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बारिश न होने से काश्तकारों पर छाए खतरे के बादल
Updated Thu, 30 Nov 2017 09:34 PM IST
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नौगांव। मौसम में आए बदलाव ने रर्वाइं घाटी के काश्तकारों के सामने संकट खड़ा कर दिया है। बीते तीन माह से बारिश नहीं होने से काश्तकार अभी तक नई फसल की बुआई नहीं कर पाए हैं। साल का यह वक्त गेहूं, मटर, सरसों, मसूर आदि फसलों की बुआई के लिए उपयुक्त माना जाता है, लेकिन बारिश नहीं होने से किसानों के खेत बंजर पड़े हैं।
काश्तकार गजेंद्र नौटियाल, चंदन सिंह रावत आदि का कहना है कि फसल की बुआई का सही समय निकल चुका है। मौसम में आए बदलाव से खेतों में कीड़ों तथा चूहों का प्रकोप बढ़ जाता है। जिससे बारिश आने के बाद यदि बुआई हो भी जाती है, तो भी अच्छी पैदावार नहीं हो पाएगी। वहीं, रवाईं घाटी फल एवं सब्जी उत्पादक एसोसिएशन के अध्यक्ष जगमोहन चंद का कहना है कि क्षेत्र की अधिकतर खेती बारिश पर ही निर्भर है, लेकिन बारिश न होने से खेत असिंचित पड़े हैं।
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काश्तकार गजेंद्र नौटियाल, चंदन सिंह रावत आदि का कहना है कि फसल की बुआई का सही समय निकल चुका है। मौसम में आए बदलाव से खेतों में कीड़ों तथा चूहों का प्रकोप बढ़ जाता है। जिससे बारिश आने के बाद यदि बुआई हो भी जाती है, तो भी अच्छी पैदावार नहीं हो पाएगी। वहीं, रवाईं घाटी फल एवं सब्जी उत्पादक एसोसिएशन के अध्यक्ष जगमोहन चंद का कहना है कि क्षेत्र की अधिकतर खेती बारिश पर ही निर्भर है, लेकिन बारिश न होने से खेत असिंचित पड़े हैं।
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