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अधूरे वरुणावत ट्रीटमेंट के चलते उतरकाशी नगर पर मंडरा रहा खतरा
Updated Sat, 09 Dec 2017 10:25 PM IST
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उत्तरकाशी। कई घरों, बहुमंजिले होटलों व सरकारी दफ्तरों को जमींदोज करने वाले वरुणावत भूस्खलन के उपचार पर 103.34 करोड़ खर्च होने के 14 साल बाद भी शहर पर मंडराता खतरा अभी टला नहीं है। अधूरे ट्रीटमेंट के कारण 70 डिग्री ढाल वाली पहाड़ी से बरसात के दौरान शहर की ओर पत्थरों के लुढ़कने का सिलसिला जारी है।
वरुणावत के शूट ट्रीटमेंट के लिए अभी वन भूमि हस्तांतरण की कार्रवाई नहीं हो पाई है। ऐसे में प्रशासन 282.53 करोड़ के भारी भरकम प्रधानमंत्री पैकेज की अवशेष धनराशि खर्च नहीं कर पा रहा है। तांबाखानी, पेट्रोलपंप, इंदिरा कालोनी, बस अड्डा तथा मस्जिद मुहल्ले के ऊपर की ओर वरुणावत पहाड़ी का ट्रीटमेंट कार्य अभी अधूरा है। गंगोत्री हाईवे पर तांबाखानी सुरंग में भी डीएम ने जांच करा के ज्ञानसू की ओर अधूरी ओवर्ट लाइनिंग तथा कई बाहरी हिस्से में कटाव होने आदि कई खमियां पाई हैं। सुरंग के बजाय बाहरी हिस्से से ज्ञानसू व बाजार के बीच लोग पहाड़ी से गिरने वाले पत्थरों से बच कर आवाजाही करने को मजबूर हैं।
वन अनुसंधान संस्थान, टीएचडीसी, वन विभाग सहित कई एजेंसियों ने वरुणावत ट्रीटमेंट में भागीदारी निभाई, लेकिन पहाड़ी पर न तो वानस्पतिक सुरक्षा घेरा बनाया और न ही शूट का ट्रीटमेंट किया।
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स्थाई समाधान नहीं है यह ट्रीटमेंट
लोकायुक्त के पूर्व तकनीकी सलाहकार एवं वरुणावत ट्रीटमेंट में हुई गड़बड़ी की जांच कर चुके इंजीनियर एएस कनेरी ने रिपोर्ट में यह स्पष्ट किया था कि कंक्रीटिंग स्थाई हल नहीं है। इसकी अधिकतम उम्र 40 वर्ष होगी। भूस्खलन के स्थाई हल के लिए वानस्पतिक उपचार व सरफेस स्लाइडिग रोकने के लिए नाइलोन नेटिंग जरूरी है।
कोट...
तांबाखानी शूट समेत वरुणावत ट्रीटमेंट के द्वितीय फेज के कार्य अभी होने हैं। लेकिन वन भूमि हस्तांतरण की कार्रवाई न होने के कारण अभी ये कार्य शुरू नहीं हो पा रहे हैं।
पीएल शाह, एडीएम उत्तरकाशी।
कोट...
वरुणावत वाला क्षेत्र ईको सेंसिटिव जोन के अंतर्गत आता है, लेकिन ट्रीटमेंट कार्य के महत्व को देखते हुए इसकी संस्तुति भेजने पर विचार किया जा रहा है।
संदीप कुमार, डीएफओ उत्तरकाशी।
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वरुणावत के शूट ट्रीटमेंट के लिए अभी वन भूमि हस्तांतरण की कार्रवाई नहीं हो पाई है। ऐसे में प्रशासन 282.53 करोड़ के भारी भरकम प्रधानमंत्री पैकेज की अवशेष धनराशि खर्च नहीं कर पा रहा है। तांबाखानी, पेट्रोलपंप, इंदिरा कालोनी, बस अड्डा तथा मस्जिद मुहल्ले के ऊपर की ओर वरुणावत पहाड़ी का ट्रीटमेंट कार्य अभी अधूरा है। गंगोत्री हाईवे पर तांबाखानी सुरंग में भी डीएम ने जांच करा के ज्ञानसू की ओर अधूरी ओवर्ट लाइनिंग तथा कई बाहरी हिस्से में कटाव होने आदि कई खमियां पाई हैं। सुरंग के बजाय बाहरी हिस्से से ज्ञानसू व बाजार के बीच लोग पहाड़ी से गिरने वाले पत्थरों से बच कर आवाजाही करने को मजबूर हैं।
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वन अनुसंधान संस्थान, टीएचडीसी, वन विभाग सहित कई एजेंसियों ने वरुणावत ट्रीटमेंट में भागीदारी निभाई, लेकिन पहाड़ी पर न तो वानस्पतिक सुरक्षा घेरा बनाया और न ही शूट का ट्रीटमेंट किया।
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स्थाई समाधान नहीं है यह ट्रीटमेंट
लोकायुक्त के पूर्व तकनीकी सलाहकार एवं वरुणावत ट्रीटमेंट में हुई गड़बड़ी की जांच कर चुके इंजीनियर एएस कनेरी ने रिपोर्ट में यह स्पष्ट किया था कि कंक्रीटिंग स्थाई हल नहीं है। इसकी अधिकतम उम्र 40 वर्ष होगी। भूस्खलन के स्थाई हल के लिए वानस्पतिक उपचार व सरफेस स्लाइडिग रोकने के लिए नाइलोन नेटिंग जरूरी है।
कोट...
तांबाखानी शूट समेत वरुणावत ट्रीटमेंट के द्वितीय फेज के कार्य अभी होने हैं। लेकिन वन भूमि हस्तांतरण की कार्रवाई न होने के कारण अभी ये कार्य शुरू नहीं हो पा रहे हैं।
पीएल शाह, एडीएम उत्तरकाशी।
कोट...
वरुणावत वाला क्षेत्र ईको सेंसिटिव जोन के अंतर्गत आता है, लेकिन ट्रीटमेंट कार्य के महत्व को देखते हुए इसकी संस्तुति भेजने पर विचार किया जा रहा है।
संदीप कुमार, डीएफओ उत्तरकाशी।