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मानसून सीजन में डरा रहे हैं जिले की सड़कों पर मौजूद 64 डेंजर जोन
Updated Sat, 30 Jun 2018 10:56 PM IST
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उत्तरकाशी। बरसात शुरू होने के साथ ही यमुनोत्री एवं गंगोत्री हाईवे समेत जिले के विभिन्न मोटर मार्गों पर डेंजर जोन ने वाहनों के पहिये थामने शुरू कर दिए हैं। मुश्किलों से निपटने के लिए आपदा प्रबंधन विभाग ने यमुनोत्री एवं गंगोत्री हाईवे समेत जिले के विभिन्न मोटर मार्गों पर 64 डेंजर जोन चिह्नित किए गए हैं।
गंगोत्री हाईवे पर 30, यमुनोत्री हाईवे पर 13, धरासू-बड़कोट मार्ग पर चार, पुरोला-सांकरी एवं मोरी-त्यूनी मार्ग पर पांच डेंजर जोन हैं। इनमें से गंगोत्री हाईवे पर नालूपानी, रतूड़ीसेरा, मनेरी, भाटुकासौड़, औंगी, स्वारीगाड एवं हेलगूगाड़ व यमुनोत्री हाईवे पर ओरछा बैंड, दोबाटा, ओजरी डबरकोट, सिलाई बैंड आदि 12 अत्यधिक संवेदनशील हैं। यमुनोत्री हाईवे पर ओजरी डबरकोट स्लिप जोन का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि हल्की बारिश में ही यहां पहाड़ी से बोल्डर आने से यातायात अवरुद्ध हो जाता है। खुले मौसम में भी यहां से जोखिम के साथ वाहनों की आवाजाही हो रही है।
90 लाख के वैकल्पिक मार्ग से नहीं बना वाहनों के लिए
बड़कोट। बीते साल ओजरी डबरकोट स्लिप जोन ने एक महीने तक यमुनोत्री धाम की यात्रा बाधित रखी। तब प्रशासन ने करीब 90 लाख से वैकल्पिक रास्ता तैयार किया था, लेकिन यह रास्ता वाहनों की आवाजाही लायक नहीं बन पाया है। ओजरी डबरकोट भूस्खलन के स्थायी उपचार की योजना अभी तक फाइलों में ही है। ऐसे में अब लोग तिर्खली, कुंसाला होते हुए चार किमी पैदल दूरी तय कर आवाजाही करने को मजबूर हैं। पुरोहित पुरुषोत्तम उनियाल का कहना है कि यदि बरसात में भी यात्रा मार्ग सुचारु रहे, तो देश-विदेश से तीर्थयात्री यहां आएंगे।
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कोट..
बीते सालों की आपदाओं में जिले की सड़कों पर कई डेंजर जोन विकसित हो गए हैं। इनके स्थायी उपचार लिए प्रस्ताव तैयार किए जा रहे हैं। फिलहाल संबंधित विभागों को डेंजर जोन वाले हिस्सों में मशीनें तैनात रखकर सड़क अवरुद्ध होते ही शीघ्र मलबा हटाकर यातायात बहाल करने के निर्देश दिए गए हैं।
डा. आशीष चौहान, डीएम उत्तरकाशी।
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गंगोत्री हाईवे पर 30, यमुनोत्री हाईवे पर 13, धरासू-बड़कोट मार्ग पर चार, पुरोला-सांकरी एवं मोरी-त्यूनी मार्ग पर पांच डेंजर जोन हैं। इनमें से गंगोत्री हाईवे पर नालूपानी, रतूड़ीसेरा, मनेरी, भाटुकासौड़, औंगी, स्वारीगाड एवं हेलगूगाड़ व यमुनोत्री हाईवे पर ओरछा बैंड, दोबाटा, ओजरी डबरकोट, सिलाई बैंड आदि 12 अत्यधिक संवेदनशील हैं। यमुनोत्री हाईवे पर ओजरी डबरकोट स्लिप जोन का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि हल्की बारिश में ही यहां पहाड़ी से बोल्डर आने से यातायात अवरुद्ध हो जाता है। खुले मौसम में भी यहां से जोखिम के साथ वाहनों की आवाजाही हो रही है।
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90 लाख के वैकल्पिक मार्ग से नहीं बना वाहनों के लिए
बड़कोट। बीते साल ओजरी डबरकोट स्लिप जोन ने एक महीने तक यमुनोत्री धाम की यात्रा बाधित रखी। तब प्रशासन ने करीब 90 लाख से वैकल्पिक रास्ता तैयार किया था, लेकिन यह रास्ता वाहनों की आवाजाही लायक नहीं बन पाया है। ओजरी डबरकोट भूस्खलन के स्थायी उपचार की योजना अभी तक फाइलों में ही है। ऐसे में अब लोग तिर्खली, कुंसाला होते हुए चार किमी पैदल दूरी तय कर आवाजाही करने को मजबूर हैं। पुरोहित पुरुषोत्तम उनियाल का कहना है कि यदि बरसात में भी यात्रा मार्ग सुचारु रहे, तो देश-विदेश से तीर्थयात्री यहां आएंगे।
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बीते सालों की आपदाओं में जिले की सड़कों पर कई डेंजर जोन विकसित हो गए हैं। इनके स्थायी उपचार लिए प्रस्ताव तैयार किए जा रहे हैं। फिलहाल संबंधित विभागों को डेंजर जोन वाले हिस्सों में मशीनें तैनात रखकर सड़क अवरुद्ध होते ही शीघ्र मलबा हटाकर यातायात बहाल करने के निर्देश दिए गए हैं।
डा. आशीष चौहान, डीएम उत्तरकाशी।