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साढ़े चार साल बाद भी नहीं हुआ 15 महीनों में बनने वाले पुल का निर्माण
Updated Tue, 28 Nov 2017 10:30 PM IST
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चिन्यालीसौड़। टिहरी बांध की झील के विस्तार से कटे दिचलि-गमरी क्षेत्र के 40 गांव आज भी देवीसौड़ पुल के बनने का इंतजार कर रहे हैं। पुल को विभागीय एग्रीमेंट के अनुसार 15 माह में पूरा होना था, लेकिन करीब साढ़े चार साल बीतने के बाद भी समस्या जस की तस बनी है।
प्रति वर्ष अगस्त से दिसंबर तक झील का जलस्तर 815 मीटर बढ़ने से दिचलि-गमरी क्षेत्र को मुख्यालय से जोड़ने वाला एकमात्र देवीसौड़ पुल डूब जाता है। इस दौरान विभाग द्वारा लगाई गई मोटर बोट ही ग्रामीणों की आवाजाही का एक मात्र साधन रह जाती है। हालांकि लंबे आंदोलन के बाद वर्ष 2011 में ऊर्जा मंत्रालय व राज्य सरकार ने 37.62 करोड़ रुपये की धनराशि जारी कर पुनर्वास टिहरी को नया पुल बनाने का कार्य सौंपा था। पुनर्वास विभाग द्वारा हिल कंस्ट्रक्शन कंपनी को 15 माह के भीतर 162 मीटर लंबे आर्च ब्रिज बनाने का ठेका दिया था, जिसके तहत 28 जून 2013 से कार्य शुरू कर 27 सितंबर 2014 तक इसे पूरा करना था। लेकिन तय समय पर कार्य पूरा न होने पर विभाग द्वारा 31 जनवरी 2018 तक समय सीमा बढ़ा दी गई थी। इसके बावजूद मुख्य पुल के आर्च का काम आधा ही हुआ है। ऐसे में तय समय के अंदर पुल का निर्माण हो पाना लगभग नामुमकिन ही है। यमुनोत्री विधायक केदार सिंह रावत का कहना है कि पुल निर्माण के लिए कार्यदायी संस्था तथा पुनर्वास के अधिकारियों के साथ बातचीत हो रही है। निर्माण में आ रही धन और अन्य तकनीकी दिक्कतें दूर करने का प्रयास किया जाएगा।
कोट:
पुल के एबेटमेंट में पानी आने तथा माल ढुलाई की वजह से कार्य में देरी हुई है। विभाग द्वारा बीते चार माह से एक करोड़ बीस लाख रुपये का भुगतान नहीं किया गया है। - जगमोहन, हिल कंस्ट्रक्शन कंपनी के प्रोजेक्ट मैनेजर।
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कोट:
वर्तमान में पुल निर्माण लागत 49.75 करोड़ रुपये है, जिसमें से 39.95 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है। राज्य और केंद्र सरकार से साढ़े 11 करोड़ रुपये मिलने बाकी हैं। सभी दिक्कतों को दूर कर निर्माण कार्य जल्द पूरा किया जाएगा।
- दीक्षांत, पुनर्वास विभाग के अधिशासी अभियंता।
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प्रति वर्ष अगस्त से दिसंबर तक झील का जलस्तर 815 मीटर बढ़ने से दिचलि-गमरी क्षेत्र को मुख्यालय से जोड़ने वाला एकमात्र देवीसौड़ पुल डूब जाता है। इस दौरान विभाग द्वारा लगाई गई मोटर बोट ही ग्रामीणों की आवाजाही का एक मात्र साधन रह जाती है। हालांकि लंबे आंदोलन के बाद वर्ष 2011 में ऊर्जा मंत्रालय व राज्य सरकार ने 37.62 करोड़ रुपये की धनराशि जारी कर पुनर्वास टिहरी को नया पुल बनाने का कार्य सौंपा था। पुनर्वास विभाग द्वारा हिल कंस्ट्रक्शन कंपनी को 15 माह के भीतर 162 मीटर लंबे आर्च ब्रिज बनाने का ठेका दिया था, जिसके तहत 28 जून 2013 से कार्य शुरू कर 27 सितंबर 2014 तक इसे पूरा करना था। लेकिन तय समय पर कार्य पूरा न होने पर विभाग द्वारा 31 जनवरी 2018 तक समय सीमा बढ़ा दी गई थी। इसके बावजूद मुख्य पुल के आर्च का काम आधा ही हुआ है। ऐसे में तय समय के अंदर पुल का निर्माण हो पाना लगभग नामुमकिन ही है। यमुनोत्री विधायक केदार सिंह रावत का कहना है कि पुल निर्माण के लिए कार्यदायी संस्था तथा पुनर्वास के अधिकारियों के साथ बातचीत हो रही है। निर्माण में आ रही धन और अन्य तकनीकी दिक्कतें दूर करने का प्रयास किया जाएगा।
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कोट:
पुल के एबेटमेंट में पानी आने तथा माल ढुलाई की वजह से कार्य में देरी हुई है। विभाग द्वारा बीते चार माह से एक करोड़ बीस लाख रुपये का भुगतान नहीं किया गया है। - जगमोहन, हिल कंस्ट्रक्शन कंपनी के प्रोजेक्ट मैनेजर।
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कोट:
वर्तमान में पुल निर्माण लागत 49.75 करोड़ रुपये है, जिसमें से 39.95 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है। राज्य और केंद्र सरकार से साढ़े 11 करोड़ रुपये मिलने बाकी हैं। सभी दिक्कतों को दूर कर निर्माण कार्य जल्द पूरा किया जाएगा।
- दीक्षांत, पुनर्वास विभाग के अधिशासी अभियंता।