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संदिग्ध वाहन चैकिंग विवाद को लेकर डीएफओ ने तलब की रिपोर्ट
Updated Wed, 04 Jul 2018 10:48 PM IST
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बड़कोट (उत्तरकाशी)। संदिग्ध वाहन की चेकिंग को लेकर वन कर्मियों एवं पुलिस के बीच हुए विवाद को लेकर अब अपर यमुना वन प्रभाग के डीएफओ ने भी रिपोर्ट तलब की है। उधर, मामले की जांच कर रहे पुलिस उपाधीक्षक ने विवाद में शामिल दो पुलिस व एक वनकर्मी के बयान दर्ज किए।
बता दें कि बीते 26 जून की देर रात हनुमानचट्टी में एक संदिग्ध वाहन की चेकिंग को लेेकर वनकर्मियों और पुलिस के बीच विवाद हुआ था। विवाद के बीच वाहन चालक फरार हो गया था। वन कर्मियों ने वाहन में तस्करी की सूचना मिलने और पुलिस की मिलीभगत से वाहन को भगा देने का आरोप लगाया था। एसपी ने मामले की जांच के आदेश देकर पुलिस उपाधीक्षक जीएल कोहली को जांच अधिकारी नियुक्त किया था। मामले पर संज्ञान लेते हुए अपर यमुना वन प्रभाग के डीएफओ जेपी रतूड़ी ने यमुनोत्री के रेंजर से रिपोर्ट तलब की है। उन्होंने कहा कि पुलिस की तरह वन कर्मियों को भी अपने क्षेत्र में संदिग्ध वाहन की जांच का अधिकार है। यदि उन्हें चेकिंग से रोका गया, तो यह गंभीर मामला है। भविष्य में इस तरह का विवाद न हो इसके लिए पुलिस के अधिकारियों के साथ वार्ता की जाएगी।
इधर, पुलिस उपाधीक्षक कोहली ने घटना के वक्त मौजूद दो पुलिसकर्मियों को मुख्यालय संबद्ध करने के बाद बुधवार को उनके बयान दर्ज किए। साथ ही एक वनकर्मी का बयान भी लिया गया। हनुमानचट्टी चौकी प्रभारी ओजरी डबरकोट भूस्खलन क्षेत्र में तैनात होने और वन दरोगा प्रशिक्षण में होने के कारण उनके बयान दर्ज नहीं हो पाए। फरार हुए संदिग्ध वाहन का पता लगाने के लिए स्यानाचट्टी चैक पोस्ट से रजिस्टर मंगाया गया है। उन्होंने कहा कि मामले की जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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बता दें कि बीते 26 जून की देर रात हनुमानचट्टी में एक संदिग्ध वाहन की चेकिंग को लेेकर वनकर्मियों और पुलिस के बीच विवाद हुआ था। विवाद के बीच वाहन चालक फरार हो गया था। वन कर्मियों ने वाहन में तस्करी की सूचना मिलने और पुलिस की मिलीभगत से वाहन को भगा देने का आरोप लगाया था। एसपी ने मामले की जांच के आदेश देकर पुलिस उपाधीक्षक जीएल कोहली को जांच अधिकारी नियुक्त किया था। मामले पर संज्ञान लेते हुए अपर यमुना वन प्रभाग के डीएफओ जेपी रतूड़ी ने यमुनोत्री के रेंजर से रिपोर्ट तलब की है। उन्होंने कहा कि पुलिस की तरह वन कर्मियों को भी अपने क्षेत्र में संदिग्ध वाहन की जांच का अधिकार है। यदि उन्हें चेकिंग से रोका गया, तो यह गंभीर मामला है। भविष्य में इस तरह का विवाद न हो इसके लिए पुलिस के अधिकारियों के साथ वार्ता की जाएगी।
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इधर, पुलिस उपाधीक्षक कोहली ने घटना के वक्त मौजूद दो पुलिसकर्मियों को मुख्यालय संबद्ध करने के बाद बुधवार को उनके बयान दर्ज किए। साथ ही एक वनकर्मी का बयान भी लिया गया। हनुमानचट्टी चौकी प्रभारी ओजरी डबरकोट भूस्खलन क्षेत्र में तैनात होने और वन दरोगा प्रशिक्षण में होने के कारण उनके बयान दर्ज नहीं हो पाए। फरार हुए संदिग्ध वाहन का पता लगाने के लिए स्यानाचट्टी चैक पोस्ट से रजिस्टर मंगाया गया है। उन्होंने कहा कि मामले की जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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