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अज्ञात बिमारी से ग्रस्त ब्लू शीप की तलाश में जाएगा निम व वन विभाग का दल
Updated Fri, 01 Dec 2017 10:29 PM IST
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उत्तरकाशी। गंगोत्री नेशनल पार्क में भरल (ब्लू शीप) के अज्ञात बीमारी की चपेट में आने की जानकारी जुटाने के लिए नेहरू पर्वतारोहण संस्थान व वन विभाग का एक दल घटना स्थल के लिए रवाना होगा। पार्क प्रशासन की ओर से दल को स्थान में जाकर जानकारी जुटाने व बीमार भेड़ों को खोजने के आदेश दिए गए हैं। वहीं, मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक डीबीएस खाती की ओर से संबंधित मामले में इंडियन वेटरनरी रिसर्च इंस्टीट्यूट (आईवीआरआई) बरेली को पत्र लिखकर रोग की गहन जांच करने का आग्रह किया गया है, जिसके लिए स्नो लेपर्ड प्रोजेक्ट के तहत धनराशि प्रदान की जाएगी।
कुछ माह पूर्व बीएसएफ के असिस्टेंट कमांडेंट लवराज सिंह धर्मशक्तू के नेतृत्व में पर्वतारोहण अभियान में गए दल को गंगोत्री पार्क के केदार ताल क्षेत्र में कुछ बीमार भरल दिखीं थी, जो किसी अज्ञात बीमारी के कारण अंधी हो गई थी। इनमें से कुछ भरल की आंखें बाहर निकल आई थी। दो भरल मरे मिले थे। मामले की जानकारी मिलने पर पार्क प्रशासन की ओर से भरल के एक बीमार बच्चे को इलाज के लिए लाया गया था, लेकिन इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। इसके बाद विभाग की ओर से आईवीआरआई को बीमारी की जांच के लिए शव के नमूने भेजे गए थे। पार्क के उप निदेशक श्रवण कुमार के अनुसार आईवीआरआई को भेजे नमूनों में फेफड़ों में वायरस की बात सामने आई है। उन्होंने कहा कि भारतीय वन्यजीव संस्थान के वैज्ञानिकों के दल भी लंबे समय से पार्क के विभिन्न क्षेत्रों में शोध कर रहे हैं। लेकिन उनकी तरफ से भी इस तरह की किसी घटना की जानकारी नहीं मिली है।
आमतौर पर वन्य जीवों को पालतू पशुओं से बीमारी फैलने का डर होता है, लेकिन केदार ताल क्षेत्र में इस तरह का हस्तक्षेप भी न के बराबर है। ऐसे में हो सकता है कि कुछ जीवों को किसी चोट या इंफेक्शन की वजह से यह बीमारी हुई हो, जिसकी गहन जांच के लिए आईवीआरआई से मदद मांगी गई है। निम व वन कर्मचारियों के एक दल को बीमार भेड़ों को ढूंढने व अधिक जानकारी जुटाने के लिए संबंधित स्थल पर भेजा जा रहा है।
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कुछ माह पूर्व बीएसएफ के असिस्टेंट कमांडेंट लवराज सिंह धर्मशक्तू के नेतृत्व में पर्वतारोहण अभियान में गए दल को गंगोत्री पार्क के केदार ताल क्षेत्र में कुछ बीमार भरल दिखीं थी, जो किसी अज्ञात बीमारी के कारण अंधी हो गई थी। इनमें से कुछ भरल की आंखें बाहर निकल आई थी। दो भरल मरे मिले थे। मामले की जानकारी मिलने पर पार्क प्रशासन की ओर से भरल के एक बीमार बच्चे को इलाज के लिए लाया गया था, लेकिन इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। इसके बाद विभाग की ओर से आईवीआरआई को बीमारी की जांच के लिए शव के नमूने भेजे गए थे। पार्क के उप निदेशक श्रवण कुमार के अनुसार आईवीआरआई को भेजे नमूनों में फेफड़ों में वायरस की बात सामने आई है। उन्होंने कहा कि भारतीय वन्यजीव संस्थान के वैज्ञानिकों के दल भी लंबे समय से पार्क के विभिन्न क्षेत्रों में शोध कर रहे हैं। लेकिन उनकी तरफ से भी इस तरह की किसी घटना की जानकारी नहीं मिली है।
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आमतौर पर वन्य जीवों को पालतू पशुओं से बीमारी फैलने का डर होता है, लेकिन केदार ताल क्षेत्र में इस तरह का हस्तक्षेप भी न के बराबर है। ऐसे में हो सकता है कि कुछ जीवों को किसी चोट या इंफेक्शन की वजह से यह बीमारी हुई हो, जिसकी गहन जांच के लिए आईवीआरआई से मदद मांगी गई है। निम व वन कर्मचारियों के एक दल को बीमार भेड़ों को ढूंढने व अधिक जानकारी जुटाने के लिए संबंधित स्थल पर भेजा जा रहा है।
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