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बेशकीमती ट्राउट मछली के उत्पादन में सरकारी रोड़ा

Mon, 27 Nov 2017 10:14 PM IST
Updated Mon, 27 Nov 2017 10:14 PM IST
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बेशकीमती ट्राउट मछली के उत्पादन में सरकारी रोड़ा
उत्तरकाशी। ऐंगलिंग के अलावा कीट पतंगों के आहार वाली बहते पानी की ट्राउट मछली के लोग मुंह मांगी कीमत चुकाने को तैयार रहते हैं। इस खास मछली को वर्ष 1910 में टिहरी रियासत के समय राजदरबार के अंग्रेज मित्र डोडीताल झील में छोड़ गए थे। अनुकूल जलवायु भारी मांग तथा मत्स्य पालन में नौजवानों की दिलचस्पी के बावजूद सरकार 107 वर्ष बीतने के बाद भी बीज व फीड का इंतजाम नहीं कर पा रही है।
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केंद्र सरकार की पहले 90 प्रतिशत और अब 60 प्रतिशत अनुदान वाली मत्स्य पालन योजना से बार्सू, नटीण, पाला, हुर्री, भंगेली व हर्षिल में कई तालाब बने। बार्सू गांव में परमेंद्र सिंह ने तीन तालाब बना कर इसमें इस बार 50 किलो ग्राम ट्राउट का उत्पादन किया। गांव में ही पहुंचे इसके खरीदारों को उन्होंने 1200 से 1500 किलो में बेच दिया। अब उनके पास आगे के लिए न मछली का बीज है न ही फीड। इसी गांव के प्रगतिशील किसान जगमोहन सिंह टमाटर, आलू तथा सेब की बागवानी के साथ ट्राउट का उत्पादन कर रहे है। हर्षिल के मानवेंद्र सिंह ने भी घर में बहते पानी वाले हिस्से में बड़ा तालाब बनाया। किंतु उन्हें न बीज मिल रहा है नहीं फीड। वे कहते हैं कि नई दिल्ली से कई खरीदार हर्षिल की स्नो ट्राउट को अपने रेफ्रिजरेटेड वाहन से उठाने को तैयार हैं, लेकिन सुस्त सरकारी सिस्टम से यहां उत्पादन नहीं हो पा रहा है। बार्सू में परमेंद्र आदि तीन बेरोजगार नौजवानों ने ग्राम पंचायत से एक हेक्टेयर का तालाब लीज पर लेकर मत्स्य पालन शुरू कर दिया है। टिहरी रियासतकाल में अंग्रेजों की मदद से असी गंगा पर कल्याणी में बना मत्स्य प्रजनन प्रक्षेत्र 2012 की बाढ़ में तबाह हो गया। अब विभाग हर्षिल में ट्राउट के लिए प्रक्षेत्र विकसित करने की बात कर रहा है।
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कोट......
विभाग चमोली बैरांगना मत्स्य प्रजनन प्रक्षेत्र तथा काशीपुर फीड प्लांट की क्षमता बढ़ाने की तैयारी कर रहा है। प्लांट में ट्राउट के लिए अलग से फीड बनाने की व्यवस्था की जा रही है। मांग के अनुसार हिमाचल से मत्स्य पालकों के लिए बीज का इंतजाम किया जाएगा।
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डा. बीपी मघवाल, उपनिदेश मत्स्य उत्तराखंड।

कोट......
उत्तरकाशी के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में स्नो ट्राउट के अलावा ब्राउन ट्राउट आदि ट्राउट की कई प्रजाति व निचले क्षेत्रों में कामन कार्प, ग्रास कार्प व नई प्रजाति आमोर के लिए उपयुक्त जलवायु है। काशीपुर फार्म से इनके बीज उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
प्रमोद कुमार शुक्ला, सहायक निदेशक मत्स्य उत्तरकाशी।
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