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मेलों में दिखी गंगा-यमुना की पौराणिक संस्कृति
Updated Mon, 20 Nov 2017 10:22 PM IST
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उत्तरकाशी। गंगा-यमुना घाटी के ग्रामीण रविवार को पारंपरिक मेलों में व्यस्त रहे। गंगा घाटी के पुजारगांव में दिलंक तो मानपुर एवं संग्राली गांव में बलिराज देवता के मेले की धूम रही। यमुनाघाटी के गैर बनाल गांव में आयोजित देवलांग मेले में अनूठी संस्कृति के रंग देखने को मिले। पारंपरिक वेशभूषा पहनकर मेलों में पहुंचे ग्रामीणों ने न केवल देवी-दवेताओं से खुशहाली की कामना की, बल्कि देव डोलियों के साथ रांसो-तांदी नृत्य किया।
गुरु कैलापीर मंदिर परिसर में आयोजित मेले में ग्रामीणों ने कैलापीर, भैरव देवता के निशान एवं माता पुंडयारी देवी की डोली के साथ रांसो नृत्य किया। इस दौरान गुरु कैलापीर भैरव देवता मां पुंडयारी धमार्थ समिति द्वारा 13 मेधावी छात्र-छात्राओं को पुरस्कृत किया गया। इस मौके पर दिवाकर प्रसाद भट्ट, पवन प्रकाश शास्त्री, शंभू प्रसाद, चंद्रशेखर, बीना भंडज्ञरी, बुद्धि प्रसाद, अरविंद नौटियाल, प्रवेश, जयप्रकाश नौटियाल आदि मौजूद थे।
वहीं धनारी क्षेत्र के पुजारगांव में आयोजित दिलंक में ग्रामीणों का सैलाब उमड़ पड़ा। ग्रामीण जंगल से दो चीड़ के पेड़ लाए, जिन्हें गांव के सिद्धेश्वर महादेव मंदिर परिसर में घास से बनी रस्सियों के सहारे खड़ा किया गया। इसके बाद रस्साकसी भी हुई। उधर यमुना घाटी के गैर बनाल गांव में आयोजित देवलांग मेले में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। राजा रघुनाथ मंदिर परिसर में मनाए गए मेले में ग्रामीण जंगल से देवदार का साबूत पेड़ लेकर पहुंचे, जिसे डंडों के सहारे मंदिर परिसर में खड़ा कर आग लगाई गई। इसके बाद पेड़ से बने कोयलों से गांव के ऊपर मड़केश्वर मंदिर में हवन यज्ञ कर मेले का समापन किया गया।
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गुरु कैलापीर मंदिर परिसर में आयोजित मेले में ग्रामीणों ने कैलापीर, भैरव देवता के निशान एवं माता पुंडयारी देवी की डोली के साथ रांसो नृत्य किया। इस दौरान गुरु कैलापीर भैरव देवता मां पुंडयारी धमार्थ समिति द्वारा 13 मेधावी छात्र-छात्राओं को पुरस्कृत किया गया। इस मौके पर दिवाकर प्रसाद भट्ट, पवन प्रकाश शास्त्री, शंभू प्रसाद, चंद्रशेखर, बीना भंडज्ञरी, बुद्धि प्रसाद, अरविंद नौटियाल, प्रवेश, जयप्रकाश नौटियाल आदि मौजूद थे।
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वहीं धनारी क्षेत्र के पुजारगांव में आयोजित दिलंक में ग्रामीणों का सैलाब उमड़ पड़ा। ग्रामीण जंगल से दो चीड़ के पेड़ लाए, जिन्हें गांव के सिद्धेश्वर महादेव मंदिर परिसर में घास से बनी रस्सियों के सहारे खड़ा किया गया। इसके बाद रस्साकसी भी हुई। उधर यमुना घाटी के गैर बनाल गांव में आयोजित देवलांग मेले में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। राजा रघुनाथ मंदिर परिसर में मनाए गए मेले में ग्रामीण जंगल से देवदार का साबूत पेड़ लेकर पहुंचे, जिसे डंडों के सहारे मंदिर परिसर में खड़ा कर आग लगाई गई। इसके बाद पेड़ से बने कोयलों से गांव के ऊपर मड़केश्वर मंदिर में हवन यज्ञ कर मेले का समापन किया गया।
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