फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Uttarkashi News ›   निराधार नहीं है गोमुख एवं गंगा भागीरथी में जमा मलबे से खतरे की आशंका-COORDINATION

निराधार नहीं है गोमुख एवं गंगा भागीरथी में जमा मलबे से खतरे की आशंका-COORDINATION

Fri, 06 Jul 2018 10:44 PM IST
Updated Fri, 06 Jul 2018 10:44 PM IST
विज्ञापन
निराधार नहीं है गोमुख एवं गंगा भागीरथी में जमा मलबे से खतरे की आशंका-COORDINATION

विज्ञापन
उत्तरकाशी। हाईकोर्ट द्वारा गोमुख में जमा मलबे को हटाने के आदेश से एक बार फिर उच्च हिमालयी क्षेत्र एवं गंगा भागीरथी के प्रवाह पथ में आ रहे बदलाव से निचले आबादी क्षेत्रों में खतरे की चर्चा जोर पकड़ने लगी है। हालांकि अभी कुछ दिन पहले ही आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की टीम गोमुख तक मौका मुआयना कर किसी तरह के खतरे की आशंका को खारिज कर चुकी है।
बता दें कि बीते साल गंगोत्री ग्लेशियर क्षेत्र में नीला ताल टूटने के कारण पानी के साथ आया भारी मलबा ग्लेशियर के मुहाने गंगा के उद्गम गोमुख में पसर गया था, जिससे यहां पानी ठहरने से झील का आकार बना था। हालांकि बाद में धीरे-धीरे मलबा कटने से गंगा का प्रवाह तो सामान्य हो गया, लेकिन अब भी वहां हजारों घनमीटर मलबा जमा होने से नदी का प्रवाह पथ बदल कर दाहिनी ओर हो गया है, जिससे गोमुख से आगे तपोवन क्षेत्र में जाने का रास्ता खत्म हो गया है। इस वजह से गंगोत्री नेशनल पार्क प्रशासन को उच्च हिमालयी ट्रैकर्स एवं पर्वतारोहियों के लिए भोजवासा में गंगा भागीरथी को पार करने के लिए ट्राली लगानी पड़ी।
विज्ञापन

बीते माह ही आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अधिशासी निदेशक पीयूष रौतेला के नेतृत्व में वाडिया संस्थान समेत अन्य संस्थानों के विशेषज्ञों की टीम ने गोमुख का दौरा कर हालात का जायजा लिया था। उन्होंने गोमुख में कोई झील होने तथा वहां जमा मलबे से नीचे आबादी क्षेत्र में किसी तरह का खतरा होने की आशंका को सिरे से खारिज कर दिया था। लेकिन अब हाईकोर्ट ने सरकार को गोमुख की निरंतर मॉनीटरिंग कर हर तीन माह में रिपोर्ट प्रस्तुत करने तथा गोमुख में जमा मलबे को वैज्ञानिक ढंग से निस्तारित करने के आदेश दिए जाने से पूर्व में जताई जा रही आशंकाओं को बल मिला है।
विज्ञापन
विज्ञापन


गंगोत्री धाम के लिए खतरा बना है मलबा
उत्तरकाशी। गोमुख और गंगोत्री के बीच देवगाड़, हम्क्या नाला आदि छोटी नदियों में आए उफान से गंगोत्री धाम के आसपास पसरा भारी मलबा गंगोत्री के लिए खतरा बना हुआ है। पिछले साल मानसून सीजन में गंगा भागीरथी में आए उफान से गंगोत्री धाम में कई तटवर्ती कुटिया क्षतिग्रस्त होने के साथ ही घाटों को भी नुकसान पहुंचा था। गंगोत्री साधु सभा के स्वामी राजाराम एवं गंगोत्री मंदिर समिति के सचिव सुरेश सेमवाल का कहना है कि गंगोत्री धाम और अपस्ट्रीम में जमा मलबे से धाम को खतरा है। उन्होंने शासन-प्रशासन से इस मलबे को हटवा कर गंगोत्री धाम की सुरक्षा के इंतजाम करने की मांग की है।

नदी तल ऊंचा होने से तटवर्ती आबादी को खतरा
उत्तरकाशी। अगस्त 2012 में गंगा भागीरथी, असी गंगा, स्वारीगाड आदि नदियों में आयी बाढ़ के बाद इन नदियों के प्रवाह पथ में भारी मलबा जमा हो गया था। तब तटवर्ती आबादी को खतरा उत्पन्न होने पर तत्कालीन डीएम ने आपदा प्रबंधन में निहित शक्तियों का इस्तेमाल कर एनजीटी के आदेश के उलट इस मलबे को हटाने के आदेश दिए थे। जून 2013 में आई बाढ़ में भी इस मलबे से नदी तल ऊंचा होने के कारण तटवर्ती हिस्सों में भारी तबाही मची थी। अब भी खतरा बरकरार है, लेकिन ईको सेंसिटिव जोन में होने के कारण एनजीटी की बंदिशों के चलते इस मलबे को नहीं हटाया जा सका है।


कोट...........
हाल ही में गोमुख का दौरा कर लौटी आपदा प्रबंधन की टीम ने वहां जमा मलबे से कोई खतरा नहीं होने की जानकारी दी है। फिर भी एक बार और विशेषज्ञों से इसकी पड़ताल कराई जाएगी। इसके लिए शासन को लिखा गया है। फिलहाल ईको सेंसिटिव जोन की बंदिश के चलते इस हिस्से में मलबा हटाने के लिए एनजीटी की अनुमति जरूरी है।
डा.आशीष चौहान, डीएम उत्तरकाशी।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed