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रखवाले ही बन रहे भोजपत्र के लिए खतरा

Fri, 13 Oct 2017 10:31 PM IST
Updated Fri, 13 Oct 2017 10:31 PM IST
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रखवाले ही बन रहे भोजपत्र के लिए खतरा

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गंगोत्री (उत्तरकाशी)। गंगोत्री नेशनल पार्क के इको सिस्टम के लिए महत्वपूर्ण भोजपत्र वृक्ष को आज उसके रखवालों से ही खतरा पैदा हो गया है। वन विभाग ने गंगोत्री से गोमुख के पैदल मार्ग के बीच में पड़ने वाले गदेरों पर संरक्षित भोजपत्र के तीन पेड़ों और टहनियों से दो पुलिया बना डाली है जबकि भोजपत्र के पेड़ को बिना अनुमति नहीं काटा जा सकता है। हालांकि विभाग का तर्क है कि ये पुलिया टूटे हुए पेड़ों से बनाई गई है, लेकिन पुलिया के आसपास ऐसे कई ठूंठ हैं, जिन्हें देखकर साफ लगता है कि इन पेड़ों को जानबूझकर काटा या तोड़ा गया होगा।
गंगोत्री से गोमुख के पैदल मार्ग के बीच में गदेरों पर भोजपत्र के तीन पेड़ काटकर पुलिया बना दी गई लेकिन यह पेड़ काटने की बात से विभाग इंकार कर रहा है। गंगोत्री नेशनल पार्क के उप निदेशक श्रवण कुमार का कहना है कि विभाग की ओर से केवल प्राकृतिक तरीके से टूटे हुए वृक्षों से ही पुलिया बनाई जाती है। ऐसे स्थानों में जो संसाधन मौजूद होते हैं उन्हीं का प्रयोग किया जा सकता है। भोजपत्र का पेड़ संरक्षित है इसे बिना अनुमति नहीं काटा जा सकता है।
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इंसेट
संरक्षित है भोजपत्र का पेड़
भोजपत्र की छाल में पांडुलिपियों को लिखा गया है। वहीं भारतीय वन अनुसंधान केंद्र के वैज्ञानिकों के अनुसार भोजपत्र का उपयोग दमा और मिर्गी जैसे रोगों के इलाज में किया जाता है। वर्ष 2007 में डेक्कन हेराल्ड में छपी रिपोर्ट के अनुसार यह पेड़ विलुप्ति की कगार पर है, जिसका सबसे बड़ा कारण कांवड़िए और पर्यटक हैं, जो धार्मिक प्रयोग के लिए भोजपत्र वृक्ष को नुकसान पहुंचाते है। पर्यावरणविद हर्षवंति बिष्ट ने बताया कि यही एक मात्र पेड़ है जो गोमुख के उच्च हिमालयी क्षेत्र में उगता है और संरक्षित है। अब वन विभाग की जिम्मेदारी है कि वो इस वृक्ष को विलुप्त न होने सके।
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