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गंगोत्री पार्क में दिखा जंगली बिल्ली प्रजाति का दुर्लभ लिंक्स
Updated Thu, 30 Nov 2017 09:33 PM IST
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उत्तरकाशी। गंगोत्री नेशनल पार्क में दुर्लभ जंगली बिल्ली ‘लिंक्स’ दिखी है। इस दुर्लभ जीव की तस्वीरें वन विभाग और भारतीय वन्यजीव संस्थान (डब्लूआईआई) की ओर से नेलांग घाटी में लगाए गए कैमरों में कैद हुई हैं।
डब्लूआईआई के डॉ. एस. सत्या कुमार के अनुसार तिब्बत, साइबेरिया और यूरोप में पाए जाने वाले इस जीव को उत्तराखंड में पहली बार देखा गया है। लिंक्स की कई उप प्रजातियों में से यूरेशियाई लिंक्स आकार में सबसे बड़ा होता है। मध्य आकार की इस जंगली बिल्ली की लंबाई 80-130 सेमी, ऊंचाई 60-75 सेमी तथा वजन 18 से 30 किलो होता है। स्लेटी और लाल रंग की इसकी खाल में काले चित्ते होते हैं।
गंगोत्री पार्क के उप निदेशक श्रवण कुमार कहते हैं कि अरगली भेड़ के बाद लिंक्स के मिलने से साबित होता है कि पार्क का पर्यावरण तंत्र वन्य जीवों के लिए बेहतर माहौल उपलब्ध करा रहा है।
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लिंक्स की खास बातें
यूरेशियाई लिंक्स का वैज्ञानिक नाम-लिंक्स लिंक्स है। अपनी प्रजाति में सबसे बड़े आकार के इस जीव की पूंछ छोटी और ऊंचे कानों के छोर पर बालों का गुच्छा होता है। इनके बड़े और गद्देदार पंजे बर्फ में चलने में मदद करते हैं। अकेले रहने वाला यह जीव जंगलों में रहस्यमय जीवन बिताता है, जिसे कैमरा ट्रैप और पंजों के निशान की मदद से ही ढूंढा जा सकता है। हिरन और छोटे जीवों का शिकार करने वाले इस जीव को अवैध शिकार, वास स्थल तथा भोजन की कमी के चलते काफी नुकसान पहुंचा है।
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डब्लूआईआई के डॉ. एस. सत्या कुमार के अनुसार तिब्बत, साइबेरिया और यूरोप में पाए जाने वाले इस जीव को उत्तराखंड में पहली बार देखा गया है। लिंक्स की कई उप प्रजातियों में से यूरेशियाई लिंक्स आकार में सबसे बड़ा होता है। मध्य आकार की इस जंगली बिल्ली की लंबाई 80-130 सेमी, ऊंचाई 60-75 सेमी तथा वजन 18 से 30 किलो होता है। स्लेटी और लाल रंग की इसकी खाल में काले चित्ते होते हैं।
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गंगोत्री पार्क के उप निदेशक श्रवण कुमार कहते हैं कि अरगली भेड़ के बाद लिंक्स के मिलने से साबित होता है कि पार्क का पर्यावरण तंत्र वन्य जीवों के लिए बेहतर माहौल उपलब्ध करा रहा है।
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लिंक्स की खास बातें
यूरेशियाई लिंक्स का वैज्ञानिक नाम-लिंक्स लिंक्स है। अपनी प्रजाति में सबसे बड़े आकार के इस जीव की पूंछ छोटी और ऊंचे कानों के छोर पर बालों का गुच्छा होता है। इनके बड़े और गद्देदार पंजे बर्फ में चलने में मदद करते हैं। अकेले रहने वाला यह जीव जंगलों में रहस्यमय जीवन बिताता है, जिसे कैमरा ट्रैप और पंजों के निशान की मदद से ही ढूंढा जा सकता है। हिरन और छोटे जीवों का शिकार करने वाले इस जीव को अवैध शिकार, वास स्थल तथा भोजन की कमी के चलते काफी नुकसान पहुंचा है।