उत्तरकाशी।