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धूं-धूं कर जल रहे जिले के जंगल, वातावरण में पसरी धुंध
Updated Tue, 22 May 2018 10:52 PM IST
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उत्तरकाशी। इस बार सर्दियों में अपेक्षित बारिश और बर्फबारी नहीं होने से अब गर्मी बढ़ते ही जंगल धधकने लगे हैं। जिले के विभिन्न हिस्सों में बीते एक हफ्ते से जंगल सुलग रहे हैं। चालू फायर सीजन में अभी तक करीब 15 हेक्टेयर वन क्षेत्र स्वाह हो चुका है।
मुखेम रेंज के मीरा कोट, पोखरी, अठाली, दिलसौड़, चामकोट क्षेत्र के जंगल में लगी आग से वन संपदा को भारी नुकसान पहुंचा हैं। डुंडा के माजफ, डांडा, हिटाणु, पुजारगांव, धरासु के क्वाटा, बमंटी, कोट, मुखेम रेंज के बौंगा, भैलुड़ और बड़कोट के डंडाल गांव क्षेत्र के जंगलों में लगी आग अभी पूरी तरह काबू में नहीं आ पायी है। डीएफओ संदीप कुमार ने बताया कि वन कर्मियों की टीमें जंगलों में लगी आग पर काबू पाने में जुटी हैं। इसमें एसडीआरएफ, राजस्व एवं निम का भी सहयोग लिया जा रहा है। जमीन में नमी नहीं होने की वजह से आग लगने की घटनाएं बढ़ रही हैं।
दावानल के कारण और निपटने की तैयारियां
उत्तरकाशी। जिले में कुल 6.95 लाख हेक्टेयर वन क्षेत्र में से 76 हजार हेक्टेयर पर चीड़ के जंगल पसरे हुए हैं। जंगलों में आग लगने पर चीड़ की पत्तियां (पिरूल) आग में घी का काम करती है। जंगलों को आग से बचाने के लिए वन विभाग हर साल फायर सीजन से पहले कंट्रोल बर्निंग कर पिरूल जलाने का काम करता है, लेकिन अब भी जंगलों में भारी मात्रा में पिरूल बिखरा पड़ा है जो दावानल को भड़काने का काम कर रहा है। फायर सीजन से पहले गांव-गांव में वन विभाग द्वारा की जाने वाली वन अग्नि सुरक्षा गोष्ठियों का भी कोई असर देखने को नहीं मिल रहा है। डीएफओ के अनुसार दावानल से निपटने के लिए जिले में तीन मास्टर स्टेशन, 136 क्रू स्टेशन और 150 बेस स्टेशन स्थापित कर इनमें 1131 कर्मचारी तैनात किए गए हैं।
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हर साल स्वाह होते हैं जंगल
उत्तरकाशी। वर्ष 2016 में जिले के जंगलों में आग लगने की 108 घटनाएं हुईं, जिनमें कुल 172.30 हेक्टेयर वन क्षेत्र तबाह हुआ था। तब भी सर्दियों में अपेक्षित बारिश और बर्फबारी नहीं होने का दुष्परिणाम जंगलों की आग के रूप में सामने आया था, जबकि बीते साल जिले में कुल दो हेक्टेयर जंगल ही जले थे। इस बार अभी तक करीब 15 हेक्टेयर जंगल जल चुके हैं। जल्द ही मौसम की मेहरबानी नहीं हुई तो यह आंकड़ा और बढ़ना तय है।
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मुखेम रेंज के मीरा कोट, पोखरी, अठाली, दिलसौड़, चामकोट क्षेत्र के जंगल में लगी आग से वन संपदा को भारी नुकसान पहुंचा हैं। डुंडा के माजफ, डांडा, हिटाणु, पुजारगांव, धरासु के क्वाटा, बमंटी, कोट, मुखेम रेंज के बौंगा, भैलुड़ और बड़कोट के डंडाल गांव क्षेत्र के जंगलों में लगी आग अभी पूरी तरह काबू में नहीं आ पायी है। डीएफओ संदीप कुमार ने बताया कि वन कर्मियों की टीमें जंगलों में लगी आग पर काबू पाने में जुटी हैं। इसमें एसडीआरएफ, राजस्व एवं निम का भी सहयोग लिया जा रहा है। जमीन में नमी नहीं होने की वजह से आग लगने की घटनाएं बढ़ रही हैं।
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दावानल के कारण और निपटने की तैयारियां
उत्तरकाशी। जिले में कुल 6.95 लाख हेक्टेयर वन क्षेत्र में से 76 हजार हेक्टेयर पर चीड़ के जंगल पसरे हुए हैं। जंगलों में आग लगने पर चीड़ की पत्तियां (पिरूल) आग में घी का काम करती है। जंगलों को आग से बचाने के लिए वन विभाग हर साल फायर सीजन से पहले कंट्रोल बर्निंग कर पिरूल जलाने का काम करता है, लेकिन अब भी जंगलों में भारी मात्रा में पिरूल बिखरा पड़ा है जो दावानल को भड़काने का काम कर रहा है। फायर सीजन से पहले गांव-गांव में वन विभाग द्वारा की जाने वाली वन अग्नि सुरक्षा गोष्ठियों का भी कोई असर देखने को नहीं मिल रहा है। डीएफओ के अनुसार दावानल से निपटने के लिए जिले में तीन मास्टर स्टेशन, 136 क्रू स्टेशन और 150 बेस स्टेशन स्थापित कर इनमें 1131 कर्मचारी तैनात किए गए हैं।
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हर साल स्वाह होते हैं जंगल
उत्तरकाशी। वर्ष 2016 में जिले के जंगलों में आग लगने की 108 घटनाएं हुईं, जिनमें कुल 172.30 हेक्टेयर वन क्षेत्र तबाह हुआ था। तब भी सर्दियों में अपेक्षित बारिश और बर्फबारी नहीं होने का दुष्परिणाम जंगलों की आग के रूप में सामने आया था, जबकि बीते साल जिले में कुल दो हेक्टेयर जंगल ही जले थे। इस बार अभी तक करीब 15 हेक्टेयर जंगल जल चुके हैं। जल्द ही मौसम की मेहरबानी नहीं हुई तो यह आंकड़ा और बढ़ना तय है।